गोंडा/लखनऊ। उत्तर प्रदेश में निजी स्कूलों द्वारा की जा रही मनमानी फीस वृद्धि के विरोध में मंगलवार को राष्ट्रीय छात्र पंचायत ने राजधानी लखनऊ के हजरतगंज स्थित दारुल सफा, गेट नंबर-2 (विधायक निवास परिसर) पर एक अनोखा और प्रतीकात्मक प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के दौरान संगठन के एक कार्यकर्ता ने कड़ाके की ठंड में विधायक निवास पर बैठकर अपना सिर मुंडवा लिया, जिससे मौके पर मौजूद लोगों का ध्यान इस मुद्दे की गंभीरता की ओर गया।
यह विरोध प्रदर्शन प्रदेश सरकार से फीस रेगुलेशन बिल लाने की मांग को लेकर किया गया।
ड्रेस और किताबों के नाम पर हो रहा शोषण
राष्ट्रीय छात्र पंचायत के राष्ट्रीय अध्यक्ष शिवम पांडेय ने बताया कि निजी स्कूल हर साल ड्रेस, किताबों और अन्य शुल्कों के नाम पर अभिभावकों का आर्थिक शोषण कर रहे हैं।
उन्होंने कहा—
“हम बच्चों और अभिभावकों की आवाज़ सरकार तक पहुंचाना चाहते हैं। इसी शोषण के खिलाफ हमने आज यह कठोर और भावनात्मक विरोध दर्ज कराया है।”
शिवम पांडेय ने बताया कि इससे पहले संगठन ने नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पांडे और उत्तर प्रदेश के 403 विधायकों को बादाम देकर पत्र लिखे थे, ताकि वे विधानसभा में इस मुद्दे को उठाएं, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
मुख्यमंत्री को भेजे गए एक लाख से अधिक पत्र
संगठन के सदस्य अमन बहादुर सिंह ने बताया कि राष्ट्रीय छात्र पंचायत ने अब तक मुख्यमंत्री को एक लाख से अधिक पत्र भेजे हैं। इसके अलावा, खून से लिखी चिट्ठियां, जिला स्तर पर प्रदर्शन और विभिन्न प्रतीकात्मक आंदोलन भी किए गए, लेकिन सरकार की ओर से अब तक केवल आश्वासन ही मिला है।
उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री आवास पर उन्हें 15 दिनों के भीतर मुख्यमंत्री से मुलाकात करवाकर फीस रेगुलेशन बिल सदन में लाने का आश्वासन दिया गया था, लेकिन वह भी पूरा नहीं हुआ।
मांगें न मानी गईं तो और बड़ा आंदोलन
अमन सिंह ने चेतावनी देते हुए कहा—
“अगर हमारी मांगें नहीं मानी गईं, तो हम इससे भी बड़ा और उग्र आंदोलन करेंगे। इसकी पूरी जिम्मेदारी उत्तर प्रदेश सरकार की होगी।”
इस प्रदर्शन के दौरान अमन बहादुर सिंह, हिमांशु तिवारी, अंकित वर्मा, प्रशांत वर्मा, अमन सिंह, अभय वर्मा और प्रियांशु सहित कई कार्यकर्ता मौजूद रहे। कार्यकर्ताओं ने स्पष्ट किया कि आने वाले दिनों में विरोध के तरीके और अधिक व्यापक हो सकते हैं।
निजी स्कूलों की बढ़ती फीस और अभिभावकों पर पड़ते आर्थिक बोझ को लेकर राष्ट्रीय छात्र पंचायत का यह अनोखा प्रदर्शन सरकार के लिए एक स्पष्ट संदेश है। सिर मुंडवाकर किया गया यह विरोध केवल प्रतीकात्मक नहीं, बल्कि शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और नियंत्रण की मांग का सशक्त रूप है। अब देखना होगा कि सरकार इस मुद्दे पर कब और क्या ठोस कदम उठाती है।



