गंगासागर। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी मंगलवार को गंगासागर मेले की तैयारियों का जायजा लेने दो दिन के दौरे पर सागर आइलैंड पहुंचीं। इस दौरान उन्होंने स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) को लेकर चुनाव आयोग पर गंभीर आरोप लगाए।
ममता बनर्जी ने कहा कि राज्य में चल रही SIR प्रक्रिया में भाजपा की आईटी सेल के बनाए मोबाइल ऐप्स का इस्तेमाल किया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग SIR के दौरान हर तरह के गलत कदम उठा रहा है। इसके तहत एलिजिबल वोटर्स को मरा हुआ बताया जा रहा है, और बुजुर्ग और बीमार लोगों को मतदान केंद्र पर वैधता साबित करने के लिए मजबूर किया जा रहा है।
बनर्जी ने लोगों से कहा कि SIR में हिस्सा लेते समय सावधान रहें और जरूरतमंद लोगों की मदद करें। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य केवल जनता की सेवा करना है, न कि किसी राजनीतिक कार्यकर्ता का समर्थन।
सुप्रीम कोर्ट में याचिका
TMC के सांसद डेरेक ओ ब्रायन ने चुनाव आयोग के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है। इसमें आरोप लगाया गया है कि पश्चिम बंगाल में SIR प्रक्रिया मनमानी तरीके से और अवैध तरीकों से संचालित की जा रही है। पार्टी ने चेतावनी दी कि राज्य में चुनाव आयोग के SIR के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
ममता बनर्जी ने सोमवार को कहा था कि SIR प्रक्रिया से 70 लोगों की मौत हो चुकी है और कई लोग अस्पताल में भर्ती हैं। उन्होंने यह भी कहा कि वह सुप्रीम कोर्ट में एक आम नागरिक के तौर पर पेश होंगी और जनता की पैरवी करेंगी।
ममता का आरोप– चुनाव आयोग वॉट्सऐप पर चला रहा SIR
ममता ने कहा कि चुनाव आयोग SIR को वॉट्सऐप के माध्यम से भी चला रहा है, जिससे जनता को अत्यधिक परेशान किया जा रहा है। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का भी नाम लेकर चेतावनी दी, कहा कि यदि लोगों के अधिकार छीन लिए गए तो जिम्मेदारों को भी जवाब देना होगा।
गंभीर आरोप– 70 मौतें
ममता ने बताया कि गंभीर रूप से बीमार लोगों को भी मतदान केंद्रों पर कतार में खड़ा होना पड़ा, और केवल वैधता साबित करने के लिए दबाव बनाया गया। उन्होंने कहा, “अगर आपकी 85 वर्षीय मां को एम्बुलेंस में घसीटा जाए, तो दिल्ली के नेता क्या जवाब देंगे?”
ममता बनर्जी के आरोपों ने SIR प्रक्रिया और चुनाव आयोग के संचालन को लेकर राजनीतिक बहस को और गर्मा दिया है। TMC द्वारा सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर करने से यह मामला अब न्यायालय के दायरे में आ गया है। राज्य में SIR प्रक्रिया के तहत वोटर अधिकारों की सुरक्षा और प्रक्रियाओं की पारदर्शिता पर ध्यान केंद्रित करने की आवश्यकता है। आने वाले दिनों में सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई और प्रशासन की प्रतिक्रिया इस विवाद के दिशा-निर्धारण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।



