Shaktimaan: 400+ एपिसोड, 8 साल तक टीवी पर राज; 29 साल बाद भी क्यों कायम है मुकेश खन्ना के सुपरहीरो का जादू?

नई दिल्ली। 90 के दशक के बच्चों के लिए रविवार का दिन सिर्फ छुट्टी का दिन नहीं होता था, बल्कि उस दिन टीवी पर आने वाले एक खास सुपरहीरो का इंतजार भी रहता था। नाम था ‘शक्तिमान’। 13 सितंबर 1997 को दूरदर्शन पर शुरू हुए इस शो ने देखते ही देखते भारतीय टेलीविजन पर ऐसी पहचान बनाई, जिसे आज भी भुलाना आसान नहीं है।

आज ‘शक्तिमान’ को शुरू हुए 29 साल पूरे हो गए हैं। करीब तीन दशक बाद भी मुकेश खन्ना का यह किरदार 90 के दशक की यादों, भारतीय टीवी इतिहास और देश के पहले चर्चित देसी सुपरहीरो के तौर पर लोगों के बीच चर्चा में बना हुआ है।

जब भारत को मिला अपना देसी सुपरहीरो

आज बच्चों और युवाओं के बीच सुपरहीरो की दुनिया काफी बड़ी है। सुपरमैन, स्पाइडर-मैन, बैटमैन और आयरन मैन जैसे कई अंतरराष्ट्रीय किरदार लोकप्रिय हैं। लेकिन 90 के दशक में भारतीय टीवी दर्शकों के सामने ऐसा कोई बड़ा देसी सुपरहीरो नहीं था, जिससे बच्चे अपनी संस्कृति और परिवेश के स्तर पर जुड़ सकें।

ऐसे समय में ‘शक्तिमान’ आया।

शो की कहानी में शक्तिमान को एक ऐसे किरदार के रूप में पेश किया गया था, जो मानवता की रक्षा के लिए अपनी शक्तियों का इस्तेमाल करता है। भारतीय आध्यात्मिक परंपरा, ध्यान, साधना और पंचतत्वों जैसी अवधारणाओं ने इस किरदार को विदेशी सुपरहीरो से अलग पहचान दी।

यही देसी अंदाज ‘शक्तिमान’ की सबसे बड़ी ताकतों में से एक बना।

मुकेश खन्ना ने कैसे गढ़ा शक्तिमान?

शक्तिमान के किरदार और शो के निर्माण से मुकेश खन्ना का नाम गहराई से जुड़ा है। उस समय तक वह ‘महाभारत’ में भीष्म पितामह के किरदार से घर-घर में पहचान बना चुके थे।

लेकिन मुकेश खन्ना एक अलग तरह की पहचान बनाना चाहते थे। उनके विचार में भारतीय बच्चों के लिए ऐसा सुपरहीरो होना चाहिए, जो सिर्फ रोमांच और शक्तियों की कहानी न बताए, बल्कि अच्छे संस्कार और सकारात्मक संदेश भी दे।

इसी सोच से ‘शक्तिमान’ की कल्पना आगे बढ़ी। शो का निर्माण उनके प्रोडक्शन बैनर भीष्म इंटरनेशनल के तहत हुआ और इसके निर्देशन की जिम्मेदारी दिनकर जानी ने संभाली।

400 से ज्यादा एपिसोड और करीब 8 साल का सफर

‘शक्तिमान’ का पहला एपिसोड 13 सितंबर 1997 को प्रसारित हुआ था। शो का आखिरी एपिसोड 27 मार्च 2005 को टेलीकास्ट हुआ।

इस दौरान शो के 400 से ज्यादा एपिसोड प्रसारित हुए और करीब आठ वर्षों तक यह भारतीय टीवी दर्शकों के बीच अपनी मौजूदगी बनाए रहा।

यह आंकड़ा अपने आप में बताता है कि उस दौर में शो का प्रभाव कितना बड़ा था।

आज जहां दर्शकों के पास OTT प्लेटफॉर्म, सोशल मीडिया और सैकड़ों टीवी चैनल हैं, वहीं 90 के दशक में विकल्प सीमित थे। ऐसे में किसी एक शो का इतने लंबे समय तक दर्शकों के बीच लोकप्रिय बने रहना बड़ी उपलब्धि मानी जाती है।

