सफेदाबाद: स्थित Shalimar Paradise Society इन दिनों सिर्फ चोरी की घटनाओं को लेकर ही नहीं, बल्कि मेंटेनेंस खर्च, सिक्योरिटी सिस्टम और फंड पारदर्शिता को लेकर भी सुर्खियों में आ गई है। हाल ही में सोसाइटी के कई खाली पड़े विला में हुई चोरी की घटनाओं के बाद रेजिडेंट्स का गुस्सा खुलकर सामने आ गया है।
लोगों का आरोप है कि लाखों रुपये खर्च किए जाने के बावजूद न तो सुरक्षा व्यवस्था मजबूत दिखाई दे रही है और न ही बेसिक सुविधाओं की स्थिति में कोई खास सुधार नजर आ रहा है। अब सोसाइटी के अंदर “मेंटेनेंस या कमीशन मॉडल?” जैसी चर्चाएं खुलकर होने लगी हैं।
चोरी की घटनाओं ने बढ़ाई चिंता
रेजिडेंट्स के मुताबिक, हाल के दिनों में कई खाली पड़े विला को निशाना बनाकर चोरी की घटनाएं हुई हैं। इससे सोसाइटी के लोगों के बीच डर और नाराजगी दोनों बढ़ गई हैं।
लोगों का कहना है कि अगर सोसाइटी में पहले से CCTV कैमरे, सिक्योरिटी गार्ड और मॉनिटरिंग सिस्टम मौजूद थे, तो आखिर चोर इतनी आसानी से अंदर कैसे पहुंचे? कई निवासियों ने सवाल उठाया कि लाखों रुपये खर्च होने के बाद भी सुरक्षा व्यवस्था केवल कागजों तक सीमित क्यों दिखाई दे रही है।

“1 लाख का काम 2 लाख में?” खर्च पर सवाल
सोसाइटी के अंदर अब सबसे ज्यादा चर्चा में मेंटेनेंस और गार्डनिंग खर्च है। कई रेजिडेंट्स का आरोप है कि पहले जिस काम पर करीब 1 लाख रुपये खर्च होते थे, अब उसी काम का बिल लगभग दोगुना दिखाया जा रहा है।
कुछ लोगों का दावा है कि कुछ चुनिंदा एजेंसियों और नर्सरी को फायदा पहुंचाने के लिए खर्च बढ़ाया गया है। आरोप यह भी है कि गार्डनिंग और सफाई का काम पूरी सोसाइटी में समान रूप से नहीं हो रहा, बल्कि केवल कुछ चुनिंदा विला तक सीमित दिखाई देता है।
रेजिडेंट्स के बीच यह सवाल तेजी से उठ रहा है कि आखिर बढ़ते खर्च के बावजूद सुविधाओं में सुधार क्यों नहीं दिख रहा।
CCTV और सिक्योरिटी सिस्टम पर उठे सवाल
चोरी की घटनाओं के बाद CCTV और सिक्योरिटी व्यवस्था को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। कुछ निवासियों का कहना है कि हाल ही में कैमरों और सिक्योरिटी अपग्रेड पर भारी रकम खर्च की गई थी, लेकिन जमीनी स्तर पर उसका असर दिखाई नहीं देता।
खाली पड़े विला की नियमित मॉनिटरिंग नहीं होने और कई जगहों पर कैमरों के ठीक से काम न करने की शिकायतें भी सामने आई हैं। लोगों का कहना है कि सिक्योरिटी स्टाफ की संख्या और उनकी निगरानी प्रणाली दोनों पर दोबारा समीक्षा होनी चाहिए।
मच्छर, गंदगी और बदहाल सफाई व्यवस्था
सोसाइटी के अंदर लंबे समय से जमा पानी, पुराने स्विमिंग पूल की सफाई और गंदगी को लेकर भी लोगों में नाराजगी है। निवासियों का कहना है कि कई स्थानों पर पानी जमा होने से मच्छरों का खतरा लगातार बढ़ रहा है।
कुछ रेजिडेंट्स ने व्यंग्य करते हुए कहा कि “शायद मच्छरों और मैनेजमेंट के बीच कोई समझौता हो गया है।” उनका आरोप है कि शिकायतें बार-बार करने के बावजूद कोई स्थायी समाधान नहीं निकाला जा रहा।
बच्चों और बुजुर्गों की सेहत को लेकर भी लोगों ने चिंता जताई है।
अब उठी स्वतंत्र ऑडिट की मांग
बढ़ते विवाद के बीच अब सोसाइटी में स्वतंत्र ऑडिट की मांग तेज हो गई है। कई रेजिडेंट्स चाहते हैं कि पूरे मेंटेनेंस और सिक्योरिटी खर्च की जांच किसी स्वतंत्र CA या एजेंसी से कराई जाए।
लोगों की मुख्य मांगें इस प्रकार हैं—
- सभी कॉन्ट्रैक्ट सार्वजनिक किए जाएं
- Lowest Bidder प्रक्रिया लागू की जाए
- पूरे खर्च का CA Audit कराया जाए
- सिक्योरिटी और मेंटेनेंस की वास्तविक रिपोर्ट रेजिडेंट्स को दी जाए
- खर्च और सुविधाओं की मासिक पारदर्शी रिपोर्ट जारी हो
“भरोसे का संकट” बनता जा रहा मामला
रेजिडेंट्स का कहना है कि मामला अब केवल चोरी या मेंटेनेंस तक सीमित नहीं है। यह सोसाइटी के लोगों के भरोसे और पारदर्शिता से जुड़ चुका है।
कई निवासियों का मानना है कि यदि समय रहते स्पष्ट जवाब और ठोस कार्रवाई नहीं हुई, तो विवाद कानूनी और प्रशासनिक स्तर तक पहुंच सकता है।
सोसाइटी के भीतर अब यह चर्चा भी तेज हो रही है कि आने वाले दिनों में रेजिडेंट्स सामूहिक बैठक कर आगे की रणनीति तय कर सकते हैं।
क्या कहता है मैनेजमेंट?
हालांकि इस पूरे मामले पर अभी तक सोसाइटी मैनेजमेंट की ओर से कोई विस्तृत आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। लेकिन रेजिडेंट्स का कहना है कि उन्हें जल्द पारदर्शी जवाब और ठोस कार्यवाही चाहिए।


