लखनऊ | भारतीय एस्ट्रोनॉट शुभांशु शुक्ला की 20 दिन के अंतरिक्ष मिशन से सकुशल वापसी के साथ ही लखनऊ में उनके घर और स्कूल में जश्न का माहौल देखने को मिला। अंतरिक्ष से धरती पर सुरक्षित लौटने की इस एतिहासिक लम्हे को उनके माता-पिता ने उसी स्कूल से लाइव देखा, जहां कभी शुभांशु पढ़ाई किया करते थे – सिटी मोंटेसरी स्कूल (CMS), लखनऊ।
मां ने पति के कंधे पर सिर रखकर देखा बेटे का लौटना
जैसे ही स्क्रीन पर शुभांशु की स्पेस कैप्सूल की लैंडिंग दिखाई दी, मां की आंखें छलक पड़ीं। उन्होंने अपने पति के कंधे पर सिर रख लिया और भावुक हो गईं। उनके चेहरे पर बेटे के सुरक्षित लौट आने की राहत, गर्व और ममता साफ झलक रही थी। वहीं, पिता ने बेटे की उपलब्धि पर आंखों में चमक लिए मुस्कुराते हुए कैमरे की ओर देखा।
वही स्कूल, वही दीवारें… आज देख रही थीं इतिहास बनते
CMS के उस प्रांगण में, जहां कभी शुभांशु ने नन्हे कदमों से विज्ञान और सपनों की शुरुआत की थी, आज वहां एक लाखों में एक मुकाम हासिल करने वाला वैज्ञानिक बनकर वह लौटा। स्कूल प्रशासन, शिक्षक और वर्तमान छात्र भी इस क्षण को देखकर उत्साहित और गर्वित नजर आए।
मिशन की जानकारी
शुभांशु शुक्ला उन चार भारतीय एस्ट्रोनॉट्स में शामिल हैं जिन्हें हाल ही में भारत के पहले दीर्घकालिक मानव अंतरिक्ष मिशन में भेजा गया था। 20 दिन के इस कठिन और चुनौतीपूर्ण मिशन में उन्होंने कई वैज्ञानिक प्रयोग और अंतरिक्ष तकनीक संबंधी अध्ययन पूरे किए।
अंतरिक्ष से धरती तक का गौरव
ISRO और भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान समुदाय के लिए यह मिशन एक नई ऊंचाई साबित हुआ है। शुभांशु की सफलता, देश के युवा वैज्ञानिकों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेगी। शुभांशु ने अपने स्कूल CMS, अपने शिक्षकों, और विशेष रूप से अपने माता-पिता का आभार भी जताया।
CMS संस्थापक ने कहा- “हमारा बेटा तारे छूकर लौटा है”
CMS संस्थापक डॉ. जगदीश गांधी ने कहा, “शुभांशु हमारे स्कूल का गौरव है। उसने न केवल अंतरिक्ष में जाकर इतिहास रचा, बल्कि स्कूल, लखनऊ और पूरे देश का नाम रोशन किया है।”
निष्कर्ष
शुभांशु शुक्ला की अंतरिक्ष से सुरक्षित वापसी, सिर्फ एक मिशन की पूर्णता नहीं बल्कि मां-बाप के सपनों की भी जीत है। यह कहानी सिर्फ एक एस्ट्रोनॉट की नहीं, बल्कि हर उस परिवार की है जो अपने बच्चों को ऊंचा उड़ते देखना चाहता है।



