दिल्ली: की सड़कों पर इन दिनों एक अलग ही नजारा देखने को मिल रहा है। राजधानी में चलने वाले कई ऑटो-रिक्शा पर अचानक अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बड़े-बड़े पोस्टर नजर आने लगे हैं। इन पोस्टरों में ट्रंप की तस्वीर के साथ अमेरिकी झंडा और “Happy Birthday America” लिखा हुआ है। इस अनोखे प्रचार अभियान ने लोगों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है और सोशल मीडिया पर भी इसकी जमकर चर्चा हो रही है।
दरअसल, अमेरिका अपनी स्वतंत्रता की 250वीं वर्षगांठ मना रहा है। इसी मौके पर भारत में अमेरिकी दूतावास ने दिल्ली में एक खास प्रचार अभियान शुरू किया है। इस अभियान का मकसद अमेरिका की आजादी के 250 साल पूरे होने का जश्न मनाना और लोगों तक सांस्कृतिक संदेश पहुंचाना बताया जा रहा है।
न्यूज एजेंसी AP की रिपोर्ट के मुताबिक, दिल्ली में करीब 100 ऑटो-रिक्शा ऐसे देखे गए हैं जिन पर डोनाल्ड ट्रंप की तस्वीर, स्टैच्यू ऑफ लिबर्टी और अमेरिकी झंडा लगा हुआ है। आमतौर पर दिल्ली के ऑटो-रिक्शा पर फर्टिलिटी क्लीनिक, इंग्लिश स्पीकिंग कोर्स, आयुर्वेदिक दवाइयों या स्थानीय राजनीतिक नेताओं के पोस्टर दिखाई देते हैं। लेकिन इस बार अमेरिकी राष्ट्रपति के पोस्टर ने लोगों को चौंका दिया।
इस पूरे अभियान की शुरुआत भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर के नेतृत्व में की गई है। अमेरिकी दूतावास ने कुछ दिन पहले सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर पोस्ट करते हुए लिखा था—“आजादी अब सड़कों पर उतर आई है… सचमुच!” इसके बाद दिल्ली की सड़कों पर ट्रंप के पोस्टर वाले ऑटो नजर आने लगे।
हालांकि, इस अभियान का सबसे दिलचस्प पहलू ऑटो-रिक्शा चालकों को दिया गया ऑफर है। रिपोर्ट के अनुसार, कई ड्राइवरों को अपने ऑटो पर यह पोस्टर लगाने के बदले “एक पैकेट चाय” देने की पेशकश की गई। यही वजह है कि यह खबर तेजी से वायरल हो गई और लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गई।
दिल्ली के एक ऑटो चालक गणेश कुमार ने बताया कि शुरुआत में उन्होंने पोस्टर लगाने से इनकार कर दिया था क्योंकि उन्हें समझ नहीं आ रहा था कि आखिर यह अभियान क्या है। लेकिन बाद में उनसे कहा गया कि “कृपया यह पोस्टर लगाने दीजिए, हम आपको चाय का एक पैकेट देंगे।” इसके बाद उन्होंने पोस्टर लगाने की अनुमति दे दी।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह केवल सांस्कृतिक प्रचार नहीं, बल्कि भारत और अमेरिका के रिश्तों को मजबूत करने की एक सॉफ्ट डिप्लोमैटिक रणनीति भी हो सकती है। पिछले कुछ समय में टैरिफ और व्यापारिक मुद्दों को लेकर भारत और अमेरिका के संबंधों में थोड़ी तल्खी देखी गई थी। ऐसे में अमेरिकी दूतावास का यह अभियान दोनों देशों के बीच सकारात्मक माहौल बनाने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि अमेरिका अक्सर दुनिया के अलग-अलग देशों में सांस्कृतिक कार्यक्रमों और प्रचार अभियानों के जरिए अपनी “सॉफ्ट पावर” को बढ़ावा देता है। दिल्ली का यह अभियान भी उसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। हालांकि कुछ लोग सोशल मीडिया पर सवाल उठा रहे हैं कि क्या किसी विदेशी नेता के पोस्टर भारतीय सड़कों पर इस तरह लगाए जाना उचित है।
वहीं दूसरी तरफ कई लोग इसे केवल एक सांस्कृतिक और प्रचारात्मक गतिविधि मान रहे हैं। उनका कहना है कि भारत में पहले भी कई अंतरराष्ट्रीय ब्रांड और देशों से जुड़े प्रचार अभियान चलते रहे हैं, इसलिए इसे राजनीतिक नजरिए से नहीं देखा जाना चाहिए।
दिल्ली की व्यस्त सड़कों पर ट्रंप के पोस्टर लगे ऑटो अब लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र बन चुके हैं। राहगीर इन ऑटो की तस्वीरें खींच रहे हैं और सोशल मीडिया पर शेयर कर रहे हैं। यही वजह है कि यह अनोखा कैंपेन अब अंतरराष्ट्रीय मीडिया तक में चर्चा का विषय बन गया है।
दिल्ली में डोनाल्ड ट्रंप के पोस्टर वाले ऑटो-रिक्शा केवल एक प्रचार अभियान नहीं, बल्कि अमेरिका की सॉफ्ट डिप्लोमेसी का हिस्सा माने जा रहे हैं। चाय के पैकेट के बदले ऑटो चालकों को जोड़ने वाली यह मुहिम लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गई है। इससे भारत-अमेरिका संबंधों और सांस्कृतिक कूटनीति को लेकर भी नई बहस शुरू हो गई है।

