गोंडा: गोंडा जिले में ‘स्वच्छ गांव, समृद्ध गोंडा’ अभियान के तहत 25 पीएमश्री कम्पोजिट विद्यालयों में विशेष स्वच्छता अभियान चलाया गया। यह अभियान बच्चों के समर कैंप कार्यक्रम का हिस्सा था, जिसमें स्वच्छता, स्वास्थ्य और पर्यावरण संरक्षण को लेकर कई गतिविधियाँ आयोजित की गईं।
स्कूल परिसरों में हुई सफाई और कीटनाशक दवा का छिड़काव
इस अभियान के तहत विद्यालय परिसरों और आसपास के क्षेत्रों की व्यापक सफाई की गई। साथ ही फॉगिंग और एंटी-लार्वा दवाओं का छिड़काव कर मच्छर जनित बीमारियों की रोकथाम का प्रयास किया गया।
स्वास्थ्य विभाग के सहयोग से यह सुनिश्चित किया गया कि बच्चों और शिक्षकों को सुरक्षित और स्वच्छ वातावरण मिले, खासतौर पर मानसून पूर्व मौसम में।
बच्चों को दी गई स्वच्छता और पर्यावरण की व्यवहारिक शिक्षा
अभियान के दौरान बच्चों को सिर्फ किताबों तक सीमित न रखकर व्यवहारिक ज्ञान भी दिया गया। उन्हें बताया गया कि—
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स्वच्छता क्यों जरूरी है?
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कैसे घर और स्कूल को साफ रखा जा सकता है?
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कूड़े को कैसे अलग-अलग किया जाए?
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गंदगी से कैसे बीमारियाँ फैलती हैं?
बच्चों ने इस दौरान स्वच्छता शपथ भी ली और कई विद्यालयों में दीवार चित्रण, रैली, और निबंध प्रतियोगिता जैसे कार्यक्रम भी आयोजित किए गए।
समन्वय में जुटा जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग
इस अभियान में गोंडा जिला प्रशासन, शिक्षा विभाग, और स्थानीय ग्राम पंचायतों ने मिलकर काम किया। कार्यक्रम का उद्देश्य न सिर्फ बच्चों को स्वच्छता के प्रति जागरूक बनाना था, बल्कि पूरे गांव और अभिभावकों को भी इस आंदोलन से जोड़ना है।
बीएसए कार्यालय ने बताया कि इस पहल से हजारों बच्चों और ग्रामीणों तक स्वच्छता का संदेश पहुंचा है।
“बच्चे ही बदलाव के दूत हैं”: प्रशासन
जिलाधिकारी नेहा शर्मा ने कहा—
“अगर बच्चे स्वच्छता सीखेंगे, तो पूरा समाज बदलेगा। ये अभियान आने वाले समय में गोंडा को एक आदर्श जिले की पहचान देगा।”
निष्कर्ष
गोंडा के पीएमश्री स्कूलों में चला यह स्वच्छता अभियान केवल एक सरकारी कार्यक्रम नहीं, बल्कि बच्चों के माध्यम से भविष्य को गढ़ने का प्रयास है। इससे यह स्पष्ट होता है कि जब शिक्षा के साथ जागरूकता जुड़ती है, तो उसका प्रभाव गहराई तक जाता है।



