गोंडा: गोंडा देवीपाटन मंडल के आयुक्त शशि भूषण लाल सुशील ने स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली की जांच कराई, जिसमें संविदा चिकित्सा कर्मियों की बड़ी लापरवाही सामने आई। जांच में यह खुलासा हुआ कि 108 एंबुलेंस पर तैनात कई इमरजेंसी मेडिकल टेक्नीशियन (EMT) को सीपीआर (CPR) देने का प्रशिक्षण या कौशल नहीं था।
हादसे के बाद जांच में खुली पोल
हाल ही में एक आपातकालीन स्थिति में जब मरीज को तुरंत जीवनरक्षक उपाय की आवश्यकता थी, तब संविदा चिकित्सा कर्मियों द्वारा उचित उपचार न देने के कारण स्थिति गंभीर हो गई। इसके बाद आयुक्त ने मामले की विशेष जांच का आदेश दिया।
जांच में यह भी सामने आया कि कई EMT की योग्यता और प्रशिक्षण प्रमाणपत्र वास्तविक स्थिति के अनुरूप नहीं हैं। आयुक्त ने स्वास्थ्य अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए हैं कि संविदा चिकित्सा कर्मियों के फिलहाल प्रशिक्षण और कौशल की समीक्षा तुरंत की जाए।
प्रशासन की प्रतिक्रिया
आयुक्त ने कहा कि यह मामला केवल व्यक्तिगत जिम्मेदारी का नहीं, बल्कि सिस्टम की कमजोरी को दर्शाता है। उन्होंने स्वास्थ्य विभाग को सभी संविदा कर्मियों के लिए CPR और इमरजेंसी ट्रेनिंग सुनिश्चित करने का निर्देश दिया।
विशेषज्ञों की राय
विशेषज्ञों का कहना है कि आपातकालीन चिकित्सा सेवाओं में प्रशिक्षित कर्मियों की उपस्थिति जीवन और मृत्यु का फ़र्क तय करती है। यदि EMT को CPR या अन्य जीवनरक्षक तकनीक का ज्ञान नहीं है, तो मरीजों की जान पर खतरा बढ़ जाता है।
निष्कर्ष:
गोंडा में यह मामला स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली में सुधार की जरूरत और संविदा चिकित्सा कर्मियों की नियमित प्रशिक्षण एवं योग्यता सत्यापन की अहमियत को उजागर करता है। आयुक्त की जांच और आगे की कार्रवाई से उम्मीद है कि ऐसी लापरवाहियों पर कड़ी रोक लग सकेगी।



