गोंडा मेडिकल कॉलेज में खत्म हुई एंटी रेबीज वैक्सीन! मरीजों में हड़कंप, बाजार से महंगे दाम पर खरीदने की मजबूरी

उत्तर प्रदेश: के गोंडा मेडिकल कॉलेज में एंटी रेबीज वैक्सीन (ARV) का स्टॉक समाप्त होने से मरीजों की मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही हैं। कुत्ते, बंदर या अन्य रेबीज संक्रमण का खतरा पैदा करने वाले जानवरों के काटने के बाद इलाज के लिए पहुंचने वाले मरीजों को अस्पताल से बिना वैक्सीन लौटना पड़ रहा है। ऐसे में उन्हें मजबूरी में निजी मेडिकल स्टोर से महंगे दामों पर वैक्सीन खरीदनी पड़ रही है।

अस्पताल प्रशासन के अनुसार, एंटी रेबीज वैक्सीन का नियमित स्टॉक 25 जून को ही समाप्त हो गया था। आपातकालीन स्थिति के लिए जो सीमित मात्रा में वैक्सीन बचाकर रखी गई थी, वह भी बुधवार सुबह लगभग 11 बजे पूरी तरह खत्म हो गई। इसके बाद अस्पताल में आने वाले मरीजों को वैक्सीन उपलब्ध नहीं कराई जा सकी।

प्रतिदिन सैकड़ों मरीज प्रभावित

गोंडा मेडिकल कॉलेज में प्रतिदिन बड़ी संख्या में ऐसे मरीज पहुंचते हैं जिन्हें कुत्ते, बंदर या अन्य जानवरों ने काटा होता है। रेबीज जैसी गंभीर बीमारी से बचाव के लिए समय पर एंटी रेबीज वैक्सीन लगना बेहद आवश्यक माना जाता है।

लेकिन वैक्सीन उपलब्ध न होने के कारण रोजाना सैकड़ों मरीजों और उनके परिजनों को निराश होकर वापस लौटना पड़ रहा है। कई लोगों ने बताया कि उन्हें निजी मेडिकल स्टोर से अधिक कीमत देकर वैक्सीन खरीदनी पड़ रही है, जिससे आर्थिक बोझ भी बढ़ रहा है।

समय पर वैक्सीन न मिलने से बढ़ सकता है खतरा

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, रेबीज एक जानलेवा संक्रमण है और इसका समय पर उपचार न मिलने पर गंभीर परिणाम हो सकते हैं। किसी संक्रमित जानवर के काटने के बाद जल्द से जल्द एंटी रेबीज वैक्सीन लगवाना बेहद जरूरी होता है।

ऐसे में सरकारी अस्पताल में वैक्सीन उपलब्ध न होने से मरीजों की चिंता बढ़ गई है। खासकर आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए निजी अस्पताल या मेडिकल स्टोर से वैक्सीन खरीदना आसान नहीं होता।

पहले भी सामने आती रही हैं ऐसी समस्याएं

गोंडा जिला अस्पताल के मेडिकल कॉलेज में परिवर्तित होने के बाद से समय-समय पर दवाओं और जरूरी इंजेक्शनों की कमी की शिकायतें सामने आती रही हैं। इससे पहले भी एंटी-वेनम इंजेक्शन सहित कई आवश्यक दवाओं का स्टॉक खत्म होने की घटनाएं चर्चा में रही हैं।

स्थानीय लोगों का कहना है कि मेडिकल कॉलेज बनने के बाद मरीजों की संख्या तो बढ़ी है, लेकिन आवश्यक दवाओं और संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित करने की दिशा में अभी भी कई चुनौतियां बनी हुई हैं।

सीएमएस ने बताया स्टॉक खत्म होने का कारण

गोंडा मेडिकल कॉलेज के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक (CMS) डॉ. अनिल तिवारी ने बताया कि बजट की कमी के कारण एंटी रेबीज वैक्सीन का नया स्टॉक समय पर नहीं मंगाया जा सका, जिससे यह स्थिति उत्पन्न हुई।

उन्होंने कहा कि इस संबंध में उच्च अधिकारियों को पहले ही पत्र भेजकर जानकारी दे दी गई थी। अब आवश्यक बजट प्राप्त हो चुका है और बुधवार को काजीदेवर ड्रग्स स्टोर को वैक्सीन की मांग भेज दी गई है।

शाम तक नई खेप आने की उम्मीद

डॉ. अनिल तिवारी ने उम्मीद जताई कि बुधवार शाम तक एंटी रेबीज वैक्सीन की नई खेप मेडिकल कॉलेज पहुंच जाएगी। इसके बाद मरीजों को फिर से अस्पताल में मुफ्त वैक्सीन उपलब्ध कराई जा सकेगी और उन्हें बाजार से महंगे दामों पर वैक्सीन खरीदने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी।

अस्पताल प्रशासन का कहना है कि नई आपूर्ति मिलते ही नियमित टीकाकरण प्रक्रिया दोबारा शुरू कर दी जाएगी।

मरीजों ने उठाई स्थायी व्यवस्था की मांग

मरीजों और स्थानीय लोगों का कहना है कि जीवनरक्षक दवाओं और वैक्सीन का स्टॉक कभी खत्म नहीं होना चाहिए। उन्होंने मांग की है कि अस्पताल में ऐसी व्यवस्था बनाई जाए जिससे भविष्य में किसी भी आवश्यक दवा या वैक्सीन की कमी न हो और मरीजों को समय पर इलाज मिल सके।

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