गोंडा: उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले के बभनजोत क्षेत्र स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) की जमीन पर भू-माफियाओं द्वारा अवैध निर्माण का एक गंभीर मामला सामने आया है। इस प्रकरण ने तब और तूल पकड़ लिया जब गौरा विधानसभा क्षेत्र से भाजपा विधायक प्रभात कुमार वर्मा ने सीधे तौर पर गोंडा की मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) डॉ. रश्मि वर्मा पर भू-माफियाओं से मिलीभगत के गंभीर आरोप लगाए।
विधायक ने मौके पर पहुंचकर रुकवाया निर्माण, फेसबुक पर किया खुलासा
विधायक प्रभात कुमार वर्मा ने इस संबंध में अपने फेसबुक अकाउंट पर एक पोस्ट साझा कर पूरी घटना का खुलासा किया। उन्होंने बताया कि जैसे ही उन्हें इस अवैध कब्जे की सूचना मिली, वे तुरंत पुलिसकर्मियों के साथ मौके पर पहुंचे और निर्माणाधीन अवैध कार्य को रुकवा दिया।
अपनी पोस्ट में विधायक ने स्पष्ट रूप से लिखा, “मुझे जानकारी मिली कि प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, बभनजोत की जमीन पर सीएमओ गोंडा की मिलीभगत से भू-माफिया इसरार अहमद एवं अन्य लोग अवैध निर्माण कार्य करा रहे हैं। सूचना मिलते ही मैंने तत्काल मौके पर पहुंचकर निर्माण कार्य रुकवाया।”
योगी सरकार की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति का हवाला, CMO पर उठाए सवाल
विधायक प्रभात कुमार वर्मा ने जोर देकर कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार में इस प्रकार की अवैध गतिविधियों को किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने कड़ी चेतावनी दी कि इस तरह के अवैध और कुत्सित कार्यों में लिप्त लोगों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
उन्होंने आरोप लगाया कि गोंडा की मुख्य चिकित्सा अधिकारी की मिलीभगत से सरकारी जमीन पर अवैध निर्माण किया जा रहा था। विधायक ने सरकार की “जीरो टॉलरेंस नीति” का हवाला देते हुए कहा कि प्रदेश सरकार इस प्रकार के मामलों को लेकर पूरी तरह प्रतिबद्ध है, लेकिन गोंडा CMO उस प्रतिबद्धता के अनुरूप कार्य नहीं कर रही हैं, जिससे सरकारी संपत्ति पर अवैध कब्जों को बढ़ावा मिल रहा है।
CMO ने आरोपों को खारिज किया
वहीं, इस पूरे मामले पर गोंडा की मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. रश्मि वर्मा ने फोन पर बात करते हुए सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने कहा, “विधायक द्वारा मुझ पर बेवजह आरोप लगाए जा रहे हैं। इससे पहले भी दिशा समिति की बैठक में उन्होंने मुझ पर कर्मचारियों से वसूली के आरोप लगाए थे। इस प्रकरण में मेरी कोई भूमिका नहीं है।”
यह मामला अब जांच का विषय बन गया है। विधायक के सीधे आरोप और सीएमओ के इनकार के बीच, गोंडा प्रशासन को इस संवेदनशील मामले की निष्पक्ष जांच कर सच्चाई सामने लानी होगी और दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करनी होगी, ताकि सरकारी संपत्तियों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।



