“ऑपरेशन सिंदूर से तिलमिलाया पाकिस्तान! अब ग्राफिटी और प्रोपेगेंडा से भारतीय युवाओं को भड़काने की साजिश, ISI का नया ‘सॉफ्ट टेरर’ प्लान बेनकाब”

नई दिल्ली: भारतीय सुरक्षा एजेंसियों की सख्ती और सीमा पर लगातार नाकाम हो रही घुसपैठ के बीच पाकिस्तान ने भारत के खिलाफ एक नई रणनीति अपनाने की कथित कोशिश शुरू कर दी है। खुफिया सूत्रों के अनुसार, अब पाकिस्तान सीधे आतंकी हमलों या घुसपैठ के बजाय “सॉफ्ट टेरर” और “ग्राफिटी वॉर” के जरिए भारत के भीतर भ्रम और अस्थिरता पैदा करने की योजना पर काम कर रहा है।

बताया जा रहा है कि ऑपरेशन सिंदूर के बाद पाकिस्तान को सुरक्षा और कूटनीतिक मोर्चे पर भारी दबाव का सामना करना पड़ा। इसके बाद भारत में असंतोष फैलाने और युवाओं को प्रभावित करने के लिए एक नया प्रोपेगेंडा मॉडल तैयार किया गया है। सुरक्षा एजेंसियां इस पूरे मामले पर नजर बनाए हुए हैं और इसे राष्ट्रीय सुरक्षा के लिहाज से गंभीरता से देख रही हैं।

क्या है पाकिस्तान का कथित नया ‘सॉफ्ट टेरर’ मॉडल?

खुफिया रिपोर्टों के अनुसार, पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI अब सोशल नैरेटिव, मनोवैज्ञानिक प्रभाव और भ्रामक प्रचार के जरिए भारत को निशाना बनाने की कोशिश कर रही है। इस रणनीति का उद्देश्य सीधे हिंसा फैलाना नहीं, बल्कि युवाओं की सोच को प्रभावित कर समाज में भ्रम और अविश्वास पैदा करना बताया जा रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि आधुनिक दौर में सूचना युद्ध (Information Warfare) और मनोवैज्ञानिक अभियान (Psychological Operations) किसी भी देश की सुरक्षा के लिए बड़ी चुनौती बन चुके हैं। ऐसे अभियान सोशल मीडिया, ग्राफिटी, पोस्टर, अफवाहों और डिजिटल प्रचार के माध्यम से चलाए जाते हैं।

‘तहरीक-ए-तालिबान हिंदुस्तान’ के नाम पर फैलाया जा रहा भ्रम

रिपोर्ट के मुताबिक, ISI एक कथित फर्जी संगठन “तहरीक-ए-तालिबान हिंदुस्तान” (TTH) का नैरेटिव खड़ा करने की कोशिश कर रही है। सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह के नामों का इस्तेमाल भ्रम पैदा करने और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गलत संदेश देने के लिए किया जा सकता है।

पाकिस्तान लंबे समय से अपने यहां सक्रिय आतंकी और अलगाववादी संगठनों की गतिविधियों को लेकर आलोचनाओं का सामना करता रहा है। ऐसे में भारत के खिलाफ नए नैरेटिव तैयार कर अंतरराष्ट्रीय मंचों पर ध्यान भटकाने की कोशिश किए जाने की आशंका जताई जा रही है।

सीमावर्ती राज्यों के युवाओं को बनाया जा रहा निशाना

खुफिया सूत्रों के अनुसार, सीमावर्ती इलाकों में रहने वाले कुछ युवाओं को निशाना बनाने की कोशिश की जा रही है। विशेष रूप से आर्थिक रूप से कमजोर और नशे की गिरफ्त में फंसे युवाओं को आसान लक्ष्य माना जा रहा है।

बताया गया है कि कुछ मामलों में युवाओं को छोटी रकम देकर सार्वजनिक स्थानों, रेलवे स्टेशनों, बस अड्डों, सरकारी भवनों और कॉलेज परिसरों की दीवारों पर भड़काऊ या भारत विरोधी संदेश लिखवाने की कोशिश की जा सकती है। ऐसे संदेशों का उद्देश्य समाज में असंतोष और भ्रम का माहौल बनाना बताया जा रहा है।

ग्राफिटी वॉर के पीछे क्या है मकसद?

सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि ग्राफिटी केवल दीवारों पर लिखे गए शब्द नहीं होते, बल्कि यह एक मनोवैज्ञानिक उपकरण भी हो सकते हैं। यदि किसी क्षेत्र में लगातार भड़काऊ संदेश दिखाई दें तो स्थानीय लोगों के मन में असुरक्षा और अविश्वास का माहौल बन सकता है।

खुफिया एजेंसियों का कहना है कि ऐसी गतिविधियों का मकसद कश्मीर, खालिस्तान और मानवाधिकार जैसे संवेदनशील मुद्दों को लेकर झूठे या भ्रामक नैरेटिव फैलाना हो सकता है। इसके जरिए युवाओं को सरकार और संस्थाओं के खिलाफ भड़काने की कोशिश की जा सकती है।

भारतीय एजेंसियां अलर्ट मोड पर

राष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसियों ने सीमावर्ती राज्यों और संवेदनशील इलाकों में निगरानी बढ़ा दी है। सोशल मीडिया गतिविधियों, संदिग्ध फंडिंग और युवाओं को प्रभावित करने वाले नेटवर्क पर विशेष नजर रखी जा रही है।

सुरक्षा अधिकारियों का कहना है कि किसी भी प्रकार की संदिग्ध गतिविधि, भड़काऊ ग्राफिटी या राष्ट्रविरोधी प्रचार मिलने पर तुरंत जांच की जा रही है। इसके साथ ही युवाओं को जागरूक करने और फर्जी प्रोपेगेंडा से बचाने के लिए भी अभियान चलाए जा रहे हैं।

भारत के खिलाफ कथित “सॉफ्ट टेरर” और “ग्राफिटी वॉर” जैसी रणनीतियां इस बात का संकेत हैं कि आधुनिक दौर में सुरक्षा चुनौतियां केवल सीमा तक सीमित नहीं रह गई हैं। सूचना युद्ध, मनोवैज्ञानिक प्रचार और युवाओं को गुमराह करने के प्रयास भी राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बन सकते हैं। हालांकि भारतीय सुरक्षा एजेंसियां पूरी सतर्कता के साथ स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं और किसी भी साजिश को नाकाम करने के लिए लगातार कार्रवाई कर रही हैं।

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