आगरा: की सड़कों पर आस्था और उत्सव का संगम उस समय दिखाई दिया, जब 148वीं रामबारात धूमधाम से निकाली गई। परंपरा के अनुसार बारात की शुरुआत लाला चन्नोमल की बारहदरी से हुई और सुबह यह कमलानगर स्थित जनकपुरी पहुंची। पूरे मार्ग में श्रद्धालुओं ने जगह-जगह बारात का भव्य स्वागत किया।
110 झांकियां और ऑपरेशन सिंदूर का आकर्षण
इस बारात में कुल 110 झांकियां शामिल रहीं। परंपरागत रूप से सबसे पहले श्री गणेश की झांकी निकली, जिसके बाद धार्मिक व सांस्कृतिक झांकियों ने श्रद्धालुओं का मन मोह लिया।
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12 ज्योतिर्लिंगों की झलक श्रद्धालुओं को कराई गई।
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सबसे ज्यादा आकर्षण खींची ‘ऑपरेशन सिंदूर’ पर आधारित विशेष झांकी ने, जिसे देखने के लिए भारी भीड़ उमड़ी।
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झांकियों के साथ 11 बैंड दल देशभक्ति और भक्ति गीतों की धुनों पर माहौल को और भी जीवंत बनाते रहे।
लोग देशभक्ति गीतों पर झूमते नजर आए और सड़कों पर आस्था के साथ उत्सव का अद्भुत दृश्य दिखाई दिया।
रामबारात का रूट और सुरक्षा व्यवस्था
रामबारात रावतपाड़ा से होते हुए दरेसी, छत्ता बाजार, कचहरी घाट, बेलनगंज, धूलियागंज, किनारी बाजार, सिटी स्टेशन रोड, फुलट्टी बाजार और सेब का बाजार होते हुए कमलानगर पहुंची।
पूरे मार्ग पर सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए। पुलिस बल और बैरिकेडिंग के साथ रूट डायवर्जन लागू किया गया। भारी वाहनों और बसों के रूट भी बदले गए ताकि यातायात प्रभावित न हो।
परंपरा और मर्यादा का पालन
श्रीरामलीला कमेटी के अध्यक्ष पुरुषोत्तम खंडेलवाल ने बताया कि इस बार किसी भी अखाड़े के कलाकार सड़क पर भगवान के स्वरूप का अभिनय नहीं करेंगे। केवल झांकियां और भगवान के स्वरूप ही प्रस्तुत होंगे, ताकि मर्यादा और श्रद्धा का पालन हो सके।
श्रद्धालुओं का उत्साह और नेताओं की मौजूदगी
रामबारात देखने के लिए श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। महिलाएं, बच्चे और बुजुर्ग सभी आस्था से सड़कों पर डटे रहे।
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केंद्रीय राज्य मंत्री एसपी सिंह बघेल ने इस अवसर को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि 148 साल पुरानी परंपरा आज भी उतनी ही आस्था और भव्यता से आगे बढ़ रही है।
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श्रद्धालुओं ने कहा कि हर साल उन्हें रामबारात का इंतजार रहता है और इस बार की झांकियां विशेष रूप से आकर्षक रहीं।
जनकपुरी में सजी मिथिला नगरी
कमलानगर स्थित जनकपुरी को अयोध्या नगरी और मिथिला नगरी की झलक से सजाया गया।
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रंग-बिरंगे पंडाल
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रोशनी से जगमगाती सड़कों पर स्वागत द्वार
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रामराज्य की कल्पना को साकार करती सजावट
यह दृश्य श्रद्धालुओं के लिए आध्यात्मिक और सांस्कृतिक अनुभव बन गया।
निष्कर्ष:
आगरा की 148वीं रामबारात केवल धार्मिक आस्था का ही नहीं, बल्कि सांस्कृतिक, सामाजिक और देशभक्ति के रंगों का भी अद्भुत संगम रही। भव्य झांकियों, मर्यादा के पालन और जनकपुरी की सजावट ने इस आयोजन को यादगार बना दिया।



