गोंडा, उत्तर प्रदेश: गोंडा जिले के मोतीगंज थाना क्षेत्र अंतर्गत दुर्जनपुर माफी ग्राम पंचायत के अहिरहन पुरवा गांव में शनिवार देर रात करीब 2 बजे एक भीषण आग ने तबाही मचा दी। हादसे में दो ट्रैक्टर, 10 कुंतल गेहूं, 20 कुंतल भूसा और लाखों रुपये का घरेलू सामान जलकर खाक हो गया। आग की चपेट में आए घर के मालिक बाबूराम के परिवार को भारी नुकसान हुआ है।
आग की रफ्तार इतनी तेज थी कि बचाव का मौका नहीं मिला
स्थानीय लोगों के अनुसार, आग लगते ही कुछ ही मिनटों में पूरे घर को अपनी चपेट में ले लिया। घर के बाहर खड़े दो ट्रैक्टर भी जलकर राख हो गए। आग की लपटें इतनी तेज थीं कि पास के मकानों तक पहुंच गईं। गांववालों ने जागरूकता और तत्परता दिखाते हुए आग पर काबू पाने की कोशिश की, जिससे बड़ा हादसा टल गया।
दमकल नहीं पहुंची, रास्ते की कमी बनी बाधा
ग्रामीणों ने तुरंत फायर ब्रिगेड को तीन बार फोन किया, लेकिन पक्के रास्ते की कमी के कारण दमकल वाहन गांव तक नहीं पहुंच सके। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए लोगों ने डायल 112 पर कॉल कर पुलिस को सूचित किया। सूचना मिलते ही तीन पुलिस वाहन मौके पर पहुंचे।
ग्रामीणों और पुलिस बल की मदद से पास के डीजल पंपिंग सेट और पाइपों के जरिए आग बुझाने का प्रयास किया गया, जिसमें सफलता भी मिली। इस दौरान मोतीगंज थाना प्रभारी अनीता यादव भी मौके पर मौजूद रहीं और स्थिति की निगरानी करती रहीं।
प्रशासन ने शुरू किया नुकसान का आकलन
रविवार सुबह राजस्व विभाग की टीम गांव पहुंची और मौके का निरीक्षण कर नुकसान का आकलन शुरू किया। मौके पर बनाए गए प्रथमिक रिपोर्ट को तहसील प्रशासन को भेजा गया है, जिसके आधार पर पीड़ित परिवार को राहत देने की प्रक्रिया शुरू होगी।
थाना प्रभारी अनीता यादव ने बताया,
“आग लगने की सूचना मिलते ही पुलिस ने त्वरित कार्रवाई की। फायर ब्रिगेड रास्ते की कमी के चलते नहीं पहुंच सकी, लेकिन पुलिस और ग्रामीणों की मदद से आग पर काबू पा लिया गया है। अब स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है।”
निष्कर्ष:
गोंडा के इस अग्निकांड ने ग्रामीण क्षेत्रों में इमरजेंसी सुविधाओं की पहुंच की गंभीर कमी को एक बार फिर उजागर किया है। यदि फायर ब्रिगेड की गाड़ियां समय पर पहुंच पातीं, तो नुकसान को कम किया जा सकता था। शासन-प्रशासन को अब ऐसे गांवों में सड़क संपर्क और आपातकालीन सेवा प्रबंधन पर ध्यान देने की आवश्यकता है।



