लखनऊ : उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर हलचल देखने को मिली जब कैसरगंज से सांसद करण भूषण सिंह ने बुधवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात की। यह मुलाकात राजधानी लखनऊ स्थित मुख्यमंत्री के सरकारी आवास पर हुई, जहां सांसद ने कैसरगंज क्षेत्र के विकास कार्यों को लेकर विस्तार से चर्चा की और कई अहम मांग पत्र सौंपे।
ढेमवा घाट पुल निर्माण की उठी मांग
इस मुलाकात के दौरान सांसद करण भूषण सिंह ने क्षेत्र की लंबे समय से लंबित मांगों को सीएम के सामने प्रमुखता से रखा। इनमें ढेमवा घाट पुल का निर्माण सबसे महत्वपूर्ण मुद्दा रहा। सांसद ने बताया कि इस पुल के न होने से क्षेत्र के हजारों लोगों को आवागमन में भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस पर त्वरित प्रतिक्रिया देते हुए आश्वस्त किया कि पुल निर्माण का कार्य शीघ्र शुरू कराया जाएगा।
बृजभूषण शरण सिंह के बयान पर चर्चा
मुलाकात के दौरान हाल ही में पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह द्वारा विधायकों को लेकर दिए गए विवादित बयान पर भी चर्चा हुई। सूत्रों के अनुसार, सीएम योगी ने इस मुद्दे को गंभीरता से संज्ञान में लिया और आवश्यक बातचीत की।
यह चर्चा इसलिए भी अहम मानी जा रही है क्योंकि बृजभूषण का यह बयान सत्ताधारी दल के भीतर ही हलचल मचा चुका है।
2018 के बाद रिश्तों में दिखी दूरी
गौर करने वाली बात यह है कि वर्ष 2018 के बाद से बृजभूषण शरण सिंह और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के बीच कोई सार्वजनिक मुलाकात नहीं हुई थी। दोनों नेता राजनीतिक मंचों पर भी अलग-अलग नजर आते रहे।
हालांकि, बृजभूषण के छोटे बेटे और गोंडा सदर विधायक प्रतीक भूषण सिंह ने पिछले कुछ वर्षों में योगी आदित्यनाथ से कई बार मुलाकात की है। लेकिन अब करण भूषण सिंह की सीएम से मुलाकात को राजनीतिक समीकरणों की नई शुरुआत माना जा रहा है।
राजनीतिक हलकों में चर्चाएं तेज
करण भूषण सिंह की यह सक्रियता और मुख्यमंत्री से मुलाकात राजनीतिक हलकों में बहुत से संकेत दे रही है। कुछ विश्लेषकों का मानना है कि यह मुलाकात बृजभूषण परिवार और योगी आदित्यनाथ के रिश्तों में एक नई गर्माहट लाने वाली हो सकती है, जो आने वाले चुनावों के लिहाज से भी अहम साबित हो सकती है।
निष्कर्ष
कैसरगंज सांसद करण भूषण सिंह की मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से यह मुलाकात सिर्फ एक विकास की मांग नहीं, बल्कि राजनीतिक समीकरणों के फिर से जुड़ने का संकेत भी मानी जा रही है। क्षेत्रीय विकास की मांगों के साथ-साथ पारिवारिक और राजनीतिक रिश्तों की पुनर्स्थापना को लेकर यह मुलाकात आने वाले समय में यूपी की राजनीति में असर डाल सकती है।



