उत्तर प्रदेश: विधान परिषद की 11 स्नातक और शिक्षक निर्वाचन सीटों के लिए मंगलवार, 27 अक्टूबर 2026 को मतगणना शुरू हो गई। प्रदेश के सात शहरों—लखनऊ, वाराणसी, आगरा, मेरठ, झांसी, बरेली और गोरखपुर—में वोटों की गिनती की जा रही है। इन सीटों के परिणाम भारतीय जनता पार्टी (भाजपा), समाजवादी पार्टी (सपा) और अन्य प्रत्याशियों के लिए अहम हैं। मतगणना के बीच वाराणसी के पहड़िया मंडी केंद्र पर बिजली आपूर्ति बाधित होने की घटना को लेकर सपा नेताओं ने सवाल उठाए हैं। उपलब्ध ताजा जानकारी में सभी 11 सीटों के अंतिम परिणामों की पुष्टि नहीं हुई है।
11 सीटों पर किसका पलड़ा भारी? नतीजों पर टिकी निगाहें
इस चुनाव में विधान परिषद की पांच स्नातक और छह शिक्षक निर्वाचन सीटें शामिल हैं। मतगणना की प्रक्रिया सुबह आठ बजे निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार शुरू हुई। अलग-अलग निर्वाचन क्षेत्रों में मतगणना केंद्र बनाए गए हैं, जहां संबंधित निर्वाचन अधिकारियों की निगरानी में मतपत्रों की गिनती हो रही है।
लखनऊ में रमाबाई रैली स्थल पर स्नातक और शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों के लिए अलग-अलग हॉल निर्धारित किए गए हैं। वाराणसी में पहड़िया मंडी परिसर में मतगणना हो रही है, जबकि बरेली में बरेली-मुरादाबाद शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र के मतों की गिनती की व्यवस्था की गई है। गोरखपुर में भी मतगणना केंद्र के आसपास सुरक्षा बढ़ाई गई है।
चुनाव परिणाम आने के साथ ही स्पष्ट होगा कि किन प्रत्याशियों को मतदाताओं का समर्थन मिला। फिलहाल किसी सीट पर अंतिम जीत का दावा करने से पहले संबंधित निर्वाचन अधिकारी की घोषणा का इंतजार करना जरूरी है।
वाराणसी में बिजली गुल होने पर सपा नेताओं ने उठाए सवाल
वाराणसी के पहड़िया मंडी स्थित मतगणना स्थल पर सोमवार रात लगभग दस मिनट तक बिजली आपूर्ति बाधित होने की सूचना सामने आई। इसके बाद समाजवादी पार्टी के नेताओं ने मतगणना केंद्र की व्यवस्थाओं पर सवाल उठाए। खबर के अनुसार, पार्टी के 15 नेताओं ने रात में मतगणना स्थल पर रुककर निगरानी की।
सपा नेता और शिवपुर के पूर्व विधायक उदयलाल मौर्य ने बताया कि बिजली जाने की सूचना मिलने पर वे अन्य नेताओं के साथ मौके पर पहुंचे। उनके अनुसार, प्रशासन से संपर्क करने के बाद बिजली आपूर्ति बहाल कराई गई। इस दौरान जनरेटर खराब होने की बात भी सामने आई।
सपा नेताओं ने मतगणना में संभावित गड़बड़ी की आशंका जताते हुए प्रक्रिया की निष्पक्षता और पारदर्शिता सुनिश्चित करने की मांग की है। हालांकि, मतगणना में हेराफेरी होने के आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध जानकारी में नहीं हुई है। इसलिए इन आरोपों को प्रमाणित तथ्य के रूप में प्रस्तुत नहीं किया जा सकता।

भाजपा और सपा के उम्मीदवारों ने जताया जीत का भरोसा
