नई दिल्ली/इंदौर: पूर्व भाजपा सांसद और भारतीय कुश्ती महासंघ के पूर्व अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह एक नए कानूनी विवाद में हैं। पतंजलि फूड्स लिमिटेड ने उनके खिलाफ ₹50 करोड़ का मानहानि दावा दायर किया है। मामला पतंजलि के घी और अन्य उत्पादों को लेकर बृजभूषण शरण सिंह की ओर से दिए गए कथित सार्वजनिक बयानों से जुड़ा है। कंपनी का आरोप है कि इन बयानों से उसकी प्रतिष्ठा और कारोबारी हितों को नुकसान पहुंचा।
मामले में 15 सितंबर 2026 को मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर पीठ में सुनवाई हुई। बृजभूषण शरण सिंह की ओर से अधिवक्ता अदालत में उपस्थित हुए और वकालतनामा पेश किया। उनके वकील ने मामले में जवाब दाखिल करने के लिए अतिरिक्त समय मांगा। अदालत ने अगली सुनवाई के लिए 18 सितंबर की तारीख तय की है।
आखिर किस बयान से शुरू हुआ विवाद?
मामले की जड़ वर्ष 2022 के सार्वजनिक बयानों से जुड़ी बताई जा रही है। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, बृजभूषण शरण सिंह ने उस दौरान पतंजलि के घी को लेकर सार्वजनिक मंच से सवाल उठाए थे और उसे कथित तौर पर ‘नकली’ बताया था। इन टिप्पणियों के बाद पतंजलि से जुड़े लोगों और बृजभूषण के बीच सार्वजनिक बयानबाजी सामने आई थी।
यहां यह स्पष्ट करना जरूरी है कि घी की गुणवत्ता को लेकर बृजभूषण की ओर से लगाए गए आरोप उनका कथित बयान/दावा हैं। मौजूदा मानहानि मुकदमे में अदालत को यह तय करना है कि संबंधित बयानों की कानूनी स्थिति क्या है और कंपनी के दावों पर क्या कार्रवाई बनती है।
पतंजलि ने ₹50 करोड़ क्यों मांगे?
पतंजलि फूड्स की ओर से मामले की पैरवी कर रहे अधिवक्ता विक्रम मालवीय के अनुसार, कंपनी का कहना है कि संबंधित बयानों से उसकी ब्रांड इमेज को नुकसान पहुंचा। कंपनी की ओर से यह भी दावा किया गया कि विवादित बयानों का असर उसके शेयर मूल्य और कारोबारी हितों पर पड़ा। इन्हीं दावों के आधार पर ₹50 करोड़ की मानहानि राशि की मांग की गई है।
हालांकि, यह राशि फिलहाल कंपनी द्वारा मांगी गई क्षतिपूर्ति है। इसका अर्थ यह नहीं है कि अदालत ने बृजभूषण शरण सिंह को ₹50 करोड़ का भुगतान करने का आदेश दे दिया है। मामले में आगे दोनों पक्षों की दलीलें और साक्ष्य सुने जाएंगे।

जिला अदालत से हाईकोर्ट तक कैसे पहुंचा मामला?
रिपोर्टों के अनुसार, मामला शुरुआत में इंदौर जिला अदालत में दाखिल हुआ था। पतंजलि फूड्स का पंजीकृत कार्यालय इंदौर के विजय नगर क्षेत्र में है। इसके बाद कार्यवाही के दौरान इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों से जुड़े कानूनी सवाल सामने आए और मामला मध्य प्रदेश हाईकोर्ट तक पहुंचा।
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के उपलब्ध रिकॉर्ड में भी Patanjali Foods Limited through authorised representative बनाम Brij Bhushan Sharan Singh नाम से जुलाई 2026 की कार्यवाही दर्ज है। इससे पुष्टि होती है कि विवाद से जुड़ी हाईकोर्ट कार्यवाही पहले से चल रही थी।
15 सितंबर की सुनवाई में क्या हुआ?
15 सितंबर की सुनवाई में बृजभूषण शरण सिंह की ओर से वकील अदालत में पेश हुए। वकालतनामा दाखिल करने के साथ उन्होंने मामले का जवाब तैयार करने के लिए समय मांगा। अदालत ने अनुरोध स्वीकार करते हुए अगली सुनवाई 18 सितंबर 2026 तय की।
इसका मतलब है कि फिलहाल मामले में कोई अंतिम फैसला नहीं हुआ है। 18 सितंबर की कार्यवाही में अदालत के सामने बृजभूषण की ओर से जवाब और मामले की आगे की दिशा पर सुनवाई हो सकती है।
क्या है पतंजलि के घी से जुड़ा अलग पुराना मामला?
इस विवाद के बीच पतंजलि के घी से जुड़ा एक अलग मामला भी चर्चा में आता है। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक पिथौरागढ़ में 2020 में लिए गए पतंजलि घी के एक नमूने की जांच को लेकर कानूनी कार्रवाई हुई थी और बाद में अदालत ने कंपनी पर ₹1 लाख का जुर्माना लगाया था।
लेकिन यह मामला मौजूदा ₹50 करोड़ के मानहानि मुकदमे से अलग कानूनी प्रकरण है। एक मामले में खाद्य गुणवत्ता से जुड़ी कार्रवाई है, जबकि वर्तमान मुकदमा कथित सार्वजनिक बयानों से कंपनी की प्रतिष्ठा और आर्थिक नुकसान के दावे से संबंधित है।
अगस्त 2026 में भी उठे थे सवाल
रिपोर्टों के अनुसार, अगस्त 2026 में भी बृजभूषण शरण सिंह ने पतंजलि के उत्पादों और बाजार में उपलब्ध कथित मिलावटी घी को लेकर सवाल उठाए थे। इससे पुराने विवाद को एक बार फिर सार्वजनिक चर्चा मिली।
अब मामला अदालत में होने के कारण आगे की बहस सार्वजनिक बयानों से ज्यादा कानूनी दलीलों, साक्ष्यों और कंपनी द्वारा किए गए नुकसान के दावे के इर्द-गिर्द रहेगी।
18 सितंबर पर टिकी नजरें
₹50 करोड़ के इस मानहानि मामले में फिलहाल अंतिम फैसला नहीं आया है। 15 सितंबर की सुनवाई में बृजभूषण शरण सिंह की ओर से वकालतनामा दाखिल होने और जवाब के लिए समय मांगे जाने के बाद अदालत ने 18 सितंबर की तारीख तय की है।
अब अगली सुनवाई में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि बृजभूषण शरण सिंह की ओर से अदालत के सामने क्या जवाब रखा जाता है और हाईकोर्ट मामले को किस दिशा में आगे बढ़ाता है। मामले में अंतिम कानूनी निष्कर्ष अदालत की आगामी कार्यवाही और उपलब्ध साक्ष्यों पर निर्भर करेगा।



