गोंडा। जिले के नंदिनी निकेतन परिसर में आठ दिवसीय राष्ट्रकथा का भव्य शुभारंभ वैदिक मंत्रोच्चार और धार्मिक वातावरण के बीच किया गया। कार्यक्रम का आरंभ श्रीआनंदम धाम पीठाधीश्वर सद्गुरु रितेश्वर जी महाराज ने अयोध्या से पधारे साधु-संतों के साथ व्यास पीठ की विधिवत पूजा-अर्चना कर किया।
कथा के शुभारंभ अवसर पर स्कूली बच्चों ने पुष्पवर्षा कर सद्गुरु रितेश्वर जी महाराज का भव्य स्वागत किया। आयोजन के पहले ही दिन 10 हजार से अधिक बच्चों ने राष्ट्रकथा का श्रवण किया, जिससे पूरे परिसर में भक्तिमय और राष्ट्रभाव से ओत-प्रोत वातावरण देखने को मिला।
युवाओं में बढ़ रहा सनातन मूल्यों का रुझान
उद्घाटन कार्यक्रम में श्रीराम बल्लभ कुंज के महंत राजकुमार दास भी विशेष रूप से उपस्थित रहे। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि वर्तमान समय में युवाओं के रुझान में सकारात्मक बदलाव देखने को मिल रहा है। पहले जहां युवा अधिकतर पर्यटन स्थलों की ओर आकर्षित होते थे, अब वे काशी, वृंदावन, महाकाल और श्रीधाम अयोध्या जैसे धार्मिक स्थलों की ओर बढ़ रहे हैं।
महंत राजकुमार दास ने इसे सनातन मूल्यों की ओर लौटने का संकेत बताते हुए कहा कि राष्ट्रकथा और रामकथा से प्रेरणा लेकर युवाओं को जीवन में दिशा और स्थिरता मिलती है।
मथुरा मंदिर निर्माण को लेकर दिए संकेत
कार्यक्रम के दौरान मथुरा में श्रीकृष्ण मंदिर निर्माण को लेकर भी चर्चा हुई। महंत राजकुमार दास ने कहा कि भविष्य में वहां मंदिर निर्माण की संभावनाएं स्पष्ट रूप से दिखाई दे रही हैं। पश्चिम बंगाल में नई बाबरी मस्जिद बनाए जाने की घोषणा से जुड़े सवाल पर भी उन्होंने अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त की।
“राष्ट्र और राम एक-दूसरे के पूरक” — जगद्गुरु रामानंदाचार्य
कथा के उद्घाटन अवसर पर पहुंचे जगद्गुरु रामानंदाचार्य दिनेशाचार्य महाराज, श्रीराम जन्मभूमि अयोध्या धाम ने कहा कि “राष्ट्र और राम एक-दूसरे के पूरक हैं।” उन्होंने कहा कि यदि राष्ट्र को सशक्त, मर्यादित और संगठित बनाना है तो भगवान श्रीराम के चरित्र, आदर्श और मर्यादा को जीवन में उतारना होगा।
उन्होंने कहा कि अयोध्या से ही राष्ट्र की अवधारणा जुड़ी हुई है और राष्ट्रकथा व रामकथा का संयुक्त आयोजन इसी विचार को सशक्त करता है।
भारत पहले से ही सांस्कृतिक रूप से हिंदू राष्ट्र
भारत को हिंदू राष्ट्र बनाए जाने के प्रश्न पर जगद्गुरु रामानंदाचार्य ने कहा कि भारत सांस्कृतिक रूप से पहले से ही हिंदू राष्ट्र है और आने वाले समय में इसकी औपचारिक घोषणा भी संभव है। उन्होंने यह भी कहा कि जैसे अयोध्या में श्रीराम मंदिर का निर्माण हुआ, उसी प्रकार मथुरा सहित अन्य स्थानों पर भी मंदिर निर्माण होगा।
आठ दिनों तक होंगे प्रवचन और सांस्कृतिक कार्यक्रम
आयोजन में बड़ी संख्या में बच्चे, श्रद्धालु, संत-महात्मा और स्थानीय नागरिक मौजूद रहे। आयोजकों के अनुसार, आठ दिनों तक चलने वाली इस राष्ट्रकथा में प्रतिदिन राष्ट्र, संस्कृति, सनातन धर्म और भारतीय मूल्यों पर आधारित प्रवचन, सांस्कृतिक प्रस्तुतियां और विशेष कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
गोंडा में शुरू हुई आठ दिवसीय राष्ट्रकथा केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि राष्ट्र और सनातन चेतना को जागृत करने का मंच बनकर उभरी है। संतों और धर्माचार्यों के विचारों ने स्पष्ट किया कि रामकथा और राष्ट्रकथा के माध्यम से समाज को एक नई दिशा और सांस्कृतिक चेतना प्रदान की जा सकती है।

