बहराइच : देवीपाटन मंडल के बहराइच जिले में आगामी 15 मई से प्रस्तावित दरगाह मेले के आयोजन को लेकर स्थानीय अभिसूचना इकाई (LIU) ने गहन सुरक्षा जांच के बाद आयोजन की अनुमति न देने की सिफारिश की है। LIU की ओर से तैयार की गई 12 पन्नों की विस्तृत गोपनीय रिपोर्ट मंडलायुक्त देवीपाटन और डीआईजी को भेजी गई है, जिसमें देश की वर्तमान सुरक्षा स्थिति, खासकर पहलगाम आतंकी हमले का हवाला देते हुए आयोजन को संवेदनशील और जोखिमपूर्ण बताया गया है।
LIU रिपोर्ट में कई सुरक्षा चिंताओं का उल्लेख
रिपोर्ट के मुताबिक:
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देश में हाल ही में हुए आतंकी हमलों, विशेषकर पहलगाम की घटना, ने सुरक्षा एजेंसियों को सतर्क कर दिया है।
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दरगाह मेला जैसे भीड़भाड़ वाले आयोजन, जहां बड़ी संख्या में लोग इकट्ठा होते हैं, संभावित टारगेट बन सकते हैं।
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बहराइच की भौगोलिक स्थिति, नेपाल सीमा से निकटता और संवेदनशील समुदायों की मौजूदगी, आयोजन को और अधिक जोखिमपूर्ण बना देते हैं।
LIU ने अपनी रिपोर्ट में स्थानीय पुलिस, खुफिया तंत्र और केंद्रीय एजेंसियों से प्राप्त सूचनाओं के आधार पर सिफारिश की है कि मौजूदा समय में इस तरह का आयोजन स्थगित या रद्द किया जाना ही उपयुक्त होगा।
प्रशासन ने अभी नहीं दी है अंतिम मंजूरी
सूत्रों के अनुसार, LIU की रिपोर्ट के आधार पर प्रशासन ने अभी तक मेले को आयोजन की मंजूरी नहीं दी है।
मंडल स्तर पर उच्च अधिकारियों की बैठक बुलाई जा रही है जिसमें रिपोर्ट के तथ्यों का गंभीरता से मूल्यांकन किया जाएगा।
संभावना जताई जा रही है कि आगामी दिनों में प्रशासन इस पर औपचारिक आदेश जारी कर सकता है।
पहलगाम हमले का विशेष उल्लेख
रिपोर्ट में इस बात का भी उल्लेख है कि हाल ही में जम्मू-कश्मीर के पहलगाम क्षेत्र में हुए आतंकी हमले में धार्मिक स्थल को निशाना बनाए जाने की आशंका जताई गई थी। इस घटना को दरगाह मेले के संभावित सुरक्षा जोखिम से जोड़ते हुए रिपोर्ट में “डोमेस्टिक टेरर एलर्ट” की चेतावनी का हवाला दिया गया है।
स्थानीय प्रशासन की चुनौती
बहराइच जिले में दरगाह मेला हर साल लाखों श्रद्धालुओं और पर्यटकों को आकर्षित करता है।
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स्थानीय व्यापारियों, होटल व्यवसायियों और ट्रैवेल एजेंसियों के लिए यह आयोजन बड़ा आर्थिक अवसर होता है।
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लेकिन मौजूदा हालात में प्रशासन को सुरक्षा बनाम सामाजिक-आर्थिक दबावों के बीच संतुलन बनाना कठिन हो रहा है।
स्थानीय लोगों की मिली-जुली प्रतिक्रिया
दरगाह समिति के एक पदाधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर कहा:
“हम प्रशासन के फैसले का सम्मान करते हैं लेकिन उम्मीद करते हैं कि सरकार वैकल्पिक व्यवस्था या सुरक्षा बलों की पर्याप्त तैनाती के साथ आयोजन की अनुमति देगी।”
वहीं, स्थानीय दुकानदार नवाब अली ने कहा:
“अगर मेला रद्द हुआ तो रोज़गार पर बहुत असर पड़ेगा। हमें सुरक्षा चाहिए, लेकिन समाधान भी चाहिए।”
निष्कर्ष: सुरक्षा पहले, पर जन भावना का भी रखें ध्यान
दरगाह मेला बहराइच की सांस्कृतिक और धार्मिक विरासत का अहम हिस्सा रहा है। लेकिन मौजूदा राष्ट्रीय सुरक्षा परिदृश्य को नज़रंदाज़ नहीं किया जा सकता। LIU की रिपोर्ट से प्रशासन के सामने यह स्पष्ट संदेश है कि सुरक्षा सर्वोपरि है, हालांकि इसे सामाजिक और आर्थिक पक्षों के साथ संतुलन बनाते हुए हल किया जाना चाहिए।



