गोंडा: गोंडा जिले के ऐतिहासिक टॉमसन इंटर कॉलेज मैदान में आयोजित नौ दिवसीय संगीतमय श्रीराम कथा का मंगलवार को भव्य राज्याभिषेक के साथ समापन हो गया। अंतिम दिन कथा स्थल पर श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा और पूरा वातावरण “राजा रामचंद्र की जय” के गगनभेदी जयकारों से गूंज उठा।
कथा के मुख्य वक्ता महामृत्युंजय पीठाधीश्वर स्वामी प्रणव पुरी जी महाराज ने अंतिम दिन भगवान श्रीराम के वनवास से अयोध्या लौटने और सिंहासन पर विराजमान होने के प्रसंग का अत्यंत मार्मिक वर्णन किया। उन्होंने कहा कि श्रीराम का राज्याभिषेक केवल सत्ता ग्रहण करने का प्रसंग नहीं, बल्कि अधर्म पर धर्म की विजय और रामराज्य की स्थापना का संकल्प था।
राम के आदर्श आज भी प्रासंगिक – स्वामी प्रणव पुरी महाराज
स्वामी प्रणव पुरी जी महाराज ने कथा के दौरान सनातन धर्म की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि भगवान राम के आदर्श आज भी उतने ही प्रासंगिक हैं जितने त्रेतायुग में थे। उन्होंने श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा—
“अगर कोई आपके साथ गलत करता है, तो आप वैसा न करें। यही भगवान राम का संदेश है। जो भी कथा सुनने आया है, वह यहां से कुछ न कुछ सीखकर जरूर जाए।”
उन्होंने समाज में संस्कार, संयम और समरसता बनाए रखने का आह्वान करते हुए कहा कि राम के आदर्शों को जीवन में उतारने से ही सच्चा रामराज्य स्थापित हो सकता है।
राज्याभिषेक के दौरान भक्ति में डूबा पंडाल
राज्याभिषेक के समय पूरा पंडाल फूलों की खुशबू और भक्ति के रंग में सराबोर हो गया। हजारों महिलाएं ताली बजाती और भजनों पर झूमती नजर आईं। जैसे ही मंच पर भगवान श्रीराम का प्रतीकात्मक राज्याभिषेक किया गया, ढोल-नगाड़ों और शंखध्वनि से पूरा परिसर गूंज उठा। श्रद्धालुओं ने आरती उतारकर प्रभु राम का आशीर्वाद लिया।
भव्य भंडारे का आयोजन, देर रात तक चला प्रसाद वितरण
कथा की पूर्णाहूति के बाद आयोजन समिति की ओर से भव्य भंडारे का आयोजन किया गया। गोंडा शहर के साथ-साथ आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों से भी हजारों श्रद्धालु प्रसाद ग्रहण करने पहुंचे।
भंडारे की व्यवस्था को सुचारू बनाए रखने के लिए बड़ी संख्या में सेवादारों की तैनाती की गई थी। देर रात तक श्रद्धालु पंक्तिबद्ध होकर शांतिपूर्वक प्रसाद ग्रहण करते रहे। श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो, इसके लिए पर्याप्त प्रकाश और व्यवस्थाओं का विशेष ध्यान रखा गया।
गोंडा में आयोजित नौ दिवसीय श्रीराम कथा न केवल धार्मिक आयोजन रही, बल्कि समाज को नैतिकता, संयम और सदाचार का संदेश देने वाला आध्यात्मिक पर्व साबित हुई। स्वामी प्रणव पुरी महाराज के प्रवचनों ने श्रद्धालुओं को भगवान राम के आदर्शों पर चलने की प्रेरणा दी और कथा का समापन भक्ति, उल्लास और अनुशासन के साथ संपन्न हुआ।



