CJP Protest: कनॉट प्लेस बंद, जंतर-मंतर पर बढ़ा तनाव! केजरीवाल का बड़ा सवाल- ‘क्या आज फिर होगा हमला?’

नई दिल्ली: राजधानी दिल्ली में चल रहा कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) का प्रदर्शन लगातार सुर्खियों में बना हुआ है। जंतर-मंतर पर जारी आंदोलन के बीच गुरुवार को सुरक्षा व्यवस्था और अधिक कड़ी कर दी गई। प्रशासन ने एहतियातन कनॉट प्लेस (Connaught Place) स्थित सभी दुकानों, कार्यालयों और रेस्तरां को शाम 6:30 बजे तक बंद रखने के निर्देश जारी किए। इस फैसले के बाद राजनीतिक हलकों में भी हलचल तेज हो गई।

दिल्ली में प्रदर्शन के दौरान बुधवार को हुई हिंसक घटनाओं के बाद प्रशासन अतिरिक्त सतर्कता बरत रहा है। पुलिस के अनुसार प्रदर्शन के दौरान कुछ स्थानों पर पुलिसकर्मियों पर पथराव और बोतलें फेंकी गईं, जिसमें पंजाबी बाग के अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त (ACP) जय प्रकाश घायल हो गए। अधिकारियों के मुताबिक उनके माथे पर पत्थर लगने से मामूली फ्रैक्चर हुआ है।

कनॉट प्लेस में सुरक्षा के मद्देनज़र दुकानें बंद

एनडीएमसी ने सुरक्षा एजेंसियों के साथ समीक्षा बैठक के बाद कनॉट प्लेस क्षेत्र में सभी व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को शाम तक बंद रखने का निर्देश जारी किया। प्रशासन का कहना है कि यह फैसला पूरी तरह एहतियाती है ताकि किसी प्रकार की अप्रिय घटना, सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान या आम नागरिकों की सुरक्षा से समझौता न हो।

इसके साथ ही राजधानी के कई संवेदनशील इलाकों में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है और जंतर-मंतर के आसपास सुरक्षा व्यवस्था पहले से अधिक मजबूत कर दी गई है।

केजरीवाल का केंद्र सरकार पर सवाल

दुकानें बंद कराने के फैसले पर आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने केंद्र सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि कनॉट प्लेस की दुकानों को बंद करने के आदेश, भारी सुरक्षा व्यवस्था और बड़ी संख्या में एम्बुलेंस की तैनाती कई सवाल खड़े करती है।

उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि क्या सरकार आज फिर प्रदर्शन कर रहे छात्रों के खिलाफ कार्रवाई करने की तैयारी कर रही है। उनके इस बयान के बाद राजनीतिक बहस और तेज हो गई।

जंतर-मंतर पर झड़प, पुलिस ने कराया मामला शांत

गुरुवार दोपहर जंतर-मंतर पर प्रदर्शनकारियों और कुछ निहंग सिखों के बीच धक्का-मुक्की और विवाद की स्थिति बन गई। मौके पर मौजूद पुलिस बल ने तुरंत हस्तक्षेप कर दोनों पक्षों को अलग किया और हालात को नियंत्रित किया। घटना के बाद सुरक्षा व्यवस्था और सख्त कर दी गई।

उधर, दिल्ली पुलिस ने सोशल मीडिया पर नागरिकों से अपील करते हुए कहा कि वे किसी भी अपुष्ट या भ्रामक जानकारी पर विश्वास न करें और केवल आधिकारिक स्रोतों से जारी सूचनाओं पर ही भरोसा करें।

घायल पुलिस अधिकारी ने लगाए गंभीर आरोप

जंतर-मंतर पर ड्यूटी के दौरान घायल हुए दिल्ली पुलिस के इंस्पेक्टर नंदकिशोर ने दावा किया कि प्रदर्शन के दौरान उनके साथ मारपीट की गई। उन्होंने कहा कि भीड़ अचानक आक्रामक हो गई और उन पर पीछे से हमला किया गया। पुलिस अधिकारी के अनुसार उन्हें अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा और कई अन्य सुरक्षाकर्मी भी घायल हुए।

हालांकि प्रदर्शन से जुड़े प्रतिनिधियों का कहना है कि पुलिस की कार्रवाई और बल प्रयोग की भी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।

NIA जांच की मांग पर भी विवाद

20 जुलाई को संसद मार्च के दौरान हुई हिंसा और तोड़फोड़ की NIA जांच की मांग को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट में दायर याचिका पर शुक्रवार को सुनवाई प्रस्तावित है। इस बीच CJP के प्रवक्ताओं ने NIA जांच की मांग पर सवाल उठाते हुए कहा कि जांच पूरी तरह निष्पक्ष और पारदर्शी होनी चाहिए।

उन्होंने आरोप लगाया कि मामले को राजनीतिक रंग देने की कोशिश की जा रही है, जबकि आंदोलन का मूल उद्देश्य शिक्षा व्यवस्था में सुधार और परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता सुनिश्चित करना है।

अभिजीत दीपके ने स्वास्थ्य को लेकर दी जानकारी

CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके ने सोशल मीडिया पर बताया कि पिछले कुछ दिनों से उन्हें तेज बुखार और शरीर में दर्द है। उन्होंने कहा कि यदि वह कुछ समय के लिए जंतर-मंतर पर दिखाई न दें तो इसे गलत न समझा जाए। उन्होंने भरोसा दिलाया कि स्वास्थ्य में सुधार होते ही वह फिर आंदोलन स्थल पर लौटेंगे।

आंदोलन पर पूरे देश की नजर

जंतर-मंतर पर जारी यह आंदोलन अब राष्ट्रीय स्तर की चर्चा का विषय बन चुका है। छात्र संगठन परीक्षा प्रणाली में सुधार, कथित पेपर लीक मामलों की निष्पक्ष जांच और जवाबदेही तय करने की मांग कर रहे हैं। वहीं सरकार कानून-व्यवस्था बनाए रखने और वार्ता के जरिए समाधान निकालने की बात कह रही है।

अब सभी की निगाहें सरकार और प्रदर्शनकारियों के अगले कदम पर टिकी हैं। यदि बातचीत आगे बढ़ती है तो आंदोलन की दिशा बदल सकती है, जबकि टकराव की स्थिति बनी रहने पर राजधानी में सुरक्षा व्यवस्था और सख्त होने की संभावना है।

दिल्ली में CJP आंदोलन लगातार नए मोड़ ले रहा है। एक ओर प्रशासन सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने में जुटा है, वहीं दूसरी ओर राजनीतिक दल और छात्र संगठन अपने-अपने पक्ष मजबूती से रख रहे हैं। आने वाले दिनों में सरकार और आंदोलनकारियों के बीच संभावित वार्ता इस पूरे घटनाक्रम की दिशा तय कर सकती है।

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