लखनऊ (उत्तर प्रदेश): लखनऊ में स्थित समर्पण कॉलेज ऑफ फार्मेसी के बी.फार्मा छात्र द्वारा आत्महत्या करने के मामले में चिनहट पुलिस ने कॉलेज के सीनियर कैशियर फैज को गिरफ्तार कर लिया है। छात्र के परिवार और सुसाइड नोट के आधार पर आरोपी पर फीस जमा न होने पर परीक्षा न देने देने की धमकी और मानसिक प्रताड़ना का आरोप लगा था।
क्या था मामला?
सूत्रों के अनुसार, मृतक छात्र ने अपने सुसाइड नोट में साफ तौर पर लिखा था कि कॉलेज प्रबंधन द्वारा बार-बार फीस का दबाव बनाया जा रहा था। वह मानसिक रूप से टूट चुका था क्योंकि कॉलेज प्रशासन ने स्पष्ट कर दिया था कि बिना फीस के उसे परीक्षा में बैठने की अनुमति नहीं दी जाएगी।
छात्र के परिजनों ने आरोप लगाया कि
“कॉलेज ने न केवल मानसिक दबाव बनाया, बल्कि उसे बार-बार अपमानित भी किया गया, जिससे वह आत्महत्या जैसा कदम उठाने को मजबूर हुआ।”
पुलिस ने साक्ष्यों के आधार पर की कार्रवाई
चिनहट थाना प्रभारी के अनुसार,
“प्रारंभिक जांच और सुसाइड नोट की पुष्टि के बाद समर्पण कॉलेज ऑफ फार्मेसी के सीनियर कैशियर फैज को आईपीसी की धारा 306 (आत्महत्या के लिए उकसाना) के तहत गिरफ्तार किया गया है।”
“इस मामले में अन्य जिम्मेदार लोगों की भूमिका की भी जांच की जा रही है।”
शिक्षा व्यवस्था पर सवाल
यह घटना न केवल शिक्षा व्यवस्था की क्रूरता और संवेदनहीनता को उजागर करती है, बल्कि यह भी सवाल खड़ा करती है कि क्या फीस के नाम पर छात्रों को मानसिक रूप से प्रताड़ित करना सामान्य बन चुका है?
इस पूरे प्रकरण ने कॉलेज प्रशासन की भूमिका पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगाए हैं। शिक्षा का उद्देश्य जहां छात्रों को संबल देना होना चाहिए, वहीं यहां फीस की तलवार उनके जीवन पर भारी पड़ गई।
परिवार की मांग: न्याय और सख्त कार्रवाई
छात्र के परिवार ने प्रशासन से मांग की है कि
“ऐसे दोषी संस्थानों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए और शिक्षा विभाग भी ऐसे मामलों में त्वरित हस्तक्षेप करे।”
निष्कर्ष:
छात्र की मौत से उपजा यह मामला यह दर्शाता है कि शिक्षा व्यवस्था में संवेदनशीलता की कितनी कमी है। यह जरूरी है कि ऐसे संस्थानों की जांच हो और छात्रों की मानसिक स्वास्थ्य सुरक्षा को प्राथमिकता दी जाए।



