गोंडा। उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले में विद्युत विभाग की लापरवाही एक बार फिर सवालों के घेरे में है। वजीरगंज थाना क्षेत्र के परासिया पूरे तिवारी गांव में सोमवार शाम तीन बच्चों की दर्दनाक मौत हो गई। बताया जा रहा है कि खेत में ट्रैक्टर से जुड़े तार को छुड़ाने के दौरान बच्चे बिजली के खंभे की स्टे वायर से टकरा गए, जिसमें करंट दौड़ रहा था।
खेत में काम कर रहे थे बच्चे, करंट की चपेट में आकर तीनों की मौके पर मौत
पीड़ित अंजनी तिवारी अपने खेत में लेवलिंग का कार्य कर रहे थे। इसी दौरान उनके ट्रैक्टर में कटीला तार उलझ गया। उनके बेटे शिवम तिवारी और दो अन्य बच्चे तार छुड़ाने पहुंचे, तभी पास के विद्युत पोल की स्टे वायर में उतर रहे करंट की चपेट में आ गए। करंट इतना तेज था कि तीनों बच्चों की मौके पर ही मौत हो गई।
शासन ने लिया संज्ञान, विद्युत विभाग पर उठे सवाल
घटना की जानकारी मिलते ही क्षेत्र में हड़कंप मच गया। पीड़ित परिजन ने विद्युत विभाग पर गंभीर लापरवाही के आरोप लगाए हैं। वहीं, शासन ने भी इस मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच के निर्देश दिए हैं।
मुख्य अभियंता ने की दो सदस्यीय जांच कमेटी की घोषणा
विद्युत विभाग के मुख्य अभियंता यदुनाथ यथार्थ ने बताया कि घटना की गहन जांच के लिए दो सदस्यीय कमेटी बनाई गई है। यह कमेटी जांच करेगी कि स्टे वायर में करंट कैसे उतरा और हादसे की क्या मुख्य वजह रही।
जांच में दोषी पाए गए अधिकारियों पर होगी कड़ी कार्रवाई
मुख्य अभियंता ने स्पष्ट किया कि विद्युत पोलों की दूरी, ग्राउंडिंग की स्थिति और स्थानीय व्यवस्था की जांच की जा रही है। उन्होंने कहा कि जो भी अधिकारी या कर्मचारी इस लापरवाही के लिए जिम्मेदार पाया जाएगा, उसके खिलाफ विभागीय स्तर पर कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने की मांग
गांव के लोगों और पीड़ित परिवार ने प्रशासन से बच्चों की मौत के लिए जिम्मेदार अधिकारियों को सस्पेंड करने और उचित मुआवजा देने की मांग की है।
निष्कर्ष:
गोंडा की यह घटना एक बार फिर बता रही है कि गांवों में विद्युत सुरक्षा को लेकर कितनी गंभीर लापरवाही हो रही है। यदि समय रहते वायरिंग और पोल की निगरानी होती, तो शायद ये तीन मासूम आज जिंदा होते। अब देखना होगा कि जांच के बाद दोषियों पर क्या कार्रवाई होती है।



