लखनऊ। राजधानी लखनऊ के कैसरबाग मछली मंडी इलाके में मंगलवार दोपहर करीब ढाई बजे अचानक एक 150 साल पुराना पीपल का पेड़ गिर गया। इस दर्दनाक हादसे में एक व्यक्ति की मौत हो गई जबकि चार लोग घायल हो गए। सभी घायलों को बलरामपुर अस्पताल में भर्ती कराया गया है। घटना स्थल पर 100 से अधिक पुलिसकर्मी, फायर ब्रिगेड और SDRF (State Disaster Response Force) की टीम ने राहत एवं बचाव अभियान चलाया। पेड़ की मोटी डालें काटकर दबे हुए लोगों को बाहर निकाला गया।
केंद्रीय रक्षा मंत्री और डिप्टी सीएम का दौरा
स्थानीय सांसद और केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने हादसे पर शोक संवेदना व्यक्त की। डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक भी मौके पर पहुंचे और अधिकारियों को निर्देशित किया कि घायलों का सर्वोत्तम इलाज सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने KGMU को अलर्ट कर दिया है ताकि प्राथमिकता के आधार पर उपचार किया जा सके।
मेयर व सपा विधायक में बहस
इस दौरान मौके पर नगर निगम की मेयर सुषमा खर्कवाल और सपा विधायक रविदास मेहरोत्रा भी पहुंचे। दोनों के बीच गहरी बहस हो गई, जिसका कारण पहले से चली आ रही शिकायतों पर उचित कार्रवाई का अभाव बताया गया। मेयर ने साफ किया कि यदि शिकायतें पहले की गई थीं लेकिन कार्रवाई नहीं हुई, तो दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। उन्होंने जर्जर बिल्डिंग में रहने वाले परिवारों को सुरक्षित स्थान पर शिफ्ट कराने का आश्वासन भी दिया।
घटना की वजह: भारी बारिश व पेड़ की जर्जर स्थिति
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, रात में हुई भारी बारिश के कारण यह हादसा हुआ। बताया गया कि पेड़ की छंटाई हेतु नगर निगम और वन विभाग के अधिकारियों को पहले भी शिकायतें दी गईं थीं, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई थी। इसी चूक की वजह से यह दुर्घटना हुई।
राहत एवं बचाव कार्य
SDRF टीम, फायर ब्रिगेड, पुलिस और नगर निगम की टीमें घटना स्थल पर सक्रिय रहीं। गुमटी, घर और अन्य संरचनाओं के मलबे से घायल लोगों को निकाला गया। घटना स्थल पर अफरातफरी मच गई थी, जिसके कारण प्रशासन ने पूरी व्यवस्था को नियंत्रण में लिया।
भविष्य के लिए चेतावनी और कार्रवाई का आश्वासन
मेयर सुषमा खर्कवाल ने स्पष्ट किया कि भविष्य में ऐसी लापरवाहियों की पुनरावृत्ति नहीं होगी। दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने प्रभावित परिवारों को आश्वासन दिया कि उनकी रहने की उचित व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी।
निष्कर्ष:
यह हादसा प्रशासन के लिए एक चेतावनी है कि सार्वजनिक सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए। लंबित शिकायतों पर त्वरित कार्रवाई और जिम्मेदार अधिकारियों को जवाबदेह ठहराया जाना आवश्यक है। ऐसी घटनाओं से बचने के लिए नियमित निरीक्षण, पेड़ कटाई अभियान और पारदर्शी प्रशासनिक प्रक्रिया जरूरी है।



