नई दिल्ली: देश में डिजिटल भुगतान करने वाले करोड़ों लोगों और UPI के जरिए कारोबार करने वाले दुकानदारों के लिए एक अहम अपडेट सामने आया है। यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) के कुछ बड़े मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लागू करने की प्रस्तावित तारीख आगे बढ़ा दी गई है। यह व्यवस्था पहले 15 अक्टूबर 2026 से लागू होने वाली थी, लेकिन अब इसे दिवाली के बाद शुरू करने की बात कही गई है। इससे कारोबारियों और पेमेंट कंपनियों को तैयारी के लिए अतिरिक्त समय मिल सकता है।
हालांकि, यहां एक महत्वपूर्ण बात समझना जरूरी है। MDR व्यवस्था को जनवरी 2027 से लागू किए जाने की चर्चा पहले सामने आई थी, लेकिन 13 अक्टूबर 2026 की ताजा जानकारी के मुताबिक नई लागू होने की तारीख अलग से घोषित की जानी है। इसलिए यह कहना अभी जल्दबाजी होगी कि सरकार ने इसे आधिकारिक तौर पर 2027 तक बढ़ा दिया है।
क्या है MDR और UPI पर इसे लागू करने की जरूरत क्यों पड़ी?
MDR यानी मर्चेंट डिस्काउंट रेट वह शुल्क है, जो किसी व्यापारी के डिजिटल भुगतान स्वीकार करने पर भुगतान व्यवस्था से जुड़े संस्थानों के बीच तय नियमों के अनुसार वितरित किया जाता है। इसमें बैंक और भुगतान सेवा से जुड़े अन्य पक्ष शामिल हो सकते हैं।
अब तक UPI के जरिए भुगतान करना आम ग्राहकों और बड़ी संख्या में कारोबारियों के लिए बेहद सुविधाजनक रहा है। खासकर छोटी दुकानों, सब्जी विक्रेताओं, किराना कारोबारियों, रेस्तरां और स्थानीय बाजारों में QR कोड से भुगतान रोजमर्रा का हिस्सा बन चुका है।
नई व्यवस्था के तहत चुनिंदा बड़े मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर MDR लागू करने का प्रावधान किया गया है। इसका उद्देश्य डिजिटल भुगतान के बुनियादी ढांचे को बनाए रखने और उससे जुड़े खर्चों के लिए भुगतान व्यवस्था में आर्थिक समर्थन उपलब्ध कराना बताया गया है। हालांकि, इस बदलाव को लेकर कारोबारियों के बीच लागत बढ़ने की आशंका भी रही है।
₹2,000 से अधिक के UPI पेमेंट पर क्या बदलेगा?
प्रस्तावित ढांचे में ₹2,000 से अधिक के कुछ मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर 0.4 प्रतिशत MDR की दर सामने आई है। कुछ बड़े ट्रांजैक्शन के लिए शुल्क की अधिकतम सीमा का भी उल्लेख किया गया है। लेकिन यह शुल्क सभी UPI भुगतानों पर लागू नहीं होगा।
सबसे अहम बात यह है कि दो व्यक्तियों के बीच होने वाले सामान्य UPI ट्रांसफर यानी P2P लेनदेन पर शुल्क लगाने की बात नहीं है। इसी तरह ₹2,000 तक के मर्चेंट भुगतान और शून्य-MDR व्यवस्था के अंतर्गत आने वाले छोटे कारोबारियों के लेनदेन को भी राहत दी गई है।
सरकार की ओर से सितंबर 2026 में दी गई जानकारी के मुताबिक, लगभग 96 प्रतिशत मर्चेंट UPI ट्रांजैक्शन इस बदलाव से अप्रभावित रहने की उम्मीद है। इसका मतलब है कि सामान्य खरीदारी और रोजमर्रा के अधिकांश डिजिटल भुगतान पहले की तरह बिना MDR के जारी रह सकते हैं।

दुकानदारों को क्यों मिली राहत?
दिवाली और उसके आसपास के त्योहारों के दौरान बाजारों में खरीदारी, ऑनलाइन भुगतान और कारोबार में तेजी आती है। ऐसे समय में भुगतान व्यवस्था में अचानक बदलाव होने से दुकानदारों और भुगतान सेवा प्रदाताओं को तकनीकी तथा व्यावसायिक स्तर पर तैयारी करनी पड़ सकती है।
MDR लागू होने की तारीख आगे बढ़ने से कारोबारियों को नए नियमों को समझने, अपने भुगतान सिस्टम की समीक्षा करने और संबंधित बैंकों या भुगतान सेवा प्रदाताओं से जानकारी लेने का अतिरिक्त समय मिल सकता है।
छोटे व्यापारियों के लिए यह इसलिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि डिजिटल भुगतान उनकी रोजमर्रा की बिक्री का बड़ा हिस्सा बन चुका है। हालांकि, वास्तविक राहत इस बात पर निर्भर करेगी कि अंतिम नियम क्या होंगे और किसी विशेष व्यापारी की श्रेणी में कौन-से लेनदेन शामिल किए जाएंगे।
क्या ग्राहकों को अब UPI पेमेंट पर पैसे देने होंगे?
फिलहाल ग्राहकों के लिए सबसे अहम सवाल यही है कि क्या UPI से भुगतान करने पर अतिरिक्त पैसा देना पड़ेगा। उपलब्ध सरकारी स्पष्टीकरण के मुताबिक, उपभोक्ताओं से सामान्य UPI लेनदेन पर सीधे ट्रांजैक्शन चार्ज लेने की व्यवस्था घोषित नहीं की गई है। MDR मुख्य रूप से व्यापारी और भुगतान व्यवस्था से जुड़े पक्षों के बीच लागू होने वाला शुल्क है।
इसका अर्थ यह नहीं है कि हर स्थिति में भविष्य के सभी नियम समान रहेंगे। ग्राहकों को किसी भी संभावित बदलाव के लिए आधिकारिक दिशानिर्देश देखने चाहिए। दुकानदार भी अपने बैंक या भुगतान सेवा प्रदाता से स्पष्ट कर सकते हैं कि उनकी श्रेणी में कौन-से भुगतान शुल्क के दायरे में आएंगे।
क्या जनवरी 2027 से लागू होगा नया नियम?
MDR लागू करने की तारीख को जनवरी 2027 तक आगे बढ़ाए जाने की संभावना पर पहले रिपोर्टें सामने आई थीं। अब ताजा अपडेट में इतना स्पष्ट है कि 15 अक्टूबर से प्रस्तावित शुरुआत टल गई है और नई तारीख की घोषणा बाद में की जाएगी। इसलिए जनवरी 2027 को अभी अंतिम और आधिकारिक तारीख मानना सही नहीं होगा।
कारोबारियों को सलाह है कि वे सोशल मीडिया पर प्रसारित अधूरी जानकारी के आधार पर कोई निर्णय न लें। अंतिम तारीख, शुल्क की दर और लागू होने वाली कारोबारी श्रेणियों की पुष्टि संबंधित आधिकारिक घोषणा से ही करें।



