11 हजार का टिकट 24 हजार में खरीदा, फिर भी पहुंचे जेल! फर्जी टिकट गैंग का पर्दाफाश, 6 यात्री गिरफ्तार

गोंडा। रेलवे टिकटों की कालाबाजारी और ऑनलाइन फर्जीवाड़े के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत रेलवे सुरक्षा बल (RPF) को बड़ी सफलता मिली है। गोंडा और बस्ती आरपीएफ की संयुक्त कार्रवाई में छह यात्रियों को गिरफ्तार किया गया है, जो कथित रूप से दूसरे लोगों के नाम पर बुक किए गए और बाद में एडिट किए गए टिकटों पर यात्रा कर रहे थे।

जांच में खुलासा हुआ कि इन यात्रियों ने जल्द यात्रा करने की मजबूरी में दलालों से संपर्क किया था। दलालों ने पहले से बुक किए गए टिकटों में नाम, पहचान संबंधी जानकारी और आधार कार्ड के QR कोड में बदलाव कर उन्हें ऊंची कीमतों पर बेच दिया।

मुंबई की यात्रा के दौरान पकड़े गए यात्री

आरपीएफ अधिकारियों के अनुसार गिरफ्तार यात्रियों में मुंबई निवासी सुनील और रीना, संत कबीर नगर के हरिकेश, सत्येंद्र सिंह और फैजान अहमद तथा महाराजगंज के ईश्वर चंद्र शामिल हैं।

ये सभी यात्री बस्ती से मुंबई के लोकमान्य तिलक टर्मिनस की यात्रा कर रहे थे। बुधवार सुबह करीब 11 बजे जांच अभियान के दौरान इनकी टिकटों की जांच की गई, जिसमें कई विसंगतियां सामने आईं। इसके बाद सभी को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू की गई।

11 हजार के टिकट के लिए चुकाए 23 हजार रुपये

पूछताछ में सामने आया कि यात्रियों ने टिकट हासिल करने के लिए दलालों को ऑनलाइन भुगतान किया था। जिन टिकटों की वास्तविक कीमत लगभग 11,866 रुपये थी, उनके लिए यात्रियों से करीब 23,900 रुपये वसूले गए।

यानी टिकटों की वास्तविक कीमत से लगभग दोगुना पैसा लेकर उन्हें यात्रा की सुविधा देने का दावा किया गया था। जांच अधिकारियों का मानना है कि इस तरह का नेटवर्क लंबे समय से सक्रिय हो सकता है।

नाम और आधार कार्ड में की गई थी छेड़छाड़

जांच में यह भी सामने आया कि दलालों ने पहले से बुक किए गए टिकटों में यात्रियों के नाम बदल दिए थे। इसके साथ ही आधार कार्ड के QR कोड और अन्य पहचान संबंधी जानकारियों में भी डिजिटल एडिटिंग की गई थी।

प्रथम दृष्टया यह एक संगठित साइबर और टिकट फर्जीवाड़ा नेटवर्क का मामला माना जा रहा है, जिसमें तकनीकी तरीकों का इस्तेमाल करके रेलवे की व्यवस्था को चकमा देने की कोशिश की गई।

बरामद हुए अहम सबूत

आरपीएफ ने गिरफ्तार यात्रियों के पास से कई महत्वपूर्ण दस्तावेज और डिजिटल साक्ष्य बरामद किए हैं। इनमें एडिट किए गए टिकट, आधार कार्ड की प्रतियां, ऑनलाइन भुगतान के रिकॉर्ड, बैंक ट्रांजैक्शन डिटेल और दलालों के साथ हुई चैट शामिल हैं।

इन साक्ष्यों के आधार पर अब दलालों और पूरे नेटवर्क की तलाश शुरू कर दी गई है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने में जुटी हैं कि इस गिरोह ने अब तक कितने यात्रियों को इसी तरह टिकट उपलब्ध कराए हैं।

रेलवे सुरक्षा बल ने दर्ज किए छह मुकदमे

गोंडा आरपीएफ में सभी छह यात्रियों के खिलाफ अलग-अलग मामले दर्ज किए गए हैं। अधिकारियों का कहना है कि जांच के बाद यदि दलालों की संलिप्तता प्रमाणित होती है तो उनके खिलाफ भी कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

गोंडा आरपीएफ प्रभारी अनिरुद्ध कुमार ने बताया कि यह कार्रवाई बस्ती आरपीएफ प्रभारी राशिद बेग मिर्जा के सहयोग से की गई। दोनों टीमों ने संयुक्त रूप से अभियान चलाकर इस नेटवर्क का खुलासा किया।

यात्रियों के लिए चेतावनी

रेलवे अधिकारियों ने यात्रियों से अपील की है कि वे केवल अधिकृत रेलवे प्लेटफॉर्म या मान्यता प्राप्त माध्यमों से ही टिकट खरीदें। किसी भी अनजान व्यक्ति, सोशल मीडिया एजेंट या निजी दलाल से टिकट खरीदना कानूनी परेशानी में डाल सकता है।

अधिकारियों का कहना है कि फर्जी टिकट पर यात्रा करने वाले यात्रियों के खिलाफ भी कार्रवाई की जा सकती है, भले ही उन्होंने टिकट किसी दलाल से खरीदा हो।

रेलवे का अभियान रहेगा जारी

रेलवे विभाग ने स्पष्ट किया है कि टिकट दलालों और फर्जीवाड़ा करने वालों के खिलाफ अभियान आगे भी जारी रहेगा। डिजिटल जांच, साइबर ट्रैकिंग और संयुक्त छापेमारी के जरिए ऐसे नेटवर्क को खत्म करने की कोशिश की जा रही है।

अधिकारियों का मानना है कि यात्रियों की जागरूकता और सख्त कार्रवाई से ही इस तरह के अपराधों पर अंकुश लगाया जा सकता है।

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