उत्तर प्रदेश: के गोंडा जिले में एक ऐतिहासिक और प्रेरणादायक उपलब्धि सामने आई है। गाजियाबाद से अयोध्या और फिर अयोध्या से गोंडा तक स्केटिंग करते हुए 700 किलोमीटर की दूरी तय कर 11 वर्षीय युग नागर और 9 वर्षीय नंदिनी नागर ने वर्ल्ड बुक ऑफ रिकॉर्ड में अपना नाम दर्ज कराया है। दोनों सगे भाई-बहन हैं और उनकी यह उपलब्धि पूरे देश के लिए गर्व का विषय बन गई है।
8 दिन, 700 KM और अटूट हौसला
युग और नंदिनी ने 29 दिसंबर को गाजियाबाद से अपनी स्केटिंग यात्रा शुरू की थी। कठिन मौसम, लंबी दूरी और लगातार अभ्यास के दम पर दोनों ने 5 जनवरी को अयोध्या पहुंचकर अपनी चुनौतीपूर्ण यात्रा पूरी की। इसके बाद वे स्केटिंग करते हुए गोंडा पहुंचे, जहां इस उपलब्धि को भव्य रूप से मनाया गया।
सद्गुरु रितेश्वर महाराज को समर्पित किया रिकॉर्ड
इस वर्ल्ड रिकॉर्ड को दोनों बच्चों ने श्री आनंद धाम पीठाधीश्वर सद्गुरु रितेश्वर जी महाराज के 53वें जन्मोत्सव के अवसर पर उन्हें समर्पित किया। गोंडा जिले के नंदिनी निकेतन में आयोजित जन्मोत्सव कार्यक्रम में 50,000 से अधिक श्रद्धालु मौजूद रहे।
मंच पर पहुंचकर युग और नंदिनी ने महाराज को पुष्प अर्पित कर बधाई दी। सद्गुरु रितेश्वर महाराज ने कोई भौतिक उपहार स्वीकार नहीं किया, लेकिन बच्चों की इस उपलब्धि को “अनमोल उपहार” बताया।
दूसरा वर्ल्ड रिकॉर्ड, पहले भी रच चुके हैं इतिहास
यह युग और नंदिनी का दूसरा वर्ल्ड रिकॉर्ड है। इससे पहले शिवरात्रि के अवसर पर दोनों भाई-बहनों ने हरिद्वार से गाजियाबाद तक कांवड़ में जल लाकर इन्फ्लुएंसर बुक ऑफ रिकॉर्ड में अपना नाम दर्ज कराया था।
एक साल की मेहनत, मजबूत इरादा
युग नागर (कक्षा 6) और नंदिनी नागर (कक्षा 5) ने बताया कि वे पिछले एक साल से नियमित रूप से इनलाइन स्केटिंग का अभ्यास कर रहे हैं। उनके कोच के मार्गदर्शन और परिवार के सहयोग से ही यह उपलब्धि संभव हो पाई।
सद्गुरु रितेश्वर महाराज का संदेश
सद्गुरु रितेश्वर जी महाराज ने मंच से बच्चों को आशीर्वाद देते हुए कहा—
“यह स्केटिंग यात्रा सिर्फ एक खेल आयोजन नहीं, बल्कि संस्कार, स्वास्थ्य, शिक्षा और सनातन चेतना का जीवंत उदाहरण है। यह समाज के हर वर्ग को प्रेरित करेगी। आज इन्होंने जो मुझे जन्मदिन पर दिया है, वह अनमोल है और मैं जीवनभर इसका आभारी रहूंगा।”
महाराज ने युग और नंदिनी को प्रेरणास्रोत बताते हुए कहा कि ऐसे बच्चे देश का भविष्य हैं।
आशीर्वाद के साथ भावुक क्षण
उपलब्धि के बाद दोनों बच्चों ने सद्गुरु के चरणों में वर्ल्ड रिकॉर्ड का प्रमाणपत्र और मेडल रखकर आशीर्वाद लिया। मंच पर मौजूद श्रद्धालुओं ने तालियों से दोनों का उत्साह बढ़ाया।
युग नागर और नंदिनी नागर की यह उपलब्धि साबित करती है कि उम्र कभी सपनों की राह में बाधा नहीं बनती। अनुशासन, अभ्यास और सही मार्गदर्शन से बच्चे भी असाधारण इतिहास रच सकते हैं। यह वर्ल्ड रिकॉर्ड न सिर्फ खेल जगत के लिए बल्कि पूरे समाज के लिए प्रेरणा की मिसाल है।



