टैक्स नहीं तो सैलरी नहीं: लखनऊ नगर निगम के 26 कर्मचारियों का वेतन रोका, नगर आयुक्त का सख्त संदेश

लखनऊ: लखनऊ नगर निगम में टैक्स कलेक्शन को लेकर लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों पर नगर आयुक्त गौरव कुमार ने सख्त कार्रवाई की है। नगर आयुक्त ने 7 जोनल अधिकारियों और 19 टैक्स सुपरिंटेंडेंट (TS) व राजस्व निरीक्षक (RI) का वेतन रोकने के निर्देश जारी किए हैं। कुल मिलाकर 26 कर्मचारियों की सैलरी रोकी गई है।

गुरुवार को नगर आयुक्त ने टैक्स कलेक्शन की अचानक वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए समीक्षा बैठक की। बैठक के दौरान कई अधिकारी देरी से जुड़े, जबकि कई कर्मचारी फील्ड में सक्रिय नहीं पाए गए। इसे गंभीर लापरवाही मानते हुए नगर आयुक्त ने संबंधित कर्मचारियों की सूची तैयार कर नोटिस जारी करने और वेतन रोकने का आदेश दिया।


प्रतिदिन 2 करोड़ टैक्स कलेक्शन का लक्ष्य

नगर आयुक्त गौरव कुमार ने बैठक में साफ कहा कि फिलहाल सभी जोन मिलकर प्रतिदिन लगभग 1 करोड़ रुपए का टैक्स कलेक्शन कर रहे हैं, जबकि लक्ष्य इसे 2 करोड़ रुपए प्रतिदिन तक पहुंचाने का है। उन्होंने कहा कि टैक्स कलेक्शन बढ़ाना नगर निगम की प्राथमिक जिम्मेदारी है और इसमें किसी भी तरह की ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी।


इस वित्तीय वर्ष में 62 करोड़ ज्यादा कलेक्शन, लेकिन लक्ष्य अब भी दूर

नगर आयुक्त ने जानकारी दी कि मौजूदा वित्तीय वर्ष में अभी तीन महीने शेष हैं। इस दौरान नगर निगम ने पिछले वर्ष की तुलना में अब तक 62 करोड़ रुपए अधिक टैक्स कलेक्शन किया है। हालांकि, उनका कहना है कि यह आंकड़ा 100 करोड़ रुपए से अधिक होना चाहिए था।

उन्होंने स्पष्ट किया कि इस लक्ष्य को हासिल करने की जिम्मेदारी सीधे जोनल अधिकारियों की है। हर जोनल अधिकारी को यह तय करना होगा कि उनके क्षेत्र में टैक्स कलेक्शन कैसे बढ़ाया जाएगा और किन कर्मचारियों की क्या जिम्मेदारी होगी।


टैक्स बढ़ेगा, तभी सैलरी मिलेगी

बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि जब तक संबंधित जोन में टैक्स कलेक्शन में सुधार नहीं होगा, तब तक जोनल अधिकारियों की सैलरी जारी नहीं की जाएगी। जिन जोनों के अधिकारियों का वेतन रोका गया है, उनमें जोन 1, 2, 3, 5, 6, 7 और 8 शामिल हैं।

नगर आयुक्त ने इन अधिकारियों को तुरंत फील्ड में उतरकर टैक्स कलेक्शन बढ़ाने और अधीनस्थ कर्मचारियों की जवाबदेही तय करने के निर्देश दिए हैं।

लखनऊ नगर निगम में टैक्स कलेक्शन को लेकर नगर आयुक्त का यह सख्त कदम स्पष्ट संकेत देता है कि अब लापरवाही पर सीधे कार्रवाई होगी। वेतन रोकने जैसे फैसले से कर्मचारियों पर दबाव बढ़ेगा और टैक्स कलेक्शन में तेजी आने की उम्मीद की जा रही है। आने वाले दिनों में नगर निगम के राजस्व लक्ष्य पूरे हो पाते हैं या नहीं, इस पर सभी की नजर रहेगी।

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