गोंडा में जनसुनवाई में लापरवाही पर सख्त कार्रवाई: चार एसडीएम समेत 89 अफसरों का वेतन रोका

गोंडा। जनसुनवाई और समाधान पोर्टल के माध्यम से दर्ज की गई शिकायतों के निस्तारण में लापरवाही पर गोंडा जिला प्रशासन ने सख्त कार्रवाई की है। जिलाधिकारी नेहा शर्मा ने चार उपजिलाधिकारी (एसडीएम) समेत 89 अधिकारियों का वेतन रोकने का आदेश दिया है। इस कार्रवाई का मुख्य कारण जनसुनवाई पोर्टल पर प्राप्त शिकायतों का समय पर समाधान न होना और शिकायतकर्ताओं को बार-बार परेशान होना पड़ा।

क्यों की गई यह कार्रवाई?

जिला प्रशासन ने जनसुनवाई और समाधान पोर्टल पर दर्ज शिकायतों की समीक्षा की। इस समीक्षा में पाया गया कि कई मामलों में शिकायतों का समय पर निस्तारण नहीं किया गया और कुछ मामलों में शिकायतकर्ताओं को बार-बार कार्यालयों के चक्कर काटने पड़े। प्रदेश स्तर पर हुई समीक्षा में भी गोंडा जिले के प्रदर्शन को खराब पाया गया, जिसके बाद जिलाधिकारी ने कड़ी कार्रवाई का निर्णय लिया।

किन अधिकारियों पर हुई कार्रवाई?

जिलाधिकारी नेहा शर्मा द्वारा की गई इस सख्त कार्रवाई में चार उपजिलाधिकारी (एसडीएम) समेत कुल 89 अधिकारियों का वेतन रोक दिया गया है। इनमें तहसीलदार, नायब तहसीलदार, कानूनगो, लेखपाल, तथा अन्य प्रशासनिक अधिकारी शामिल हैं।

जिलाधिकारी का सख्त संदेश

जिलाधिकारी नेहा शर्मा ने स्पष्ट किया कि जनसुनवाई और समाधान पोर्टल पर दर्ज शिकायतों का समय पर और सही तरीके से निस्तारण करना अधिकारियों की जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा, “जनता की शिकायतों का समाधान प्राथमिकता पर होना चाहिए। किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी और दोषी अधिकारियों पर आगे भी कार्रवाई जारी रहेगी।”

जनसुनवाई और समाधान पोर्टल क्या है?

जनसुनवाई और समाधान पोर्टल उत्तर प्रदेश सरकार की एक पहल है, जिसके माध्यम से नागरिक अपनी समस्याएं और शिकायतें ऑनलाइन दर्ज कर सकते हैं। इसका उद्देश्य प्रशासनिक अधिकारियों के माध्यम से जनता की समस्याओं का त्वरित और पारदर्शी समाधान करना है।

क्या है आगे की योजना?

जिलाधिकारी ने सभी अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि वे शिकायतों का समयबद्ध और गुणवत्तापूर्ण निस्तारण सुनिश्चित करें। इसके लिए हर हफ्ते शिकायतों की समीक्षा की जाएगी और अनियमितता पाए जाने पर और भी सख्त कार्रवाई की जाएगी।

जनता को कैसे मिलेगा लाभ?

इस सख्त कार्रवाई का उद्देश्य गोंडा जिले में जनसुनवाई और शिकायत निस्तारण प्रक्रिया को अधिक प्रभावी और पारदर्शी बनाना है। इससे जनता की समस्याओं का समय पर समाधान होगा और अधिकारियों की जवाबदेही सुनिश्चित होगी।

निष्कर्ष

गोंडा जिला प्रशासन की इस कार्रवाई ने स्पष्ट कर दिया है कि शिकायत निस्तारण में लापरवाही अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी। जिलाधिकारी नेहा शर्मा की सख्त नीति से न केवल अधिकारियों में जवाबदेही बढ़ेगी बल्कि आम जनता को भी अपनी समस्याओं का त्वरित समाधान मिल सकेगा।

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