गोंडा (उत्तर प्रदेश): नगर कोतवाली क्षेत्र की सिंचाई विभाग कॉलोनी से 15 वर्षीय किशोरी के लापता होने के 20 दिन बाद भी कोई ठोस सुराग नहीं मिलने पर पीड़ित परिवार का सब्र टूट गया है। किशोरी की बरामदगी की मांग को लेकर परिवार जिला पंचायत कार्यालय के टीन शेड के नीचे अनिश्चितकालीन धरने पर बैठ गया है।
7 मई से लापता है किशोरी, अब तक नहीं मिली जानकारी
परिजनों के अनुसार, किशोरी 7 मई की शाम घर से अचानक गायब हो गई थी। अगली सुबह तक कोई जानकारी नहीं मिलने पर उन्होंने नगर कोतवाली में गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई थी, जो बाद में एफआईआर में तब्दील की गई।
हालांकि, एफआईआर दर्ज होने के 20 दिन बाद भी पुलिस के हाथ खाली हैं। कोई गिरफ्तारी नहीं हुई और न ही किशोरी का अब तक कोई पता चल सका है।
धरने पर बैठकर न्याय की मांग
किशोरी के पिता का कहना है,
“पुलिस सिर्फ खानापूर्ति कर रही है, कोई ठोस प्रयास नहीं किया जा रहा। हमें अब न्याय की उम्मीद सिर्फ सार्वजनिक दबाव से है, इसलिए हम धरने पर बैठे हैं। जब तक हमारी बेटी नहीं मिलती, हम यहां से नहीं हटेंगे।“
धरने में स्थानीय लोग और समाजसेवी भी जुड़ने लगे हैं। उन्होंने प्रशासन से मामले की तेजी से जांच और किशोरी की सुरक्षित वापसी की मांग की है।
पुलिस ने क्या कहा?
नगर कोतवाली के प्रभारी ने बताया कि,
“मामले की जांच जारी है। कॉल डिटेल, मोबाइल लोकेशन और आसपास के CCTV फुटेज खंगाले जा रहे हैं। कई संभावित स्थानों पर दबिश दी गई है। हम जल्द से जल्द किशोरी को बरामद करने का प्रयास कर रहे हैं।“
लोगों में आक्रोश, सिस्टम पर उठे सवाल
इस घटना ने गोंडा में कानून व्यवस्था और पुलिस की कार्यशैली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि यही स्थिति रही तो आम जनता का विश्वास पुलिस से उठ जाएगा।
निष्कर्ष:
गायब किशोरी की बरामदगी अब प्रशासन की प्रतिष्ठा का सवाल बनती जा रही है। पीड़ित परिवार का धरना मामले को नए मोड़ पर ले आया है। अगर जल्द कार्रवाई नहीं हुई, तो यह मामला जन आंदोलन का रूप भी ले सकता है।



