एक हफ्ते से अंधेरे में गांव! जला ट्रांसफार्मर नहीं बदला, चंदा जुटाने के बाद भी नहीं मिली बिजली; ग्रामीणों का फूटा गुस्सा

बस्ती। उत्तर प्रदेश में बिजली व्यवस्था को लेकर सरकार लगातार बड़े-बड़े दावे करती रही है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और ऊर्जा मंत्री एके शर्मा कई मंचों से प्रदेश में बेहतर और निर्बाध बिजली आपूर्ति की बात करते हैं। लेकिन जमीनी स्तर पर कई ग्रामीण क्षेत्रों की तस्वीर इन दावों से बिल्कुल अलग नजर आ रही है। बस्ती जिले के कप्तानगंज क्षेत्र का एक गांव इन दिनों इसी बदहाल व्यवस्था का उदाहरण बना हुआ है।

कप्तानगंज उपकेंद्र के दुबौला-हरदी फीडर से जुड़े बेलघाट गांव में पिछले सप्ताह तेज आंधी और बारिश के दौरान बिजली का ट्रांसफार्मर जल गया था। ग्रामीणों का आरोप है कि घटना को एक सप्ताह से अधिक समय बीत चुका है, लेकिन अभी तक ट्रांसफार्मर नहीं बदला गया। नतीजतन पूरा गांव अंधेरे में रहने को मजबूर है और भीषण गर्मी में लोगों की मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही हैं।

गर्मी और बिजली संकट ने बढ़ाई परेशानी

जून महीने की तपती गर्मी में बिजली लोगों की सबसे बड़ी जरूरत बन जाती है। गांव में बिजली न होने से न केवल पंखे और कूलर बंद पड़े हैं, बल्कि पेयजल की समस्या भी गहराने लगी है।

ग्रामीणों का कहना है कि दिनभर तेज धूप और उमस के बाद रात में भी राहत नहीं मिल रही। बच्चे, बुजुर्ग और महिलाएं सबसे ज्यादा परेशान हैं। कई घरों में इनवर्टर भी जवाब दे चुके हैं, जिससे लोगों को अंधेरे में रात बितानी पड़ रही है।

स्थानीय लोगों के अनुसार बिजली आपूर्ति बंद होने से छोटे कारोबार और खेती-किसानी से जुड़े कार्य भी प्रभावित हो रहे हैं।

शिकायतों का लगा अंबार, नहीं मिला समाधान

ग्रामीणों का आरोप है कि ट्रांसफार्मर जलने के तुरंत बाद बिजली विभाग को सूचना दे दी गई थी। इसके बाद कई बार संबंधित अधिकारियों से संपर्क किया गया।

लोगों ने पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम, यूपीपीसीएल और ऊर्जा मंत्री के आधिकारिक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म तक अपनी शिकायतें पहुंचाईं। हालांकि हर बार केवल “जल्द समाधान” का आश्वासन मिला, लेकिन मौके पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।

ग्रामीणों का कहना है कि शिकायत दर्ज कराने के बावजूद अधिकारी केवल तारीख पर तारीख दे रहे हैं।

संविदा कर्मियों पर रुपये मांगने का आरोप

मामले में एक और गंभीर आरोप सामने आया है। ग्रामीणों का कहना है कि जब उन्होंने क्षेत्र में तैनात संविदा बिजली कर्मियों से ट्रांसफार्मर बदलने का अनुरोध किया, तो उनसे पैसों की मांग की गई।

ग्रामीणों के अनुसार गांव के लोगों ने आपस में चंदा करके रकम भी जुटाई, ताकि जल्द बिजली बहाल हो सके। इसके बावजूद अब तक ट्रांसफार्मर नहीं बदला गया।

हालांकि इस आरोप की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है, लेकिन ग्रामीणों का दावा है कि उन्होंने इस संबंध में भी अधिकारियों को जानकारी दी है।

सरकारी दावों पर उठ रहे सवाल

बेलघाट गांव के लोगों का कहना है कि जब प्रदेश सरकार 24 घंटे बिजली और बेहतर विद्युत व्यवस्था के दावे करती है, तब जमीनी हकीकत कुछ और ही दिखाई देती है।

ग्रामीणों का सवाल है कि यदि एक ट्रांसफार्मर बदलने में एक सप्ताह से अधिक समय लग रहा है, तो आम जनता सरकारी दावों पर कैसे भरोसा करे?

स्थानीय निवासियों का कहना है कि बिजली केवल सुविधा नहीं, बल्कि आज के समय में बुनियादी आवश्यकता बन चुकी है। ऐसे में लंबे समय तक बिजली बाधित रहने से लोगों का दैनिक जीवन पूरी तरह प्रभावित हो रहा है।

प्रशासन और विभाग से कार्रवाई की मांग

ग्रामीणों ने जिला प्रशासन और बिजली विभाग से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। उनका कहना है कि यदि जल्द नया ट्रांसफार्मर नहीं लगाया गया, तो वे आंदोलन करने के लिए मजबूर होंगे।

लोगों की मांग है कि मामले की जांच कर यह भी पता लगाया जाए कि शिकायतों के बावजूद ट्रांसफार्मर बदलने में इतनी देरी क्यों हुई और यदि किसी स्तर पर लापरवाही हुई है तो जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए।

ग्रामीणों की उम्मीद अब भी बरकरार

लगातार परेशानियों के बावजूद ग्रामीणों को उम्मीद है कि उनकी आवाज संबंधित अधिकारियों तक पहुंचेगी और जल्द बिजली आपूर्ति बहाल होगी।

बेलघाट गांव के लोगों का कहना है कि उन्हें केवल आश्वासन नहीं बल्कि वास्तविक समाधान चाहिए, ताकि भीषण गर्मी के इस दौर में उन्हें राहत मिल सके।

बस्ती जिले के बेलघाट गांव में जले ट्रांसफार्मर के कारण पिछले एक सप्ताह से अधिक समय से बिजली आपूर्ति ठप है। शिकायतों, सोशल मीडिया अपील और स्थानीय प्रयासों के बावजूद समस्या का समाधान नहीं हो पाया है। भीषण गर्मी में ग्रामीणों की परेशानी लगातार बढ़ रही है। अब लोगों की नजर बिजली विभाग और प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हुई है।

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