रोम: में भारत और इटली के रिश्तों ने एक नया और ऐतिहासिक मोड़ ले लिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी के बीच हुई अहम बैठक के बाद दोनों देशों ने अपने संबंधों को “स्पेशल स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप” के स्तर तक पहुंचाने का बड़ा ऐलान किया। इस फैसले को वैश्विक राजनीति और आर्थिक सहयोग के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है।
संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि भारत और इटली के बीच बढ़ती नजदीकियां सिर्फ कूटनीतिक औपचारिकता नहीं हैं, बल्कि दोनों देशों के साझा विजन और भरोसे का प्रतीक हैं। उन्होंने कहा कि पिछले साढ़े तीन वर्षों में प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी के साथ कई बार मुलाकात हुई है और इससे दोनों देशों के रिश्तों को नई गति मिली है।
पीएम मोदी ने कहा कि भारत और इटली अब अपने संबंधों को और ऊंचाई पर ले जाने के लिए तैयार हैं। उन्होंने टेक्नोलॉजी, इनोवेशन और रिसर्च को दोनों देशों की साझेदारी का मुख्य इंजन बताया। प्रधानमंत्री ने स्पष्ट किया कि आने वाले समय में दोनों देश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डिजिटल टेक्नोलॉजी, साइबर सिक्योरिटी और क्लीन एनर्जी जैसे क्षेत्रों में मिलकर काम करेंगे।
इस दौरान रक्षा क्षेत्र में सहयोग को लेकर भी बड़ा संकेत दिया गया। पीएम मोदी ने कहा कि भारत और इटली के बीच डिफेंस इंडस्ट्रियल रोडमैप पर तेजी से काम हो रहा है। इससे दोनों देशों के बीच को-डेवलपमेंट और को-प्रोडक्शन के नए अवसर खुलेंगे। विशेषज्ञों का मानना है कि यह साझेदारी भारत के रक्षा क्षेत्र को तकनीकी रूप से मजबूत करने में अहम भूमिका निभा सकती है।
प्रधानमंत्री मोदी ने समुद्री सहयोग पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि भारत और इटली दोनों समुद्री शक्ति वाले देश हैं, इसलिए कनेक्टिविटी, शिपिंग, बंदरगाह आधुनिकीकरण, लॉजिस्टिक्स और ब्लू इकोनॉमी जैसे क्षेत्रों में सहयोग स्वाभाविक है। भारत हिंद महासागर क्षेत्र में अपनी रणनीतिक स्थिति मजबूत करना चाहता है, जबकि इटली यूरोप के समुद्री व्यापार का अहम केंद्र है। ऐसे में दोनों देशों का सहयोग वैश्विक सप्लाई चेन को भी नई मजबूती दे सकता है।

वहीं इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी ने भारत-मध्य पूर्व-यूरोप आर्थिक कॉरिडोर यानी IMEC को लेकर बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि यह परियोजना भविष्य के वैश्विक व्यापार और कनेक्टिविटी का नया रास्ता बन सकती है। मेलोनी ने IMEC को आर्थिक विकास, ऊर्जा सहयोग और रणनीतिक स्थिरता के लिए बेहद महत्वपूर्ण बताया।
IMEC परियोजना को भारत, यूरोप और मध्य पूर्व के बीच व्यापारिक कनेक्टिविटी बढ़ाने की दिशा में ऐतिहासिक कदम माना जा रहा है। इससे माल ढुलाई का समय कम होगा और वैश्विक व्यापार को नई रफ्तार मिलेगी। भारत के लिए यह परियोजना चीन के बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव का मजबूत विकल्प मानी जा रही है।
राजनीतिक विशेषज्ञों के मुताबिक, भारत और इटली के बीच बढ़ती नजदीकियां यूरोप में भारत की रणनीतिक स्थिति को और मजबूत करेंगी। इटली यूरोपीय संघ का अहम सदस्य है और ऐसे में दोनों देशों की साझेदारी कई वैश्विक मंचों पर भारत को फायदा पहुंचा सकती है।
पीएम मोदी और मेलोनी की केमिस्ट्री भी अंतरराष्ट्रीय मीडिया में लगातार चर्चा का विषय बनी हुई है। G20 समिट से लेकर कई वैश्विक मंचों पर दोनों नेताओं की मुलाकातों ने भारत-इटली संबंधों को नई पहचान दी है। अब “स्पेशल स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप” की घोषणा ने यह साफ कर दिया है कि दोनों देश भविष्य में लंबे समय तक मजबूत सहयोग की दिशा में आगे बढ़ने वाले हैं।
विशेषज्ञ मानते हैं कि यह साझेदारी केवल व्यापार या रक्षा तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि शिक्षा, संस्कृति, पर्यटन और स्टार्टअप सेक्टर में भी नए अवसर पैदा करेगी। आने वाले समय में भारत और इटली के बीच कई बड़े समझौते देखने को मिल सकते हैं।
निष्कर्ष:
रोम में हुई मोदी-मेलोनी बैठक ने भारत और इटली के रिश्तों को नई ऊंचाई दे दी है। “स्पेशल स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप” का ऐलान यह दिखाता है कि दोनों देश केवल दोस्त नहीं, बल्कि भविष्य के मजबूत वैश्विक साझेदार बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। रक्षा, टेक्नोलॉजी, ब्लू इकोनॉमी और IMEC जैसे प्रोजेक्ट आने वाले वर्षों में इस रिश्ते को और मजबूत बना सकते हैं।

