लखनऊ। मोबाइल फोन की बकाया EMI की वसूली को लेकर लखनऊ के निगोहां थाना क्षेत्र से एक बेहद गंभीर मामला सामने आया है। आरोप है कि मोबाइल की किस्त न चुका पाने पर कुछ लोगों ने एक युवक को उसके गांव से जबरन अपने साथ ले जाकर कई दिनों तक बंधक बनाए रखा। परिजनों का दावा है कि इस दौरान युवक के साथ मारपीट की गई, उससे जबरन काम कराया गया और उसे अस्पताल ले जाकर एक यूनिट खून भी निकलवाया गया।
मामले की शिकायत मिलने के बाद निगोहां पुलिस ने नामजद आरोपी और उसके दो अज्ञात साथियों के खिलाफ FIR दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस अब आरोपों की पुष्टि के लिए घटनाक्रम से जुड़े सभी पहलुओं की जांच कर रही है।
दो महीने बाद ही छीन लिया गया था मोबाइल
पीड़ित युवक की पहचान नेवल कुमार के रूप में हुई है। उसके भाई राजकुमार के मुताबिक, करीब एक साल पहले नेवल ने निगोहां स्थित एक मोबाइल दुकान से किस्त पर फोन खरीदा था।
परिवार का आरोप है कि मोबाइल खरीदने के करीब दो महीने बाद जब नेवल एक किस्त जमा नहीं कर पाया तो दुकान और कंपनी से जुड़े लोग उसके पास पहुंचे और मोबाइल वापस ले गए। कथित तौर पर उस समय कहा गया था कि बकाया किस्त जमा करने के बाद फोन वापस कर दिया जाएगा।
परिजनों के मुताबिक, मोबाइल वापस लिए जाने के बाद नेवल ने मान लिया कि अब फोन उसके पास है ही नहीं, इसलिए आगे किस्त चुकाने का सवाल नहीं है।
इसके बाद काफी समय तक कोई विवाद सामने नहीं आया।
8 सितंबर को घर से ले जाने का आरोप
पीड़ित के भाई राजकुमार का आरोप है कि 6 और 7 सितंबर को शुभम सिंह नाम का एक युवक उनके घर के आसपास आया और जानकारी लेने की कोशिश की।
इसके बाद 8 सितंबर को शुभम कथित तौर पर एक अन्य व्यक्ति के साथ बाइक से उनके घर पहुंचा। आरोप है कि नेवल को यह कहकर अपने साथ चलने को कहा गया कि दुकान पर चलकर मोबाइल की बात सुलझा ली जाएगी।
परिवार का दावा है कि नेवल उनके साथ चला गया, लेकिन उसे दुकान ले जाने के बजाय लखनऊ ले जाया गया।
यहीं से मामला गंभीर हो गया।
अस्पताल ले जाकर खून निकलवाने का आरोप
परिजनों के मुताबिक, नेवल को लखनऊ के एक अस्पताल ले जाया गया, जहां उस पर दबाव बनाकर एक यूनिट खून निकलवाया गया।
इस आरोप की पुलिस जांच कर रही है। फिलहाल यह भी स्पष्ट होना बाकी है कि अस्पताल में युवक को किस उद्देश्य से ले जाया गया था और वहां किस परिस्थिति में रक्त लिया गया।
पुलिस जांच में अस्पताल से जुड़े रिकॉर्ड, CCTV और अन्य उपलब्ध साक्ष्यों की भी भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है।

कमरे में बंधक बनाने और काम कराने का आरोप
परिवार का आरोप है कि अस्पताल से ले जाने के बाद नेवल को लखनऊ स्थित एक कमरे में रखा गया। परिजनों के मुताबिक, वहां उसे बाहर जाने की अनुमति नहीं दी गई और उससे कथित तौर पर जबरन काम भी कराया गया।
अगले दिन यानी 9 सितंबर को नेवल से उसके भाई को फोन करवाया गया।
