लखनऊ: जानकीपुरम एक्सटेंशन के निवासी निरंकार नाथ पाण्डेय के साथ मोबाइल एप के जरिए बड़ी ठगी का मामला सामने आया है। आरोपी जालसाजों ने UTI AMC, LNDFO, NJ और IIFL के नाम पर फर्जी एप बनाकर उन्हें निवेश का झांसा दिया और कुल 30 लाख 26 हजार 400 रुपए हड़प लिए।
बैंक अलर्ट से खुला राज
निरंकार पाण्डेय के अनुसार, जालसाजों ने कई बार अलग-अलग एप्स के माध्यम से पैसे ट्रांसफर कराए। उन्होंने शुरुआत में सोचा कि यह सही निवेश है, लेकिन जब बैंक से संदिग्ध लेन-देन के मैसेज आने लगे, तो उन्हें ठगी का अहसास हुआ।
निरंकार ने बताया, “पहले तो मुझे विश्वास था कि एप्स सही हैं, लेकिन जैसे ही बैंक ने संदेश भेजा, मुझे समझ में आया कि पैसा फंस गया है।”
फर्जी एप्स की रणनीति
जालसाजों ने निवेशकों को आकर्षित करने के लिए प्रतिष्ठित निवेश कंपनियों के नाम का उपयोग किया। एप्स पेशेवर दिखती थीं, जिससे आम लोगों का विश्वास जीतना आसान हो गया। इस प्रकार, उन्होंने बड़ी रकम आसानी से हड़प ली।
पुलिस और कानूनी कार्रवाई
कोठीभार थाना पुलिस ने मामले में जांच शुरू कर दी है। पुलिस सूत्रों के अनुसार, फर्जी एप्स के सर्वर और ट्रांजैक्शन लॉग खंगाले जा रहे हैं। निरंकार ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है और कहा कि वह अन्य निवेशकों को इस प्रकार की धोखाधड़ी से सावधान करने की अपील करते हैं।
पुलिस अधिकारियों ने लोगों से चेतावनी दी है कि किसी भी अनजान मोबाइल एप पर निवेश करने से पहले उसकी वैधता और कंपनी की पुष्टि जरूर करें।
विशेषज्ञों की सलाह
वित्तीय सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि मोबाइल एप के जरिए निवेश करते समय हमेशा ऑफिशियल वेबसाइट और बैंक लिंक का उपयोग करना चाहिए। किसी भी एप के माध्यम से अचानक निवेश करने से पहले कंपनी के लाइसेंस और SEBI रजिस्ट्रेशन की जांच जरूरी है।
निरंकार पाण्डेय की यह घटना एक चेतावनी बनकर सामने आई है कि निवेशकों को डिजिटल निवेश के झांसे और धोखाधड़ी से सतर्क रहना चाहिए।



