दिल्ली में 12 अक्टूबर 2026 को विपक्षी दलों के मार्च की तस्वीरों और वीडियो में एक युवा चेहरा लगातार नजर आया। कांग्रेस नेता राहुल गांधी के साथ दिखाई देने वाली इस छात्रा का नाम जन्नत बिश्नोई है। चुनावी प्रक्रिया और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर निकाले गए मार्च के दौरान उनकी मौजूदगी ने लोगों का ध्यान खींचा। इसके बाद सवाल उठने लगा कि जन्नत बिश्नोई कौन हैं और छात्र राजनीति में उनकी क्या भूमिका है?
उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक, जन्नत बिश्नोई दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ (DUSU) की एग्जीक्यूटिव काउंसलर हैं। वह नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ इंडिया (NSUI) से भी जुड़ी हुई हैं, जो कांग्रेस का छात्र संगठन है। जन्नत दिल्ली विश्वविद्यालय के श्यामा प्रसाद मुखर्जी कॉलेज में बीए की दूसरे वर्ष की छात्रा बताई गई हैं। उनका संबंध राजस्थान से है और वह दिल्ली में कैंपस राजनीति तथा छात्र आंदोलनों में सक्रिय रही हैं।
DUSU और NSUI से जुड़ाव
जन्नत बिश्नोई की पहचान केवल मार्च के दौरान राहुल गांधी के साथ दिखाई देने तक सीमित नहीं है। रिपोर्टों के अनुसार, वह दिल्ली विश्वविद्यालय के छात्र प्रतिनिधित्व से जुड़ी गतिविधियों में हिस्सा लेती रही हैं। DUSU में एग्जीक्यूटिव काउंसलर की भूमिका के तहत छात्र समुदाय से जुड़े मुद्दों और कैंपस की गतिविधियों में उनकी भागीदारी बताई गई है।
NSUI से जुड़ाव के कारण उनका संबंध कांग्रेस के छात्र संगठन से भी है। छात्र संगठनों की राजनीति में शिक्षा, कैंपस सुविधाओं, सुरक्षा और छात्र अधिकारों जैसे मुद्दे अक्सर प्रमुख रहते हैं। जन्नत भी छात्र आंदोलनों और सार्वजनिक अभियानों में भाग लेती रही हैं।
हालांकि, उनके राजनीतिक भविष्य या कांग्रेस में किसी संभावित बड़ी भूमिका को लेकर कोई निष्कर्ष निकालना अभी जल्दबाजी होगी। फिलहाल उपलब्ध जानकारी उनकी छात्र राजनीति और कैंपस से जुड़ी सक्रियता पर केंद्रित है।
कैंपस में महिलाओं की सुरक्षा को लेकर सक्रियता
जन्नत बिश्नोई की गतिविधियों में महिलाओं की सुरक्षा से जुड़े मुद्दे भी शामिल बताए गए हैं। रिपोर्टों के मुताबिक, उन्होंने कॉलेज और विश्वविद्यालय परिसर में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने की मांग उठाई है। इनमें CCTV कैमरों का नेटवर्क बढ़ाने और पिंक पुलिस बूथ जैसी सुविधाओं की मांग शामिल है।
महिलाओं की सुरक्षा का मुद्दा दिल्ली के कॉलेजों और सार्वजनिक स्थानों पर समय-समय पर चर्चा में रहा है। छात्र संगठनों और सामाजिक समूहों की ओर से सुरक्षा व्यवस्था, शिकायतों पर कार्रवाई और सहायता तंत्र को मजबूत करने की मांग उठाई जाती रही है।
