लखनऊ विकास प्राधिकरण (LDA) : में एक बड़े घोटाले का खुलासा हुआ है, जहां करीब 21 हजार फाइलें गायब हो गई हैं। यह फाइलें एक निजी कंपनी को डिजिटलाइजेशन के लिए दी गई थीं, लेकिन अब तक वापस नहीं मिल पाई हैं। मामले की गंभीरता के बावजूद कंपनी के खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है, जिससे LDA की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं।
कैसे गायब हुईं 21 हजार फाइलें?
LDA ने तीन साल पहले अपनी मैन्युअल फाइलों को डिजिटल फॉर्मेट में सेव करने के लिए एक निजी कंपनी को ठेका दिया था। कंपनी को जिम्मेदारी सौंपी गई थी कि वह इन फाइलों को स्कैन करके सुरक्षित डिजिटल फॉर्मेट में सेव करेगी और फिर फाइलें LDA को लौटा देगी।
लेकिन जब LDA ने अपनी फाइलों की जांच और मिलान किया, तो यह पता चला कि करीब 21 हजार फाइलें गायब हैं। कंपनी ने न तो ये फाइलें लौटाईं और न ही किसी तरह का उचित जवाब दिया।
LDA की लापरवाही और कंपनी की चुप्पी:
LDA के अधिकारियों ने शुरुआती जांच में पाया कि कंपनी ने फाइलों को डिजिटली सेव करने का काम अधूरा छोड़ दिया और फिजिकल फाइलें भी वापस नहीं कीं।
-
जिम्मेदार कंपनी: कंपनी का नाम अभी तक गोपनीय रखा गया है।
-
समझौता और प्रक्रिया: डिजिटलाइजेशन के लिए तय किए गए समझौते के तहत, फाइलें सुरक्षित रूप से डिजिटल फॉर्मेट में सेव होनी थीं और फिजिकल फाइलें LDA को लौटाई जानी थीं।
-
LDA की निष्क्रियता: तीन साल बीत जाने के बावजूद LDA ने न तो कंपनी पर कोई कानूनी कार्रवाई की और न ही किसी अधिकारी को जिम्मेदार ठहराया।
लापता फाइलों में क्या थी जानकारी?
गायब हुईं फाइलें LDA के विभिन्न विभागों से संबंधित थीं, जिनमें आवास योजनाओं, भूमि आवंटन, निर्माण परियोजनाओं, और अन्य प्रशासनिक दस्तावेज शामिल हैं।
-
भूमि आवंटन: प्लॉट और मकानों का रिकार्ड।
-
निर्माण अनुमति: बिल्डिंग परमिशन से संबंधित फाइलें।
-
अधिग्रहण मामले: सरकारी जमीन के अधिग्रहण से जुड़ी फाइलें।
LDA अधिकारियों का बयान:
LDA के एक वरिष्ठ अधिकारी ने नाम न बताने की शर्त पर कहा कि इस मामले की जांच चल रही है और फाइलों की रिकवरी के प्रयास किए जा रहे हैं। हालांकि, तीन साल से यह प्रयास केवल कागजों तक ही सीमित हैं।
कानूनी कार्रवाई की मांग:
विशेषज्ञों का मानना है कि यह घटना एक गंभीर लापरवाही का मामला है और LDA को तुरंत:
-
कंपनी पर कानूनी कार्रवाई करनी चाहिए।
-
जिम्मेदार अधिकारियों की जिम्मेदारी तय करनी चाहिए।
-
मामले की उच्च स्तरीय जांच करानी चाहिए।
निष्कर्ष:
लखनऊ विकास प्राधिकरण में 21 हजार फाइलों का गायब होना एक गंभीर मामला है, जो LDA की कार्यप्रणाली और पारदर्शिता पर सवाल उठाता है। कंपनी के खिलाफ अब तक कार्रवाई न होने से यह मामला और जटिल हो गया है। अगर जल्द ही कार्रवाई नहीं हुई, तो यह घोटाला और बढ़ सकता है।



