गोंडा: में आयोजित राष्ट्रकथा महोत्सव के चौथे दिन राजनीति, धर्म, लोकसंस्कृति और शक्ति प्रदर्शन का अनोखा संगम देखने को मिला। कैसरगंज से पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह ने श्रीआनंदम धाम पीठाधीश्वर सद्गुरु रितेश्वर जी महाराज को उनके जन्मदिन के अवसर पर करीब 20 लाख रुपए मूल्य की दुर्लभ ‘श्यामा गाय’ भेंट की।
20 लाख की श्यामा गाय, हरियाणा से लाई गई
हरियाणा से लाई गई काले रंग की इस दुर्लभ श्यामा गाय को देखकर सद्गुरु रितेश्वर महाराज भावुक हो उठे और उन्होंने गाय को दुलार किया। बृजभूषण ने स्पष्ट किया कि यह उपहार उनकी ओर से नहीं, बल्कि उनके एक मित्र की तरफ से भेजा गया है। उन्होंने कहा—
“श्यामा गाय बेहद दुर्लभ होती है, इसे ढूंढना आसान नहीं था।”
मंच पर गूंजा बृजभूषण का गीत
राष्ट्रकथा के दौरान बृजभूषण शरण सिंह नेता नहीं, बल्कि अवधी लोकगायक के रूप में नजर आए। जब मंच पर कलाकार “आज मिथिला नगरिया निहाल सखियां…” गा रहे थे, तब बृजभूषण ने माइक थाम लिया और पंक्तियां बदलते हुए गाया—
“आज नंदिनी नगरिया निहार सखियां…”
करीब 20 हजार श्रद्धालु उनके साथ गाने लगे और पूरा पंडाल तालियों से गूंज उठा।
बथुआ बना चर्चा का केंद्र
भंडारे में पनीर की जगह बथुआ का सकपहित्ता परोसा गया। इस पर बृजभूषण ने व्यंग्यात्मक अंदाज़ में कहा—
“बथुआ अब राष्ट्रीय ब्रांड हो गया है, इसे नेशनल फूड घोषित कर देना चाहिए।”
राष्ट्रकथा के बाद प्रतिदिन करीब 50 हजार लोगों को भंडारा कराया जा रहा है।
सिलसिलेवार पढ़िए राष्ट्रकथा के चौथे दिन की बड़ी बातें
1. पवन सिंह पहुंचे मंच पर, पैर छुए और भजन गाए
भोजपुरी स्टार पवन सिंह मंच पर पहुंचे और बृजभूषण शरण सिंह के पैर छूकर आशीर्वाद लिया। उन्होंने सद्गुरु रितेश्वर महाराज की आरती उतारी और—
- “शक्ति बढ़ लागल लक्ष्मण के रोवेली…”
- “देखकर राम को जनक नंदिनी…”
जैसे भजन गाए।
भक्त मोबाइल की फ्लैशलाइट जलाकर झूमते दिखे। मीडिया के सवालों पर पवन सिंह ने कहा—
“भगवान-भगवान करिए।”
2. कुश्ती स्टेडियम में दिखा दबदबा
देर रात बृजभूषण शरण सिंह, सद्गुरु रितेश्वर महाराज को लेकर नंदिनी नगर कुश्ती स्टेडियम पहुंचे। यहां गोंडा, नेपाल और अन्य राज्यों से आए पहलवानों ने दांव-पेंच दिखाए।
बृजभूषण ने तकनीकी टिप्स दिए, जबकि सद्गुरु ने खिलाड़ियों को अध्यात्म और सनातन पर मार्गदर्शन दिया।
नेशनल पदक विजेता ट्रेनर इमरान कालरी की टीम ने लाठी-गतका का प्रदर्शन किया, जिसने सभी को हैरान कर दिया।
3. ‘हमारा दबदबा तो रहेगा ही’ वाला बयान
स्टेडियम में अपने नेशनल पदक विजेता मालिश करने वाले खिलाड़ी और अपने नाई से सद्गुरु को मिलवाते हुए बृजभूषण ने कहा—
“जब नाऊ इतने तगड़े हैं, नेताजी का दबदबा तो रहेगा ही भैया।”
यह सुनकर सद्गुरु रितेश्वर महाराज जोर से हंसे और दोनों को आशीर्वाद दिया।
गोंडा की राष्ट्रकथा सिर्फ धार्मिक आयोजन नहीं रही, बल्कि यह राजनीतिक संदेश, लोकसंस्कृति, शक्ति प्रदर्शन और सामाजिक प्रभाव का बड़ा मंच बन गई। बृजभूषण शरण सिंह ने गीत, गाय, कुश्ती और संवाद के जरिए साफ संकेत दिया कि उनका प्रभाव और दबदबा आज भी कायम है—और शायद आगे भी रहेगा।



