नई दिल्ली। क्या आपको भी बार-बार उंगलियां चटकाने की आदत है? या आप दिनभर मोबाइल पर मैसेज टाइप करते रहते हैं और इस बात से परेशान हैं कि कहीं आगे चलकर आपके हाथों के जोड़ों में गठिया न हो जाए? यह सवाल बहुत से लोगों के मन में आता है। परिवार के बड़े-बुजुर्ग अक्सर उंगलियां चटकाने से मना करते हैं, जबकि लगातार मोबाइल इस्तेमाल करने वालों को भी हाथों की सेहत को लेकर चिंता रहती है।
लेकिन क्या इन आदतों और अर्थराइटिस के बीच वास्तव में कोई सीधा संबंध है? चिकित्सा संबंधी उपलब्ध प्रमाण बताते हैं कि सामान्य रूप से उंगलियां चटकाने और हाथों में ऑस्टियोअर्थराइटिस होने के बीच कोई स्पष्ट संबंध साबित नहीं हुआ है। हालांकि, जोड़ों पर जरूरत से ज्यादा दबाव डालना या लगातार एक ही तरह की गतिविधि करना दर्द और असुविधा पैदा कर सकता है।
क्या उंगलियां चटकाने से सच में होता है गठिया?
उंगलियां चटकाने को लेकर सबसे आम धारणा यही है कि इससे हड्डियों के जोड़ खराब हो जाते हैं और भविष्य में गठिया हो सकता है। हालांकि, अब तक उपलब्ध शोध इस दावे की पुष्टि नहीं करते।
उंगलियों के जोड़ों के आसपास एक विशेष तरल पदार्थ होता है, जिसे सिनोवियल फ्लूइड कहा जाता है। यह जोड़ों को चिकनाई देने और उनकी सामान्य गति में सहायता करता है। उंगली को खींचने या मोड़ने पर जोड़ के भीतर दबाव में बदलाव होता है, जिससे आवाज पैदा हो सकती है।
इस आवाज का मतलब यह नहीं है कि हड्डियां आपस में रगड़ खा रही हैं या जोड़ निश्चित रूप से खराब हो रहे हैं। इसलिए बिना दर्द के कभी-कभार उंगलियां चटकाने को गठिया का सीधा कारण मानना सही नहीं है।
हालांकि, उंगलियों को बार-बार बहुत जोर से खींचना या जबरदस्ती मोड़ना उचित नहीं है। ऐसा करने से दर्द, सूजन या आसपास के ऊतकों में चोट लग सकती है। यदि उंगलियां चटकाते समय दर्द होता है, तो उस गतिविधि को रोककर चिकित्सकीय सलाह लेना बेहतर है।
क्या घंटों मोबाइल चलाने से जोड़ों को नुकसान पहुंचता है?
आज के समय में मोबाइल फोन पढ़ाई, काम, बातचीत और मनोरंजन का अहम हिस्सा बन गया है। लगातार मैसेज टाइप करना, एक ही हाथ से फोन पकड़े रहना और लंबे समय तक अंगूठे का इस्तेमाल करना हाथों तथा कलाई पर दबाव डाल सकता है।
इससे मांसपेशियों में थकान, कलाई में असुविधा, अंगूठे में दर्द या कुछ समय के लिए अकड़न महसूस हो सकती है। लेकिन इन लक्षणों का होना अपने आप में गठिया होने का प्रमाण नहीं है।
मोबाइल इस्तेमाल और गठिया के बीच सीधा कारणात्मक संबंध स्थापित करने के लिए पर्याप्त प्रमाण नहीं हैं। इसलिए केवल फोन चलाने की आदत के आधार पर किसी व्यक्ति को अर्थराइटिस का मरीज नहीं माना जा सकता।
लगातार एक ही स्थिति में रहने के बजाय बीच-बीच में विराम लेना, हाथों की स्थिति बदलना और कलाई को आराम देना उपयोगी हो सकता है। यदि मोबाइल इस्तेमाल करते समय नियमित रूप से दर्द होता है, तो उसकी वजह का पता लगाने के लिए डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए।

क्या गठिया सिर्फ बुजुर्गों को होता है?
यह भी एक आम भ्रम है कि गठिया केवल बढ़ती उम्र में होने वाली बीमारी है। वास्तव में, अर्थराइटिस कई प्रकार का होता है और अलग-अलग प्रकार के कारण भी अलग हो सकते हैं।
ऑस्टियोअर्थराइटिस में समय के साथ जोड़ों के कार्टिलेज में बदलाव और टूट-फूट की भूमिका होती है। उम्र बढ़ने के अलावा जोड़ों में पुरानी चोट, आनुवंशिक कारक और कुछ अन्य परिस्थितियां भी इसका जोखिम बढ़ा सकती हैं।
दूसरी ओर, रूमेटॉइड अर्थराइटिस एक सूजन संबंधी ऑटोइम्यून बीमारी है, जिसमें शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली जोड़ों को प्रभावित करती है। यह केवल बुजुर्गों तक सीमित नहीं है।
इसलिए लगातार जोड़ों में दर्द या सूजन होने पर उम्र के आधार पर बीमारी को खारिज करना ठीक नहीं है।
गठिया के कौन-से लक्षण नजरअंदाज नहीं करने चाहिए?
जोड़ों में दर्द होना हमेशा गठिया का संकेत नहीं होता, लेकिन कुछ लक्षण लगातार बने रहें तो उनकी जांच जरूरी है।
- जोड़ों में बार-बार या लगातार दर्द होना।
- सुबह उठने पर जोड़ों में अकड़न महसूस होना।
- किसी जोड़ के आसपास सूजन या गर्माहट होना।
- उंगलियों, कलाई या घुटनों को हिलाने में परेशानी होना।
- रोजमर्रा के काम करने में कठिनाई महसूस होना।
यदि किसी जोड़ में अचानक तेज दर्द, काफी सूजन या गति में गंभीर परेशानी हो, तो जल्द चिकित्सा सहायता लें। सही कारण जानने के लिए डॉक्टर लक्षणों, शारीरिक जांच और जरूरत पड़ने पर अन्य परीक्षणों की मदद ले सकते हैं।
क्या गठिया के हर मरीज को सर्जरी करानी पड़ती है?
गठिया का नाम सुनते ही कई लोगों को लगता है कि अंत में सर्जरी ही एकमात्र विकल्प बचता है। लेकिन ऐसा नहीं है। उपचार बीमारी के प्रकार, उसकी गंभीरता और मरीज की स्थिति पर निर्भर करता है।
कई मामलों में डॉक्टर की सलाह से दवाओं, फिजियोथेरेपी, नियमित गतिविधि और जीवनशैली में बदलाव के जरिए लक्षणों को नियंत्रित किया जा सकता है। कुछ प्रकार के गठिया में बीमारी की प्रगति को नियंत्रित करने के लिए विशेष दवाओं की जरूरत होती है।
जोड़ बदलने की सर्जरी पर आमतौर पर तभी विचार किया जाता है, जब जोड़ को गंभीर नुकसान पहुंच चुका हो और अन्य उपचारों के बावजूद दर्द तथा रोजमर्रा की गतिविधियों में परेशानी बनी रहे।
इसलिए इंटरनेट पर पढ़कर खुद से दवाएं लेना या इलाज शुरू करना उचित नहीं है। सही उपचार के लिए विशेषज्ञ की सलाह जरूरी है।



