उपराष्ट्रपति बोले- ‘आनंदीबेन नाम ही काफी है’; राज्यपाल ने कहा- फ्री में नहीं दूंगी किताब, अहमदाबाद में चाय एक कप में तीन लोग पीते हैं

लखनऊ : राज्यपाल आनंदीबेन पटेल की जीवनी “चुनौतियां मुझे पसंद हैं” के विमोचन कार्यक्रम में उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ उपस्थित रहे। इस दौरान मंच पर कई प्रेरणादायक और दिलचस्प टिप्पणियां सुनने को मिलीं, जिसने माहौल को गरिमामय और जीवंत बना दिया।


????️ उपराष्ट्रपति का बयान: “आनंदीबेन नाम ही काफी है”

डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम प्राविधिक विश्वविद्यालय, लखनऊ में आयोजित समारोह में उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने राज्यपाल की प्रशंसा करते हुए कहा,

“आनंदीबेन पटेल का नाम ही काफी है। वह सशक्त नेतृत्व और प्रेरणा का प्रतीक हैं।”
उन्होंने कहा कि आनंदीबेन की जीवनगाथा देश के लिए एक दिशा-निर्देश है और यह पुस्तक नए भारत की नारी शक्ति की असल तस्वीर पेश करती है।


???? राज्यपाल की मज़ाकिया टिप्पणी: “फ्री में किताब नहीं दूंगी”

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने मुस्कुराते हुए कहा,

“किताब फ्री में नहीं मिलेगी। मैं अहमदाबादी हूं, वहां एक कप चाय में तीन लोग पीते हैं।”
उन्होंने कहा कि यह पुस्तक मेहनत और अनुशासन की मिसाल है और इसे फ्री में देना उस मूल्य को हल्का करना होगा।


???? पुस्तक का परिचय:

“चुनौतियां मुझे पसंद हैं” राज्यपाल आनंदीबेन पटेल के संघर्षमय जीवन पर आधारित है। इसे लेखक विनय जोशी, अशोक देसाई और पंकज जानी ने 14 अध्यायों में लिखा है, जिसे सीएम योगी आदित्यनाथ ने समुद्र मंथन से निकले 14 रत्नों से तुलना की।


???? मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की बात:

मुख्यमंत्री योगी ने कहा,

“यह पुस्तक केवल एक जीवनी नहीं, बल्कि नवपीढ़ी के लिए प्रेरणा का स्त्रोत है। आनंदीबेन जी का जीवन बताता है कि शून्य से शिखर तक की यात्रा कैसे की जाती है।”
उन्होंने इसे नारी शक्ति, आत्मबल और संघर्ष की जीवंत मिसाल बताया।


???? उपराष्ट्रपति का स्वागत और कार्यक्रम की गरिमा

उपराष्ट्रपति जैसे ही बख्शी का तालाब एयरफोर्स स्टेशन पर पहुंचे, राज्यपाल आनंदीबेन पटेल और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उनका स्वागत किया। उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर भी दिया गया। इसके बाद सभी AKTU कैंपस पहुंचे, जहां पुस्तक विमोचन कार्यक्रम आयोजित किया गया था।


???? निष्कर्ष:

इस कार्यक्रम ने न सिर्फ एक प्रेरणादायक पुस्तक का विमोचन किया, बल्कि मंच पर उपस्थित नेताओं की संवेदनशीलता, हास्य और दृष्टिकोण ने भी दर्शकों को प्रभावित किया। यह पुस्तक आने वाली पीढ़ियों को संघर्ष से सफलता तक की राह दिखाने वाली प्रेरक गाथा बनकर सामने आएगी।

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