घायल गोविंदाओं के बिल पर अस्पताल में बवाल! शिवसेना नेताओं पर डॉक्टरों से मारपीट का केस, ICU तक पहुंची भीड़; जानिए पूरा विवाद

पालघर। महाराष्ट्र के पालघर में दही हांडी कार्यक्रम के दौरान घायल हुए गोविंदाओं के इलाज और अस्पताल के बिल को लेकर विवाद ने अब कानूनी रूप ले लिया है। पालघर के रिलीफ अस्पताल में डॉक्टरों और कर्मचारियों से कथित बदसलूकी और मारपीट के मामले में पुलिस ने 17 लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया है। पुलिस के मुताबिक, घटना के दौरान भीड़ अस्पताल के कैजुअल्टी वार्ड से होते हुए ICU तक पहुंच गई थी और एक घायल गोविंदा को कथित तौर पर वहां से बाहर ले जाया गया।

हालांकि, मामले में लगाए गए आरोपों से शिवसेना नेता कुंदन सांखे ने इनकार किया है। उनका कहना है कि वह घायल गोविंदा के इलाज और डिस्चार्ज से संबंधित बातचीत के लिए अस्पताल पहुंचे थे। ऐसे में पुलिस जांच के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि घटनाक्रम में वास्तव में क्या हुआ था।

दही हांडी में घायल हुए थे पांच गोविंदा

पुलिस के अनुसार, शनिवार रात पालघर में दही हांडी कार्यक्रम के दौरान मानव पिरामिड बनाने के दौरान पांच गोविंदा घायल हो गए थे। उन्हें उपचार के लिए रिलीफ अस्पताल ले जाया गया।

घायल गोविंदाओं की पहचान ओंकार कलवाडकर, आकाश पाटील, हितेश चौधरी, केशव ठाकुर और अनिकेत महायवंश के रूप में बताई गई है। ये सभी शिवसेना के केंद्रीय कार्यालय के बाहर आयोजित दही हांडी कार्यक्रम में घायल हुए थे।

घायलों को अस्पताल में भर्ती करने के बाद उनका उपचार शुरू किया गया। इसके बाद इलाज के खर्च को लेकर विवाद सामने आया।

करीब 20 हजार रुपये के बिल से शुरू हुआ विवाद

पुलिस के मुताबिक, रात करीब 12 बजे तक पांचों मरीजों का कुल मेडिकल बिल 19,866 रुपये पहुंच गया था। इसमें से करीब 10 हजार रुपये नकद जमा किए गए थे।

आरोप है कि बाकी रकम को लेकर अस्पताल में मौजूद लोगों और कर्मचारियों के बीच विवाद शुरू हुआ। कुछ लोगों ने कथित तौर पर बाकी बिल का भुगतान किए बिना ही घायल मरीजों को डिस्चार्ज करने की मांग की।

इसी मुद्दे पर बहस बढ़ने लगी और मामला अस्पताल के कर्मचारियों के साथ कथित बदसलूकी तक पहुंच गया।

15 से 20 लोगों के अस्पताल पहुंचने का आरोप

FIR में दर्ज आरोपों के मुताबिक, रात करीब 1:15 बजे 15 से 20 लोग अस्पताल के कैजुअल्टी वार्ड में पहुंचे। पुलिस के अनुसार, इस समूह में शिवसेना के पालघर जिला प्रमुख कुंदन बालकृष्ण सांखे और शहर प्रमुख राहुल रामदास घराट भी शामिल थे।

आरोप है कि भीड़ ने ड्यूटी पर मौजूद डॉक्टर लिजोमोल के साथ गाली-गलौच की। अस्पताल के बिलिंग रिसेप्शनिस्ट विवेक बाबुलिंगा के साथ मारपीट और थप्पड़ मारने का भी आरोप लगाया गया है।

हालांकि, इन आरोपों की अंतिम पुष्टि पुलिस जांच और मामले में सामने आने वाले साक्ष्यों के आधार पर ही होगी।

ICU तक पहुंचने का भी आरोप

मामले में सबसे गंभीर आरोपों में से एक यह है कि अस्पताल में आई भीड़ कथित तौर पर ICU तक पहुंच गई।

पुलिस के अनुसार, ICU में मरीजों के इलाज के बीच इस तरह भीड़ पहुंचने से अस्पताल की व्यवस्था और अन्य मरीजों की सुरक्षा को लेकर भी सवाल खड़े हुए। आरोप है कि इसी दौरान घायल गोविंदाओं में से एक मरीज को कथित तौर पर ICU से बाहर ले जाया गया।

अस्पताल कर्मचारी विवेक बाबुलिंगा की शिकायत के आधार पर पुलिस ने मामले को दर्ज किया है।

विधायक के बेटे समेत 17 लोगों पर केस

पुलिस ने कुल 17 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया है। इनमें से 10 लोगों के नाम सामने आए हैं।

नामजद लोगों में शिवसेना के पालघर जिला प्रमुख कुंदन बालकृष्ण सांखे, शहर प्रमुख राहुल रामदास घराट और विधायक राजेंद्र गावित के बेटे रोहित गावित का नाम शामिल बताया गया है।

इसके अलावा मनीष उर्फ विक्की सांखे, सैराज पाटील, राहुल सांखे, मनोज घराट, नीलम सांखे, शुभम बांदिवडेकर और ऋषभ वारे के नाम भी FIR में बताए गए हैं। सात से आठ अन्य लोगों की पहचान अभी नहीं हो पाई है।

किन धाराओं में दर्ज हुआ केस?

पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) और महाराष्ट्र मेडिकेयर सर्विस पर्सन्स एंड मेडिकेयर सर्विस इंस्टीट्यूशंस एक्ट के तहत मामला दर्ज किया है।

मामले में कथित मारपीट, धमकी, अस्पताल में जबरन प्रवेश और गैरकानूनी तरीके से भीड़ जुटाने जैसे आरोप शामिल हैं। पुलिस उपनिरीक्षक विनायक केसरकर को जांच की जिम्मेदारी दी गई है।

फिलहाल उपलब्ध जानकारी के अनुसार किसी आरोपी की गिरफ्तारी नहीं हुई है और पुलिस घटनास्थल से जुड़े साक्ष्यों, शिकायतों तथा संबंधित लोगों के बयानों की जांच कर रही है।

शिवसेना नेता ने क्या कहा?

दूसरी ओर, शिवसेना नेता कुंदन सांखे ने लगाए गए आरोपों को खारिज किया है। उनका कहना है कि अस्पताल जाने का उद्देश्य घायल गोविंदा के इलाज और डिस्चार्ज को लेकर बातचीत करना था।

इसलिए इस पूरे मामले में अस्पताल प्रशासन की शिकायत और संबंधित नेताओं के पक्ष—दोनों को जांच के दायरे में देखा जाना महत्वपूर्ण है। पुलिस की जांच और उपलब्ध CCTV फुटेज, प्रत्यक्षदर्शियों के बयान तथा अन्य साक्ष्य आगे की तस्वीर साफ कर सकते हैं।

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