अयोध्या में 2025 की रामनवमी एक ऐतिहासिक और आध्यात्मिक उत्सव में तब्दील हो गई, जब लाखों श्रद्धालुओं ने रामलला के भव्य जन्मोत्सव में हिस्सा लिया और सूर्य की किरणों से हुए ‘सूर्य तिलक’ के दिव्य दर्शन किए।
रामनवमी के अवसर पर रविवार सुबह से ही अयोध्या का राम मंदिर परिसर भक्ति, भव्यता और उत्साह से भर उठा। रामलला का आकर्षक श्रृंगार किया गया और ठीक दोपहर 12 बजे, सूर्य की किरणों ने चार मिनट तक भगवान राम के ललाट पर तिलक किया। यह क्षण ऐतिहासिक था, जिसे सटीक बनाने के लिए ISRO और IIT के वैज्ञानिकों ने तकनीकी सहायता प्रदान की।

सूर्य तिलक की प्रमुख झलकियां:
-
4 मिनट तक सूर्य की किरणों से रामलला का तिलक
-
ISRO व IIT वैज्ञानिकों ने सूर्य तिलक की योजना और परीक्षण किए
-
श्रद्धालुओं ने मंत्रोच्चार के साथ पंचद्रव्यों से रामलला का अभिषेक देखा
-
सुबह 3:30 बजे से मंदिर के कपाट खुले, दर्शन, आरती और राग-भोग का क्रम शुरू हुआ
-
रामलला को बाल रूप में आकर्षक वस्त्रों से सजाया गया
देश-विदेश से उमड़ा श्रद्धालुओं का सैलाब:
रामनवमी पर देश और विदेश से लाखों श्रद्धालु अयोध्या पहुंचे। श्रद्धालुओं ने पहले सरयू में स्नान किया, फिर हनुमानगढ़ी और रामलला के दर्शन किए। रामपथ पर भक्तों पर ड्रोन से सरयू जल का छिड़काव भी किया गया। मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा के बाद यह पहला रामनवमी उत्सव था जिसने एक नई भव्यता को जन्म दिया।
सेवा और सुरक्षा के खास इंतज़ाम:
-
जगह-जगह पानी और शरबत के स्टॉल लगाए गए
-
चलने में असमर्थ लोगों के लिए विशेष वाहनों की व्यवस्था
-
स्थानीय लोगों ने दूर-दराज से आए भक्तों को जलपान कराकर सेवा की
रामनवमी 2025 का संदेश:
यह आयोजन केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि विश्व को भारतीय संस्कृति, विज्ञान और श्रद्धा के सामंजस्य की झलक भी दिखाता है।

