श्रावस्ती/गोंडा : उत्तर प्रदेश के श्रावस्ती और गोंडा जिलों में पिछले 24 घंटे में हुई अचानक तेज बारिश और तेज हवाओं ने किसानों की मेहनत पर पानी फेर दिया है। कटाई के लिए तैयार गेहूं की फसल खेतों में गिर गई है, जिससे फसल के सड़ने और उत्पादन में भारी कमी की आशंका जताई जा रही है।
गिरी फसल, चिंता में किसान
खेतों में खड़ी पकी हुई गेहूं की बालियों को बारिश और तेज हवाओं ने जमीन पर बिछा दिया।
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इससे नमी के कारण बालियों में सड़न शुरू हो सकती है।
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कई जगहों पर पानी भर गया है, जिससे फसल को खड़ा करना मुश्किल हो गया है।
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कटाई और थ्रेसिंग की प्रक्रिया पर असर पड़ा है।
कहां-कहां हुआ नुकसान?
श्रावस्ती जिले के जमुनहा, इकौना, सिरसिया, भिनगा क्षेत्र में
गोंडा जिले के करनैलगंज, तरबगंज, परसपुर, मनकापुर और वजीरगंज इलाकों में किसानों ने भारी नुकसान की जानकारी दी है।
किसानों की मांग: सर्वे कराए सरकार, मिले मुआवजा
किसानों ने प्रशासन से मांग की है कि:
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तुरंत क्षेत्रीय लेखपालों के माध्यम से नुकसान का सर्वे कराया जाए
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फसल बीमा और आपदा राहत कोष के तहत मुआवजा प्रदान किया जाए
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गेहूं खरीद केंद्रों पर नमी के मापदंडों में राहत दी जाए
गोंडा के किसान रमेश यादव का कहना है:
“हमने पूरे साल मेहनत की। अब जब फसल तैयार थी, तो ये बारिश आफत बन गई। अगर जल्दी मदद नहीं मिली, तो बर्बाद हो जाएंगे।”
मौसम विभाग की चेतावनी
मौसम विभाग ने उत्तर प्रदेश के कई हिस्सों में अगले 48 घंटे तक हल्की से मध्यम बारिश की चेतावनी जारी की है।
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यह स्थिति फसल की स्थिति को और गंभीर बना सकती है।
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किसानों को सलाह दी गई है कि वे कटाई की प्रक्रिया में जल्दबाज़ी ना करें लेकिन सतर्क रहें।
प्रशासन की प्रतिक्रिया
गोंडा जिला कृषि अधिकारी ने कहा,
“हमें किसानों से नुकसान की सूचनाएं मिल रही हैं। हम जल्द ही टीमें भेजकर सर्वे कराएंगे। सरकार के निर्देश पर राहत देने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।”
क्या होगा आर्थिक प्रभाव?
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प्रति बीघा औसतन 12-15 कुंतल उत्पादन की उम्मीद थी
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बारिश के कारण 50% तक नुकसान की आशंका
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इससे मंडी में आवक कम, और कीमतों में उतार-चढ़ाव संभावित
निष्कर्ष
श्रावस्ती और गोंडा में बारिश से गिरी गेहूं की फसल ने यह स्पष्ट कर दिया कि प्राकृतिक आपदाएं किसानों की सबसे बड़ी चुनौती बनी हुई हैं। ऐसे में जरूरत है कि सरकार त्वरित सर्वे, प्रभावी मुआवजा और फसल बीमा योजना के लाभ को ज़मीनी स्तर पर कारगर रूप से लागू करे, ताकि मेहनतकश किसान फिर से खड़ा हो सके।