मुकेश खन्ना का डबल रोल बना खास पहचान

‘शक्तिमान’ की एक और खासियत थी कि मुकेश खन्ना ने इसमें दो अलग-अलग किरदार निभाए।

एक तरफ वह शक्तिशाली और गंभीर सुपरहीरो ‘शक्तिमान’ के रूप में नजर आते थे, वहीं दूसरी तरफ उनका किरदार गंगाधर हास्य और आम इंसान वाली छवि के लिए जाना जाता था।

गंगाधर और शक्तिमान के बीच का अंतर शो की कहानी को और मनोरंजक बनाता था।

इसके अलावा शो के दूसरे किरदार भी दर्शकों के बीच काफी लोकप्रिय हुए। सुरेंद्र पाल का तमराज किलविश, वैष्णवी महंत की गीता विश्वास, टॉम ऑल्टर का महागुरु और ललित परिमू का डॉ. जैकाल जैसे किरदार आज भी ‘शक्तिमान’ के प्रशंसकों को याद हैं।

रविवार को टीवी के सामने बैठ जाते थे बच्चे

‘शक्तिमान’ की लोकप्रियता को आज के सोशल मीडिया ट्रेंड या OTT व्यूअरशिप के पैमाने से समझना मुश्किल है।

उस समय किसी टीवी शो की लोकप्रियता का अंदाजा इस बात से लगाया जाता था कि उसके प्रसारण के वक्त कितने घरों में टीवी के सामने लोग जमा हो जाते हैं।

‘शक्तिमान’ के प्रसारण के दौरान बच्चों का उत्साह देखते ही बनता था। कई परिवारों में टीवी देखने का समय शो के हिसाब से तय होता था। बच्चों के लिए शक्तिमान सिर्फ एक काल्पनिक किरदार नहीं, बल्कि उनके बचपन का हिस्सा बन गया था।

यही वजह है कि आज भी जब 90 के दशक के टीवी शो की बात होती है, तो ‘शक्तिमान’ का नाम सबसे पहले याद आने वाले कार्यक्रमों में शामिल होता है।

बच्चों ने की शक्तिमान बनने की कोशिश, उठे सवाल

शो की लोकप्रियता के साथ उसका एक विवादित पहलू भी सामने आया। कुछ बच्चों द्वारा शक्तिमान के स्टंट और उड़ने जैसी चीजों की नकल करने की खबरों ने उस समय चिंता पैदा की।

इसको लेकर बहस हुई कि क्या सुपरहीरो कार्यक्रमों का बच्चों पर प्रभाव पड़ रहा है और क्या उन्हें काल्पनिक शक्तियों की नकल करने से रोकने के लिए अतिरिक्त सावधानी की जरूरत है।

हालांकि, मुकेश खन्ना ने अलग-अलग मौकों पर यह स्पष्ट किया कि शो के बंद होने की वजह केवल बच्चों द्वारा स्टंट की नकल करना नहीं थी। उन्होंने इसके पीछे आर्थिक और प्रसारण से जुड़ी परिस्थितियों को भी महत्वपूर्ण कारण बताया।

29 साल बाद भी क्यों याद है शक्तिमान?

‘शक्तिमान’ की सबसे बड़ी उपलब्धि सिर्फ उसका लंबा प्रसारण या 400 से ज्यादा एपिसोड नहीं हैं। इसकी असली ताकत यह है कि इसने एक पूरी पीढ़ी के बचपन की यादों में जगह बनाई।

उस दौर में इंटरनेट और सोशल मीडिया नहीं था। फिर भी शक्तिमान के किरदार, उसके संवाद, गंगाधर का अंदाज और तमराज किलविश जैसे विलेन लोगों की बातचीत का हिस्सा बन गए थे।

आज भी जब 90 के दशक की यादों और पुराने टीवी कार्यक्रमों की चर्चा होती है, तो शक्तिमान का नाम तुरंत सामने आ जाता है।

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