परिवार के अनुसार, आरोपियों ने पहले करीब ₹2,600 की मांग की। इसके बाद आने-जाने के खर्च समेत कुल ₹2,799 ऑनलाइन ट्रांसफर किए गए।
लेकिन आरोप है कि पैसे मिलने के बाद भी नेवल को तत्काल नहीं छोड़ा गया।
₹12,500 की और मांग का आरोप
परिजनों के मुताबिक, उसी रात नेवल के साथ कथित तौर पर गाली-गलौज और मारपीट की गई। आरोप है कि उससे कहा गया कि जब तक ₹12,500 और नहीं दिए जाते, तब तक उसे नहीं छोड़ा जाएगा।
परिवार का कहना है कि इस घटना से वे बेहद डर गए और उन्होंने मामले की जानकारी निगोहां पुलिस को दी।
हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है। पुलिस जांच के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि युवक को किन परिस्थितियों में रखा गया था और पैसे की मांग किस उद्देश्य से की गई थी।
शिकायत के बाद दबाव बढ़ा तो युवक को भेजा घर
परिवार के अनुसार, 12 सितंबर को राजकुमार निगोहां थाने पहुंचा और पुलिस को पूरी घटना की जानकारी दी।
शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने आरोपियों से संपर्क करने की कोशिश की। परिवार का दावा है कि पुलिस की कार्रवाई का दबाव बढ़ने के बाद आरोपी घबरा गए।
आरोपियों ने खुद नेवल को घर पहुंचाने के बजाय लखनऊ से एक रैपिडो बाइक बुक की और उसे उस पर बैठाकर निगोहां भेज दिया।
इसके बाद नेवल अपने घर पहुंचा। परिवार का दावा है कि उसके शरीर पर चोट के निशान भी दिखाई दिए।
पुलिस ने दर्ज की FIR
पीड़ित की मां जदुराई की लिखित शिकायत के आधार पर निगोहां पुलिस ने नामजद आरोपी शुभम सिंह और उसके दो अज्ञात साथियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है।
FIR में धारा 143(3), 146, 127(3) और 115(2) के तहत कार्रवाई की गई है। शिकायत में युवक को कथित तौर पर जबरन ले जाने, बंधक बनाने, मारपीट, अस्पताल ले जाकर जबरन रक्त निकलवाने, काम कराने और परिजनों से पैसे मांगने जैसे गंभीर आरोप लगाए गए हैं।
मुकदमा दर्ज होने के बाद पुलिस ने आरोपियों की तलाश शुरू कर दी है।
मोबाइल EMI वसूली के तरीके पर उठे सवाल
यह मामला केवल एक परिवार की शिकायत तक सीमित नहीं है। इसने मोबाइल और अन्य सामान की EMI वसूली के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले तरीकों पर भी सवाल खड़े किए हैं।
अगर जांच में आरोप सही पाए जाते हैं, तो किसी बकाया भुगतान की वसूली के लिए किसी व्यक्ति को जबरन ले जाना, बंधक बनाना या उसके साथ हिंसा करना गंभीर आपराधिक मामला बन सकता है।
किसी भी वित्तीय विवाद को कानूनी और निर्धारित प्रक्रिया के तहत सुलझाया जाना चाहिए।
अब पुलिस जांच पर टिकी नजर
फिलहाल पुलिस के सामने सबसे बड़ी चुनौती आरोपों की सच्चाई तक पहुंचना है। इसके लिए आरोपियों से पूछताछ, अस्पताल के रिकॉर्ड, CCTV फुटेज, ऑनलाइन भुगतान से जुड़े रिकॉर्ड और मोबाइल फोन की जानकारी महत्वपूर्ण साक्ष्य हो सकते हैं।
साथ ही पुलिस यह भी जांच करेगी कि युवक को वास्तव में कहां रखा गया था, अस्पताल में क्या हुआ और पैसे की मांग किस आधार पर की गई।



