गोंडा। गोंडा–बलरामपुर मुख्य मार्ग पर स्थित वर्ष 1912 में निर्मित बिसुही पुल अब पूरी तरह जर्जर हो चुका है। पुल की दयनीय स्थिति के चलते प्रतिदिन यहां घंटों लंबा जाम लग रहा है, जिससे आम नागरिकों, विद्यार्थियों, मरीजों और व्यापारियों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। पुल के पुनर्निर्माण की मांग को लेकर अब जनआंदोलन की शुरुआत हो चुकी है।
हस्ताक्षर अभियान को मिल रहा भारी समर्थन
पुल निर्माण की मांग को लेकर राष्ट्रीय छात्र पंचायत ने एक व्यापक हस्ताक्षर अभियान शुरू किया है। इस अभियान के तहत अब तक 3200 से अधिक लोगों ने हस्ताक्षर कर पुल के शीघ्र पुनर्निर्माण की मांग का समर्थन किया है। अभियान में प्रतिदिन बड़ी संख्या में लोग जुड़ रहे हैं और स्थानीय नागरिक एक-दूसरे को जागरूक कर हस्ताक्षर कराने में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।
मुख्यमंत्री को भेजा जाएगा पत्र
राष्ट्रीय छात्र पंचायत के राष्ट्रीय अध्यक्ष शिवम पांडेय ने बताया कि बिसुही पुल के निर्माण की मांग लंबे समय से की जा रही है, लेकिन प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की ओर से अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। उन्होंने कहा कि हस्ताक्षर अभियान पूर्ण होने के बाद मुख्यमंत्री को पत्र भेजकर जनभावनाओं से अवगत कराया जाएगा।
मांग नहीं मानी तो होगा बड़ा आंदोलन
शिवम पांडेय ने चेतावनी दी कि यदि इसके बाद भी पुल निर्माण को लेकर कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया, तो बड़ा जनआंदोलन किया जाएगा, जिसकी जिम्मेदारी प्रशासन और स्थानीय जनप्रतिनिधियों की होगी। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि पहले बलरामपुर सदर विधायक पलटू राम इसी मार्ग से आवागमन करते थे, लेकिन विरोध और चेतावनी के बाद उन्होंने इस मार्ग का उपयोग बंद कर दिया है।
छात्रों की पढ़ाई पर पड़ रहा सीधा असर
छात्र आकाश दुबे ने बताया कि पुल पर लगने वाले जाम के कारण उनकी बस रोजाना एक से डेढ़ घंटे लेट पहुंचती है, जिससे उनका पाठ्यक्रम प्रभावित हो रहा है। वहीं छात्र सुरेंद्र कनौजिया ने कहा कि लंबे जाम के कारण उन्हें भी रोज कॉलेज पहुंचने में देरी होती है। छात्रों ने सरकार से जल्द से जल्द पुल निर्माण कराने की मांग की है।
आमजन की परेशानी बढ़ी
स्थानीय लोगों का कहना है कि यह पुल न केवल गोंडा और बलरामपुर को जोड़ने वाला महत्वपूर्ण मार्ग है, बल्कि इस पर रोजाना हजारों वाहन गुजरते हैं। जर्जर पुल के कारण कभी भी बड़ा हादसा होने की आशंका बनी हुई है।
113 साल पुराने बिसुही पुल की बदहाल स्थिति अब केवल असुविधा नहीं, बल्कि गंभीर खतरा बन चुकी है। 3200 से अधिक लोगों का समर्थन यह साफ दर्शाता है कि जनता अब चुप बैठने को तैयार नहीं है। यदि जल्द पुल निर्माण का कार्य शुरू नहीं हुआ, तो यह हस्ताक्षर अभियान एक बड़े जनआंदोलन का रूप ले सकता है।