मतगणना शुरू होने से पहले विभिन्न प्रत्याशियों ने अपनी-अपनी जीत की उम्मीद जताई। लखनऊ स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से भाजपा उम्मीदवार अवनीश कुमार सिंह ने पार्टी कार्यकर्ताओं के सहयोग और मतदान में भागीदारी को लेकर भरोसा व्यक्त किया। उन्होंने भाजपा के पक्ष में बड़ी संख्या में वोट पड़ने का दावा किया।
आगरा में भाजपा उम्मीदवार हरि किशोर तिवारी ने भी अच्छे परिणाम आने की उम्मीद जताई। दूसरी ओर, सपा उम्मीदवार संजययन त्रिपाठी ने शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में अपनी जीत का भरोसा जताते हुए मतदान में बढ़ोतरी और शिक्षकों से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाने की बात कही।
त्रिपाठी ने पुरानी पेंशन योजना बहाल करने और बिना सरकारी सहायता वाले संस्थानों में काम कर रहे शिक्षकों के लिए सम्मानजनक मानदेय जैसे विषयों का उल्लेख किया। ये प्रत्याशियों के अपने दावे और विचार हैं। वास्तविक स्थिति मतगणना पूरी होने और आधिकारिक नतीजे घोषित किए जाने के बाद ही स्पष्ट होगी।
23 अक्टूबर को हुआ था मतदान, 152 प्रत्याशी मैदान में
उत्तर प्रदेश विधान परिषद की इन 11 सीटों के लिए 23 अक्टूबर 2026 को मतदान हुआ था। चुनाव में कुल 152 उम्मीदवार मैदान में थे। प्रकाशित चुनावी आंकड़ों के अनुसार, मतदान का कुल प्रतिशत 55.24 प्रतिशत बताया गया था; हालांकि अलग-अलग अपडेट में आंकड़ों में अंतर भी सामने आया है।
इन सीटों में लखनऊ, वाराणसी, आगरा, मेरठ और इलाहाबाद-झांसी के स्नातक निर्वाचन क्षेत्र शामिल हैं। शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों में लखनऊ, वाराणसी, आगरा, मेरठ, बरेली-मुरादाबाद और गोरखपुर-फैजाबाद शामिल हैं।
इन निर्वाचन क्षेत्रों में पंजीकृत स्नातक और शिक्षक मतदाता अपने प्रतिनिधियों का चुनाव करते हैं। इसलिए इन सीटों के नतीजे केवल राजनीतिक दलों के लिए ही नहीं, बल्कि संबंधित मतदाता वर्गों के प्रतिनिधित्व के लिहाज से भी महत्वपूर्ण हैं।
मतगणना केंद्रों पर सुरक्षा, अंतिम नतीजों का इंतजार
मतगणना को शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराने के लिए विभिन्न केंद्रों के आसपास सुरक्षा बढ़ाई गई है। लखनऊ और गोरखपुर समेत कई स्थानों पर पुलिस बल की तैनाती की गई है। वाराणसी में बिजली आपूर्ति बाधित होने की घटना के बाद पारदर्शिता को लेकर उठे सवालों के बीच प्रशासनिक व्यवस्थाओं पर भी निगाह बनी हुई है।
इन चुनावों में शुरुआती आंकड़ों और अंतिम नतीजों के बीच अंतर हो सकता है। खासकर स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों में मतपत्रों पर वरीयता क्रम के आधार पर मतगणना की प्रक्रिया परिणाम को प्रभावित कर सकती है। ऐसे में किसी उम्मीदवार की शुरुआती बढ़त को अंतिम जीत मानना उचित नहीं होगा।
फिलहाल सबसे अहम सवाल यही है कि 11 सीटों पर किस दल और प्रत्याशी को सफलता मिलती है। मतगणना पूरी होने के बाद निर्वाचन क्षेत्रवार परिणाम, विजेताओं के नाम और जीत के अंतर की जानकारी आधिकारिक घोषणा से ही स्पष्ट होगी।



