मेरठ। उत्तर प्रदेश के चर्चित सौरभ राजपूत हत्याकांड में सुनवाई अब अंतिम बहस के दौर में पहुंच गई है। इसी बीच बचाव पक्ष ने अदालत में ऐसी दलील रखी है, जिस पर अब अभियोजन पक्ष का जवाब महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
मुस्कान और साहिल की ओर से पेश बचाव पक्ष के वकील ने दलील दी कि सौरभ की हत्या करते हुए आरोपियों को किसी ने प्रत्यक्ष रूप से नहीं देखा। बचाव पक्ष का कहना है कि घटना का कोई चश्मदीद गवाह नहीं है और इसलिए अभियोजन की कहानी को साक्ष्यों के आधार पर कड़ी कसौटी पर परखा जाना चाहिए।
हालिया रिपोर्टों के मुताबिक, जिला जज की अदालत में अभियोजन पक्ष की अंतिम बहस पहले ही पूरी हो चुकी है और अब बचाव पक्ष अपनी दलीलें रख रहा है।
बचाव पक्ष ने चश्मदीद गवाह को बनाया आधार
अदालत में बचाव पक्ष ने कथित तौर पर इस बात पर जोर दिया कि वारदात के समय साहिल शुक्ला को सौरभ और मुस्कान के घर जाते हुए किसी ने नहीं देखा।
बचाव पक्ष के अनुसार, केवल परिस्थितिजन्य साक्ष्यों के आधार पर किसी आरोपी को दोषी ठहराने से पहले अदालत को यह देखना होगा कि सभी कड़ियां आपस में किस तरह जुड़ती हैं।
इससे पहले भी बचाव पक्ष पुलिस की जांच और घटनाक्रम की टाइमलाइन पर सवाल उठा चुका है। जुलाई 2026 में बचाव पक्ष ने FIR में दर्ज समय और कथित घटना के समय के बीच अंतर होने का मुद्दा भी अदालत में उठाया था।
हालांकि, बचाव पक्ष की ये दलीलें अदालत के सामने रखे गए तर्क हैं, अंतिम न्यायिक निष्कर्ष नहीं।
अभियोजन पक्ष ने गवाहों और बरामदगी पर दिया जोर
दूसरी ओर, अभियोजन पक्ष का कहना है कि मामले में गवाहों के बयान और जांच के दौरान सामने आए साक्ष्य महत्वपूर्ण हैं।
अभियोजन पक्ष पहले ही अपनी अंतिम बहस पूरी कर चुका है। अगस्त में अभियोजन की ओर से कुछ गवाहों को अतिरिक्त सवालों के लिए बुलाने का अनुरोध भी किया गया था, जिस पर बचाव पक्ष ने आपत्ति दर्ज कराई थी।
यानी अब अदालत के सामने दोनों पक्षों के तर्कों और उपलब्ध साक्ष्यों का मूल्यांकन महत्वपूर्ण होगा।

3 मार्च 2025 को सामने आया था मामला
यह मामला 3 मार्च 2025 को मेरठ के ब्रह्मपुरी क्षेत्र से जुड़ा है। सौरभ राजपूत की मौत के बाद पुलिस जांच में उसकी पत्नी मुस्कान और साहिल शुक्ला के नाम सामने आए थे।
पुलिस ने दोनों को गिरफ्तार किया था और तभी से यह मामला अदालत में विचाराधीन है। दोनों आरोपियों ने अप्रैल 2026 में अदालत में अपने ऊपर लगे आरोपों से इनकार किया था। अदालत में पूछे गए सवालों के जवाब में दोनों ने सौरभ की हत्या और शव को ड्रम में रखने के आरोपों को नकारा था।
नीले ड्रम से जुड़ा मामला क्यों बना सुर्खियों में?
मामले की जांच के दौरान पुलिस ने एक ड्रम से सौरभ का शव बरामद करने की बात कही थी। इसी वजह से यह केस देशभर में ‘नीला ड्रम हत्याकांड’ के नाम से चर्चित हो गया।
मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए पुलिस सुरक्षा के बीच आरोपियों को अदालत में पेश किया जाता रहा है। हालांकि, मामले में लगाए गए आरोपों और पुलिस की जांच के निष्कर्षों का अंतिम न्यायिक मूल्यांकन अभी अदालत को करना है।
मुस्कान और साहिल के संबंधों को लेकर क्या सामने आया?
पुलिस के अनुसार, सौरभ और मुस्कान ने 2016 में प्रेम विवाह किया था। बाद में सौरभ काम के सिलसिले में विदेश गया था। इसी दौरान पुलिस जांच में मुस्कान और साहिल की नजदीकी का दावा सामने आया।
साहिल और मुस्कान के बारे में यह भी सामने आया कि दोनों पहले एक ही स्कूल में पढ़े थे। हालांकि, इन व्यक्तिगत संबंधों की पूरी भूमिका और हत्या से उनका संबंध अदालत में पेश किए गए साक्ष्यों के आधार पर ही तय होगा।
मोबाइल लोकेशन और दूसरे साक्ष्य भी जांच का हिस्सा
मामले की जांच में मोबाइल फोन से जुड़ी जानकारी को भी महत्वपूर्ण साक्ष्य के रूप में देखा गया था। पुलिस ने दोनों आरोपियों के मोबाइल की लोकेशन का नक्शा तैयार कर केस डायरी में शामिल किए जाने की बात कही थी। मोबाइल डेटा को फोरेंसिक जांच के लिए भी भेजा गया था।
ऐसे मामलों में अदालत केवल यह नहीं देखती कि कोई प्रत्यक्षदर्शी मौजूद था या नहीं, बल्कि उपलब्ध परिस्थितिजन्य साक्ष्यों और उनकी आपसी कड़ियों का भी न्यायिक परीक्षण किया जाता है।
अब अभियोजन के जवाब पर नजर
बचाव पक्ष की दलीलों के बाद अब अभियोजन पक्ष की ओर से जवाब दिया जाना है। इसके बाद अदालत मामले में उपलब्ध साक्ष्यों, गवाहियों और दोनों पक्षों की अंतिम दलीलों पर विचार करेगी।
मामले में फैसला कब आएगा, यह अदालत की आगे की कार्यवाही पर निर्भर करेगा। फिलहाल यह कहना उचित नहीं होगा कि बचाव पक्ष की किसी एक दलील से मामले का अंतिम परिणाम तय हो गया है।



