गोंडा। भाजपा के वरिष्ठ नेता और पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह के बड़े बेटे एवं गोंडा सदर से विधायक प्रतीक भूषण सिंह ने सोमवार को पहली बार सार्वजनिक मंच से गाना गाकर सभी को चौंका दिया। यह अवसर गोंडा टाउन हॉल में आयोजित युवा उत्सव एवं विज्ञान मेला कार्यक्रम का था।
कार्यक्रम के दौरान प्रतीक भूषण सिंह ने लोकगीत
“कौने नरेशवा कय देशवा उजड़ गइले… केकरी दुवरिया ना ठाव ये बाबू”
गाकर श्रोताओं की तालियां बटोरीं। मंच से गाना गाने के बाद उन्होंने मुस्कराते हुए कहा—
“मेरे पिताजी बहुत अच्छे गायक हैं, इसलिए मैं उन्हें 99 प्रतिशत कॉपी करता हूं। हम तो उनके ही एसेट हैं।”
भगवान राम से जुड़ा है गीत
प्रतीक भूषण सिंह ने बताया कि यह गीत भगवान श्रीराम के वनवास से जुड़ा हुआ है। गीत के भाव में यह दर्शाया गया है कि राम-सीता जैसे सुंदर युवक-युवती को देखकर लोग कहते हैं कि जरूर किसी राज्य में अन्याय हुआ होगा, तभी ये वनवास में निकले हैं।
उन्होंने बताया कि इससे पहले यह गीत कई बार उनके पिता बृजभूषण शरण सिंह भी सार्वजनिक मंचों से गा चुके हैं। पिता की शैली में बेटे द्वारा पहली बार मंच से गाना गाने का वीडियो भी सामने आया है, जो सोशल मीडिया पर चर्चा में है।
प्रतिभाओं को किया सम्मानित
कार्यक्रम में विधायक प्रतीक भूषण सिंह ने बच्चों द्वारा प्रस्तुत लोकगीत, लोकनृत्य, पेंटिंग, भाषण, कविता-कहानी लेखन और विज्ञान आधारित मॉडलों की सराहना की। उन्होंने प्रतियोगिता में विजेता प्रतिभागियों को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया और मंडल स्तरीय प्रतियोगिता के लिए शुभकामनाएं दीं।
परिवार में मंच से कला की परंपरा
उल्लेखनीय है कि इसी वर्ष 25 अक्टूबर को बृजभूषण शरण सिंह की बेटी शालिनी सिंह ने भी पहली बार सार्वजनिक मंच से शायरी पढ़ी थी। नोएडा में आयोजित कवि सम्मेलन में उन्होंने खुद को “पहलवान की बेटी” बताते हुए कई प्रभावशाली शायरियां प्रस्तुत की थीं, जो काफी चर्चित रहीं।
शालिनी सिंह ने मंच से मजाकिया अंदाज में अपने भाइयों करण और प्रतीक को “बाहुबली टाइप” भी बताया था।
राजनीतिक परिवार से हैं प्रतीक भूषण सिंह
प्रतीक भूषण सिंह, पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह के बड़े बेटे हैं और वर्तमान में गोंडा सदर से दूसरी बार विधायक हैं। उनके छोटे भाई करण भूषण सिंह कैसरगंज से भाजपा सांसद हैं। उनकी माता केतकी देवी सिंह भी लोकसभा सांसद और जिला परिषद अध्यक्ष रह चुकी हैं।
गोंडा के युवा उत्सव कार्यक्रम में प्रतीक भूषण सिंह का मंच से गाना गाना न केवल सांस्कृतिक कार्यक्रम का आकर्षण बना, बल्कि यह भी दिखाया कि राजनीतिक परिवार के साथ-साथ कला और संस्कृति से भी उनका गहरा जुड़ाव है। पिता की शैली को अपनाते हुए उनका यह अंदाज लोगों को खूब पसंद आया।