जन्नत की सार्वजनिक गतिविधियों से यह संकेत मिलता है कि वह कैंपस से जुड़े मुद्दों पर अपनी बात रखती रही हैं। हालांकि, उनकी ओर से उठाई गई प्रत्येक मांग पर प्रशासन ने क्या कदम उठाए, इस बारे में विस्तृत और स्वतंत्र रूप से पुष्ट जानकारी उपलब्ध नहीं है।
पर्यावरण और सामाजिक मुद्दों पर भी भागीदारी
रिपोर्टों में जन्नत की पर्यावरण से जुड़ी गतिविधियों का भी उल्लेख किया गया है। वह राजस्थान में पेड़ों की सुरक्षा से संबंधित अभियान में हिस्सा ले चुकी हैं। इसके अलावा, उनके सोशल मीडिया अकाउंट पर छात्र आंदोलनों और NSUI के कार्यक्रमों से जुड़े वीडियो भी बताए गए हैं।
उनकी सक्रियता से पता चलता है कि उनकी सार्वजनिक भागीदारी केवल विश्वविद्यालय की राजनीति तक सीमित नहीं रही है। महिलाओं की सुरक्षा, छात्र मुद्दों और पर्यावरण जैसे विषयों पर उनकी मौजूदगी दर्ज की गई है।
फिर भी, सोशल मीडिया पर किसी कार्यक्रम में दिखाई देना और किसी अभियान की औपचारिक नेतृत्वकर्ता होना अलग-अलग बातें हैं। इसलिए जन्नत की भूमिका को लेकर उपलब्ध तथ्यों और सार्वजनिक गतिविधियों के आधार पर ही बात करना उचित होगा।
राहुल गांधी के साथ सुप्रीम कोर्ट मार्च क्यों निकाला गया?
12 अक्टूबर को राहुल गांधी और विपक्षी दलों के नेताओं ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) तथा कथित चुनावी अनियमितताओं को लेकर सुप्रीम कोर्ट की ओर मार्च किया। विपक्ष का आरोप है कि मतदाता सूची में बड़े पैमाने पर नाम हटाए जाने की प्रक्रिया की स्वतंत्र जांच और पारदर्शिता जरूरी है। चुनावी प्रक्रिया से जुड़े इन आरोपों पर संबंधित संस्थाओं का पक्ष और न्यायिक प्रक्रिया भी महत्वपूर्ण है।
मार्च में कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों के नेताओं के साथ छात्र कार्यकर्ता और दूसरे राजनीतिक-सामाजिक समूहों से जुड़े लोग भी शामिल हुए। इस दौरान जन्नत बिश्नोई राहुल गांधी के पास दिखाई दीं। मार्च के बाद विपक्ष की ओर से चुनावी प्रक्रिया से संबंधित मांगों को लेकर कानूनी कदम उठाए जाने की जानकारी भी सामने आई।
यह स्पष्ट करना जरूरी है कि मतदाता सूची में कथित अनियमितताओं को लेकर विपक्ष द्वारा लगाए गए आरोप अपने आप में साबित तथ्य नहीं हैं। इनकी जांच और संबंधित पक्षों के जवाब के आधार पर ही पूरे मामले का निष्कर्ष निकाला जा सकता है।
क्या जन्नत बिश्नोई आगे राष्ट्रीय राजनीति में नजर आएंगी?
राहुल गांधी के साथ मार्च में दिखाई देने के बाद जन्नत बिश्नोई की पहचान व्यापक स्तर पर चर्चा में आई है। छात्र राजनीति में सक्रिय युवा कार्यकर्ताओं को बड़े राजनीतिक कार्यक्रमों में भाग लेने का अवसर मिलता है, लेकिन इससे अपने आप किसी बड़े पद या राष्ट्रीय राजनीतिक भूमिका की पुष्टि नहीं होती।
फिलहाल जन्नत की सार्वजनिक पहचान DUSU की एग्जीक्यूटिव काउंसलर, NSUI सदस्य और छात्र कार्यकर्ता के रूप में है। आने वाले समय में उनकी गतिविधियां किस दिशा में जाती हैं, यह उनके आगे के काम और सार्वजनिक भूमिका से स्पष्ट होगा।



