Ganesh Chaturthi 2026 Puja Muhurat: बप्पा की स्थापना के लिए सिर्फ 48 मिनट का शुभ समय! जानें सही मुहूर्त, राहुकाल और पूजा का महत्व

नई दिल्ली। गणेश भक्तों के लिए साल का सबसे खास त्योहार आने वाला है। गणेश चतुर्थी 2026 के अवसर पर 14 सितंबर को देशभर में घरों, मंदिरों और सार्वजनिक पंडालों में भगवान गणेश की स्थापना की जाएगी। बप्पा के स्वागत को लेकर भक्तों में उत्साह है और लोग स्थापना के लिए शुभ मुहूर्त का इंतजार कर रहे हैं।

हिंदू धार्मिक मान्यताओं में गणेश चतुर्थी का विशेष महत्व माना जाता है। भगवान गणेश को प्रथम पूज्य और विघ्नहर्ता कहा जाता है। मान्यता है कि किसी भी शुभ कार्य से पहले गणेश जी की पूजा करने से कार्य में आने वाली बाधाएं दूर होती हैं।

ऐसे में गणेश चतुर्थी के दिन बप्पा की स्थापना और पूजा के लिए शुभ समय जानना भक्तों के लिए बेहद महत्वपूर्ण हो जाता है।

गणेश चतुर्थी 2026 पर कब होगी बप्पा की स्थापना?

दिए गए पंचांग विवरण के अनुसार 14 सितंबर 2026 को गणेश चतुर्थी के दिन दोपहर का समय भगवान गणेश की स्थापना के लिए विशेष शुभ माना गया है।

पंडित राकेश झा के अनुसार, धार्मिक मान्यता में भगवान गणेश का जन्म दोपहर के समय माना जाता है। इसी वजह से गणेश चतुर्थी पर दोपहर के समय गणेश जी की पूजा और स्थापना को विशेष महत्व दिया जाता है।

14 सितंबर को अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:52 बजे से दोपहर 12:41 बजे तक बताया गया है। यानी इस अवधि में कुल 49 मिनट का समय बनता है। इसलिए केवल “48 मिनट” कहने के बजाय स्थानीय पंचांग के अनुसार सटीक समय देखना बेहतर रहेगा।

इस अवधि में गणेश स्थापना और पूजा करने को शुभ माना गया है।

चित्रा नक्षत्र और ब्रह्म योग का भी संयोग

गणेश चतुर्थी के दिन केवल अभिजीत मुहूर्त ही नहीं, बल्कि अन्य ज्योतिषीय संयोगों का भी उल्लेख किया गया है।

दिए गए विवरण के अनुसार इस दिन चित्रा नक्षत्र दोपहर 1:55 बजे तक रहेगा। इसके अलावा ब्रह्म योग दोपहर 12:47 बजे तक रहने की बात कही गई है।

धार्मिक मान्यताओं में शुभ योग और नक्षत्रों को पूजा-पाठ के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। हालांकि, किसी व्यक्ति की व्यक्तिगत कुंडली या ग्रह स्थिति के आधार पर शुभ समय अलग हो सकता है।

सुबह भी कर सकते हैं गणेश स्थापना, लेकिन राहुकाल से बचें

अगर किसी कारण से भक्त दोपहर के अभिजीत मुहूर्त में गणेश जी की स्थापना नहीं कर पाते हैं, तो दिए गए विवरण के अनुसार सुबह भी बप्पा को विराजमान किया जा सकता है।

बताया गया है कि सुबह 7:07 बजे से चतुर्थी तिथि शुरू हो जाएगी। ऐसे में भक्त इस समय के बाद स्थापना कर सकते हैं।

लेकिन सुबह के समय एक खास बात का ध्यान रखना जरूरी है—राहुकाल।

14 सितंबर को राहुकाल सुबह 7:30 बजे से 9:01 बजे तक बताया गया है। धार्मिक मान्यता के अनुसार राहुकाल में शुभ कार्य करने से बचने की परंपरा है। इसलिए गणेश स्थापना करने वाले भक्त इस अवधि को छोड़कर शुभ समय चुन सकते हैं।

गणेश चतुर्थी पर क्यों की जाती है बप्पा की स्थापना?

गणेश चतुर्थी भगवान गणेश को समर्पित प्रमुख हिंदू त्योहारों में से एक है। धार्मिक मान्यता के अनुसार इसी दिन भगवान गणेश का जन्म हुआ था।

भक्त इस दिन गणेश जी की प्रतिमा को घर में लाकर विधि-विधान से स्थापित करते हैं। इसके बाद नियमित रूप से पूजा, आरती और भोग लगाया जाता है।

मान्यता है कि भगवान गणेश की आराधना करने से बुद्धि, ज्ञान और समृद्धि की प्राप्ति होती है तथा जीवन में आने वाली बाधाओं को दूर करने के लिए उनका आशीर्वाद मिलता है।

घर में बप्पा लाने से पहले इन बातों का रखें ध्यान

गणेश जी की स्थापना करने वाले भक्तों को पूजा स्थल की साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखना चाहिए। प्रतिमा स्थापित करने के बाद भगवान गणेश को फूल, दूर्वा, मोदक और अन्य पूजा सामग्री अर्पित करने की परंपरा है।

पूजा के दौरान भक्त अपनी श्रद्धा और सामर्थ्य के अनुसार पूजा-पाठ कर सकते हैं। सबसे महत्वपूर्ण बात आस्था और स्वच्छता मानी जाती है।

यदि किसी विशेष परंपरा, क्षेत्रीय पंचांग या परिवार की धार्मिक परंपरा के अनुसार पूजा की जाती है, तो उसी के अनुसार मुहूर्त और विधि का पालन करना उचित रहेगा।

गणेश चतुर्थी से अनंत चतुर्दशी तक बप्पा की पूजा

गणेश चतुर्थी के दिन स्थापना के बाद कई भक्त लगातार कई दिनों तक भगवान गणेश की पूजा करते हैं। इसके बाद अनंत चतुर्दशी के अवसर पर गणेश प्रतिमा का विसर्जन किया जाता है।

विसर्जन के दौरान भक्त बप्पा से अगले वर्ष फिर घर आने की कामना करते हैं। इसी के साथ गणेश उत्सव का समापन होता है।

गणेश उत्सव सिर्फ धार्मिक आयोजन ही नहीं, बल्कि परिवार और समाज को एक साथ जोड़ने वाला पर्व भी माना जाता है। घरों और सार्वजनिक पंडालों में पूजा, आरती और प्रसाद वितरण के जरिए लोग इस त्योहार को उत्साह के साथ मनाते हैं।

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