हल्द्वानी में ‘शुद्धिकरण’ के बाद राज्यसभा में छलका खरगे का दर्द, बोले- मेरी दलित पहचान की वजह से हुआ ऐसा?

उत्तराखंड। हल्द्वानी में कांग्रेस की विजय शंखनाद रैली के बाद रामलीला मैदान में किए गए कथित ‘शुद्धिकरण’ को लेकर सियासी विवाद अब राज्यसभा तक पहुंच गया है। कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने सदन में इस घटना का जिक्र करते हुए दुख व्यक्त किया और इसे अपनी दलित पहचान से जोड़कर सवाल उठाया। खरगे की टिप्पणी के बाद उत्तराखंड की राजनीति में यह मामला एक बार फिर चर्चा के केंद्र में आ गया है।

दरअसल, 8 अगस्त को हल्द्वानी के रामलीला मैदान में कांग्रेस की विजय शंखनाद रैली आयोजित की गई थी। इस कार्यक्रम में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के अलावा प्रदेश प्रभारी कुमारी सैलजा, उत्तराखंड विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य और पार्टी के कई वरिष्ठ नेता एवं कार्यकर्ता मौजूद रहे।

रैली के बाद दो दिन के भीतर ही रामलीला मैदान में हुए एक धार्मिक आयोजन ने पूरे मामले को राजनीतिक रंग दे दिया।

रैली के दिन ही गरमा गया था माहौल

कांग्रेस की रैली के दौरान भी हल्द्वानी में राजनीतिक माहौल तनावपूर्ण रहा। कांग्रेस कार्यकर्ताओं के वाहनों को पुलिस द्वारा जगह-जगह चेकिंग के लिए रोके जाने का पार्टी नेताओं ने विरोध किया।

इसके बाद प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गणेश गोदियाल और नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य के नेतृत्व में बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ता एसएसपी कार्यालय पहुंच गए और वहां धरने पर बैठ गए।

इस दौरान पुलिस अधिकारियों और कांग्रेस नेताओं के बीच तीखी नोकझोंक की स्थिति भी बनी। कथित तौर पर कांग्रेस नेताओं के एसएसपी के लिए आपत्तिजनक शब्दों के इस्तेमाल का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ। इसको लेकर भाजपा ने कांग्रेस पर निशाना साधा।

वहीं, भाजपा की ओर से कांग्रेस रैली के दौरान लगाए गए कुछ नारों को लेकर भी सवाल उठाए गए। इन आरोपों को लेकर दोनों दलों के बीच बयानबाजी हुई।

दो दिन बाद रामलीला मैदान में हुआ हवन

विवाद यहीं खत्म नहीं हुआ। 10 अगस्त को श्री राम सेना धर्मार्थ सेवा न्यास नाम के संगठन के लोगों ने रामलीला मैदान पहुंचकर हवन किया और गंगाजल का छिड़काव किया।

संगठन की ओर से दावा किया गया कि रामलीला मैदान सनातन परंपरा से जुड़े कार्यक्रमों का स्थल है और कांग्रेस की रैली के बाद इसकी पवित्रता को लेकर उनकी आपत्ति थी। इसी कारण वहां हवन और गंगाजल छिड़कने का कार्यक्रम किया गया।

इस घटना को कांग्रेस ने अलग नजरिए से देखा। कांग्रेस नेताओं ने सवाल उठाया कि आखिर किसी राजनीतिक कार्यक्रम के बाद किसी सार्वजनिक स्थल का ‘शुद्धिकरण’ करने की जरूरत क्यों महसूस हुई?

राज्यसभा में खरगे ने उठाया मुद्दा

अब यही मामला राज्यसभा में मल्लिकार्जुन खरगे के बयान के बाद राष्ट्रीय राजनीतिक बहस का हिस्सा बन गया है।

खरगे ने हल्द्वानी में हुई घटना का उल्लेख करते हुए अपनी पीड़ा जाहिर की। उन्होंने इसे अपनी सामाजिक पृष्ठभूमि से जोड़ते हुए सवाल उठाया कि क्या किसी व्यक्ति की जातिगत पहचान के कारण उसके जाने के बाद किसी स्थान को ‘शुद्ध’ करने की जरूरत महसूस की जाती है?

खरगे का यह सवाल राजनीतिक रूप से काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि कांग्रेस लंबे समय से सामाजिक समानता और जातिगत भेदभाव के मुद्दों को प्रमुखता से उठाती रही है।

‘शुद्धिकरण’ शब्द पर बढ़ी सियासी बहस

हल्द्वानी की घटना में सबसे ज्यादा चर्चा ‘शुद्धिकरण’ शब्द को लेकर हो रही है। एक तरफ आयोजन करने वाले संगठन का कहना है कि यह धार्मिक परंपरा और स्थल की पवित्रता से जुड़ा विषय था। दूसरी तरफ कांग्रेस इसे दलित पहचान और सामाजिक भेदभाव के सवाल से जोड़कर देख रही है।

यही अंतर अब राजनीतिक बहस का आधार बन गया है।

भाजपा और हिंदू संगठनों की ओर से इसे धार्मिक आस्था से जुड़ा विषय बताया जा सकता है, जबकि कांग्रेस इसे सामाजिक समानता और सम्मान के मुद्दे के रूप में उठा रही है। ऐसे में आने वाले दिनों में यह मामला उत्तराखंड की राजनीति में और गर्माने की संभावना है।

हल्द्वानी से देहरादून और दिल्ली तक पहुंचा विवाद

पहले रैली, फिर एसएसपी कार्यालय पर विरोध और उसके बाद रामलीला मैदान में हवन-गंगाजल छिड़काव—इन घटनाओं ने हल्द्वानी की स्थानीय राजनीति को प्रदेश स्तर की बहस में बदल दिया है।

मल्लिकार्जुन खरगे के राज्यसभा में इस मुद्दे को उठाने के बाद अब कांग्रेस इसे व्यापक सामाजिक और राजनीतिक संदर्भ में देख रही है। वहीं दूसरी ओर, विरोध करने वाले संगठन की ओर से इसे धार्मिक भावना और परंपरा से जुड़ा विषय बताया गया है।

असली सवाल क्या है?

इस पूरे विवाद के बीच सबसे बड़ा सवाल यही है कि रामलीला मैदान में किए गए हवन और गंगाजल छिड़काव को केवल धार्मिक अनुष्ठान माना जाए या इसे सामाजिक भेदभाव के संदर्भ में भी देखा जाए।

इस सवाल का जवाब अलग-अलग राजनीतिक और सामाजिक पक्ष अपने-अपने नजरिए से दे रहे हैं। फिलहाल इतना साफ है कि हल्द्वानी की एक स्थानीय घटना अब राज्यसभा की बहस का हिस्सा बन चुकी है और इसने जाति, धर्म, राजनीति और सामाजिक समानता से जुड़े कई सवालों को एक साथ सामने ला दिया है।

हल्द्वानी में कांग्रेस की विजय शंखनाद रैली के बाद रामलीला मैदान में हुए हवन और गंगाजल छिड़काव ने राजनीतिक विवाद को जन्म दिया। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने राज्यसभा में इस घटना पर दुख जताते हुए इसे अपनी दलित पहचान से जोड़कर सवाल उठाया। दूसरी ओर, संबंधित संगठन ने इसे स्थल की धार्मिक पवित्रता से जुड़ा कदम बताया है। अब यह विवाद स्थानीय राजनीति से निकलकर उत्तराखंड और राष्ट्रीय राजनीति में चर्चा का विषय बन गया है।

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