गोंडा: जिले में इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (IOCL) के तेल डिपो को बंद किए जाने के विरोध में कर्मचारियों का आक्रोश बढ़ता जा रहा है। शनिवार को सैकड़ों कर्मचारियों ने गोंडा सांसद और विदेश राज्यमंत्री कीर्तिवर्धन सिंह के स्थानीय कार्यालय पर पहुंचकर जोरदार प्रदर्शन किया और अपनी मांगों को लेकर ज्ञापन सौंपा।
प्रदर्शन के दौरान कर्मचारियों ने “तेल डिपो चालू करो” और “हमारी मांगें पूरी करो” जैसे नारे लगाए। कर्मचारियों का कहना है कि IOCL की ओर से डिपो को गोंडा से लखनऊ शिफ्ट करने की तैयारी की जा रही है, जिससे करीब 500 छोटे-बड़े कर्मचारियों की आजीविका पर संकट आ गया है।
कर्मचारियों का आरोप — डिपो खाली, जल्दबाजी में बंद करने की तैयारी
कर्मचारियों ने बताया कि डिपो मैनेजर पिछले कई महीनों से उन्हें अनौपचारिक रूप से बता रहे हैं कि गोंडा डिपो को बंद कर लखनऊ स्थानांतरित किया जाएगा।
उनके अनुसार:
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डिपो से डीजल और पेट्रोल लगभग खाली कराया जा चुका है
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बंद करने की घोषणा भी कर्मचारियों तक पहुंचाई गई
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कर्मचारियों से कहा जा रहा है कि वे कहीं और नौकरी तलाश लें
कर्मचारियों का कहना है कि बेहद कम वेतन पर लखनऊ में जाकर नौकरी कर पाना संभव नहीं है, इसलिए डिपो बंद होने से उनके परिवारों की रोजी-रोटी पर बड़ा असर पड़ेगा।
1995-96 में हुआ था डिपो का उद्घाटन
कर्मचारियों ने बताया कि यह डिपो वर्ष 1995-1996 में तत्कालीन मंत्री और विदेश राज्यमंत्री कीर्तिवर्धन सिंह के पिता स्वर्गीय कुंवर आनंद सिंह द्वारा स्थापित कराया गया था। उनका कहना है कि—
“हम चाहते हैं कि स्वर्गीय राजा आनंद सिंह की विरासत उनके बेटे की मौजूदगी में खत्म न हो।”
सांसद प्रतिनिधि ने दिया आश्वासन
गोंडा सांसद प्रतिनिधि रमाशंकर मिश्रा ने पुष्टि की कि कर्मचारियों से प्राप्त ज्ञापन विदेश राज्यमंत्री को भेज दिया गया है। उन्होंने कहा कि—
“हम पूरी कोशिश करेंगे कि गोंडा का तेल डिपो बंद न हो और किसी कर्मचारी को दिक्कत न आए। यह क्षेत्र की विरासत से जुड़ा मुद्दा है।”
कर्मचारी उम्मीद कर रहे हैं कि सरकार और IOCL प्रबंधन जल्द ही इस पर सकारात्मक फैसला लेगा।
निष्कर्ष:
गोंडा IOCL डिपो बंद होने की खबर से स्थानीय कर्मचारियों और क्षेत्र की अर्थव्यवस्था पर बड़ा असर पड़ सकता है। कर्मचारियों द्वारा सांसद कार्यालय पर दिया गया ज्ञापन इस मुद्दे की गंभीरता को दर्शाता है। अब फैसला सरकार और विभाग पर निर्भर है कि वे इस डिपो को चालू रखने के लिए क्या कदम उठाते हैं। स्थानीय स्तर पर उम्मीदें बनी हुई हैं कि गोंडा की वर्षों पुरानी विरासत को समाप्त नहीं किया जाएगा।



