गोंडा। उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले के दो युवा कलाकारों ने देशभर के फिल्म निर्माताओं को पछाड़ते हुए प्रतिष्ठित इंडिया फिल्म प्रोजेक्ट (IFP) 2025 में प्लेटिनम अवॉर्ड हासिल किया है। यह सम्मान उन्हें “फिल्म ऑफ द ईयर” श्रेणी में मात्र 50 घंटों के भीतर एक सशक्त, संवेदनशील और समाज को आईना दिखाने वाली शॉर्ट फिल्म बनाने के लिए मिला।
क्या है IFP?
IFP एशिया का सबसे बड़ा रचनात्मक फिल्म चैलेंज है, जिसमें प्रतिभागियों को सिर्फ 50 घंटे का समय मिलता है।
इन 50 घंटों में:
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कहानी लिखना
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स्क्रिप्टिंग
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शूटिंग
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एडिटिंग
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बैकग्राउंड स्कोर
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फाइनल फिल्म डिलीवरी
सब कुछ पूरा करना होता है।
पूरी दुनिया के हजारों क्रिएटर्स इसमें हिस्सा लेते हैं।
गोंडा के कलाकारों ने किया कमाल
इस चुनौती में गोंडा जिले के दो युवा जुड़े—
1. लेखक:
ज्ञानेंद्र प्रताप सिंह
निवासी: कर्नलगंज तहसील के भभुआ गांव
इन्होंने फिल्म की कहानी और पटकथा लिखकर जातीय कुप्रथाओं जैसे संवेदनशील मुद्दे को बेहद प्रामाणिकता के साथ प्रस्तुत किया।
2. निर्देशक:
हर्षित सिंह
निवासी: परसपुर
इन्होंने निर्देशन और विजुअल ट्रीटमेंट की जिम्मेदारी संभालते हुए मजबूत कहानी को स्क्रीन पर प्रभावशाली तरीके से जीवंत किया।
कहानी का विषय — जातीय कुप्रथाओं की सच्चाई
फिल्म का विषय समाज में अभी भी मौजूद जाति आधारित भेदभाव पर केंद्रित था।
इन दोनों कलाकारों ने:
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जमीनी हकीकत
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स्थानीय चरित्रों की मौलिकता
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और सामाजिक संदेश
को बेहद गहरे, लेकिन सधे हुए अंदाज़ में पर्दे पर उतारा, जिसने ज्यूरी को खासा प्रभावित किया।
टॉप फिल्ममेकर दिबाकर बनर्जी ने किया सम्मानित
फिल्म जगत के प्रतिष्ठित नाम और ज्यूरी सदस्य दिबाकर बनर्जी ने इन्हें प्लेटिनम अवॉर्ड प्रदान किया।
दिबाकर ने इन दोनों की सराहना करते हुए उनकी कहानी कहने की शैली को “गहन और प्रभावी” बताया।
छोटे शहर की बड़ी उपलब्धि
यह पुरस्कार सिर्फ दो कलाकारों की सफलता नहीं, बल्कि यह संदेश भी है कि—
“छोटे शहरों की प्रतिभाएँ भी बड़े मंचों पर चमक सकती हैं।”
गोंडा के युवाओं की इस उपलब्धि से स्थानीय फिल्म और कला जगत में उत्साह है। यह उपलब्धि जिले के नए कलाकारों और युवाओं के लिए प्रेरणा का बड़ा स्रोत बन गई है।



