होर्मुज स्ट्रेट पर बड़ा अलर्ट! US-ईरान तनाव के बीच भारत सरकार की सख्त चेतावनी, भारतीय नाविकों की तैनाती पर रोक

अमेरिका: और ईरान के बीच एक बार फिर बढ़ते तनाव के बीच भारत सरकार ने भारतीय समुद्री कर्मचारियों (सीफेयरर्स) की सुरक्षा को लेकर बड़ा कदम उठाया है। समुद्री प्रशासन महानिदेशालय (डीजीएमए/डीजी शिपिंग) ने जहाज मालिकों, जहाज प्रबंधन कंपनियों और भर्ती एजेंसियों को निर्देश जारी करते हुए कहा है कि अगले आदेश तक होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले जहाजों पर भारतीय नाविकों की तैनाती न की जाए।

यह फैसला ऐसे समय लिया गया है जब फारस की खाड़ी और होर्मुज स्ट्रेट के आसपास सुरक्षा स्थिति को लेकर चिंताएं लगातार बढ़ रही हैं। हाल के दिनों में इस क्षेत्र में कई व्यावसायिक जहाजों पर हमलों की घटनाएं सामने आई हैं, जिनमें दो भारतीय नाविकों की मौत की भी जानकारी सामने आई है। इन घटनाओं के बाद भारत सरकार ने एहतियाती कदम उठाते हुए यह सलाह जारी की है।

क्यों महत्वपूर्ण है होर्मुज स्ट्रेट?

होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में से एक माना जाता है। फारस की खाड़ी को अरब सागर से जोड़ने वाला यह संकरा समुद्री मार्ग वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति की दृष्टि से बेहद अहम है। दुनिया के बड़े हिस्से का कच्चा तेल और गैस इसी मार्ग से अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचता है।

ऐसे में यदि इस क्षेत्र में सैन्य तनाव या सुरक्षा संकट बढ़ता है तो इसका असर केवल क्षेत्रीय देशों पर ही नहीं बल्कि वैश्विक व्यापार, तेल आपूर्ति और समुद्री परिवहन पर भी पड़ सकता है।

भारतीय नाविकों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता

सरकारी आंकड़ों के अनुसार भारत दुनिया में समुद्री कर्मचारियों की आपूर्ति करने वाले प्रमुख देशों में शामिल है। वर्तमान में दुनिया भर के विभिन्न जहाजों पर तीन लाख से अधिक भारतीय नाविक कार्यरत हैं।

डीजीएमए ने अपने निर्देश में स्पष्ट कहा है कि भारतीय नागरिकों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। इसलिए जहाज संचालकों से कहा गया है कि जब तक नया आदेश जारी न हो, तब तक होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले जहाजों पर भारतीय नाविकों की नई तैनाती से बचा जाए।

जहाज मालिकों को दिए गए अहम निर्देश

सरकार ने शिपिंग कंपनियों को केवल तैनाती रोकने का निर्देश ही नहीं दिया, बल्कि उन्हें सुरक्षा स्थिति पर लगातार नजर रखने की सलाह भी दी है।

निर्देशों में कहा गया है कि जहाज मालिक और ऑपरेटर फारस की खाड़ी, होर्मुज स्ट्रेट और आसपास के समुद्री क्षेत्रों से जुड़ी सभी नौवहन चेतावनियों (Navigation Warnings) और सुरक्षा अलर्ट की नियमित निगरानी करें। किसी भी संभावित खतरे की स्थिति में तत्काल आवश्यक सुरक्षा उपाय अपनाने को कहा गया है।

वैश्विक तनाव का समुद्री व्यापार पर असर

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अमेरिका और ईरान के बीच तनाव लंबे समय तक बना रहता है तो इसका असर अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला पर भी दिखाई दे सकता है। ऐसे हालात में शिपिंग कंपनियां अतिरिक्त सुरक्षा उपाय अपनाती हैं, जिससे माल ढुलाई की लागत और बीमा प्रीमियम बढ़ सकता है।

हालांकि फिलहाल भारत सरकार का ध्यान अपने नागरिकों और समुद्री कर्मचारियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने पर केंद्रित है।

हालात पर लगातार नजर

डीजीएमए ने कहा है कि वह क्षेत्र की बदलती सुरक्षा स्थिति पर लगातार निगरानी रखे हुए है। आवश्यकता पड़ने पर आगे भी नए दिशा-निर्देश जारी किए जा सकते हैं।

सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि यह कदम एहतियात के तौर पर उठाया गया है ताकि किसी भी संभावित जोखिम से भारतीय नाविकों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।

होर्मुज स्ट्रेट में बढ़ते सुरक्षा जोखिम को देखते हुए भारत सरकार का यह निर्णय भारतीय नाविकों की सुरक्षा को प्राथमिकता देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। आने वाले दिनों में क्षेत्र की परिस्थितियों और सुरक्षा आकलन के आधार पर आगे के निर्देश जारी किए जा सकते हैं। फिलहाल जहाज मालिकों और शिपिंग कंपनियों को सरकार की सलाह का पालन करने के लिए कहा गया है।

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