नई दिल्ली: भारत और पाकिस्तान के बीच आतंकवाद को लेकर तनाव के बीच रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने गुरुवार, 15 अक्टूबर 2026 को पाकिस्तान को कड़ा संदेश दिया। दिल्ली में आयोजित नेशनल डिफेंस कॉन्क्लेव 2026 को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि पाकिस्तान से होने वाली किसी भी अगली आतंकी कार्रवाई का जवाब पहले से अधिक सख्त होगा। उन्होंने साफ किया कि भारत शांति का समर्थक है, लेकिन देश की सुरक्षा और संप्रभुता की रक्षा करने की क्षमता को कमजोरी नहीं समझा जाना चाहिए।
राजनाथ सिंह ने अपने संबोधन में सर्जिकल स्ट्राइक, बालाकोट एयरस्ट्राइक और ऑपरेशन सिंदूर का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत की आतंकवाद से निपटने की रणनीति में बदलाव आया है। अब केवल कूटनीतिक विरोध तक सीमित रहने के बजाय आतंकवाद के स्रोतों को निशाना बनाने पर जोर दिया जा रहा है।
पाकिस्तान को सीधा संदेश—आतंकी कार्रवाई का जवाब होगा और कड़ा
रक्षा मंत्री ने कहा कि भारत की सभ्यता और सांस्कृतिक परंपरा संवाद, सह-अस्तित्व और शांतिपूर्ण समाधान का समर्थन करती है। लेकिन शांति के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को कमजोरी नहीं माना जाना चाहिए। उन्होंने जोर दिया कि देश अपनी संप्रभुता, अखंडता और राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए पूरी तरह तैयार है।
उनके बयान का सबसे अहम हिस्सा पाकिस्तान से होने वाली संभावित आतंकी गतिविधियों को लेकर था। राजनाथ सिंह ने चेतावनी दी कि यदि पाकिस्तान की ओर से आगे कोई आतंकी कार्रवाई होती है, तो भारत का जवाब पिछली कार्रवाई से भी अधिक सख्त होगा।
यह बयान ऐसे समय आया है, जब भारत सीमा पार आतंकवाद को अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर चुनौती मानता रहा है। हालांकि, रक्षा मंत्री ने किसी नए सैन्य अभियान की तारीख या योजना की घोषणा नहीं की। उनका संदेश भविष्य में संभावित आतंकी हमलों के खिलाफ भारत के रुख को लेकर था।
सर्जिकल स्ट्राइक, बालाकोट और ऑपरेशन सिंदूर का जिक्र
राजनाथ सिंह ने अपने संबोधन में भारत की पिछली सैन्य कार्रवाइयों को आतंकवाद के खिलाफ बदली हुई रणनीति के उदाहरण के तौर पर पेश किया। उन्होंने 2016 की सर्जिकल स्ट्राइक, 2019 की बालाकोट एयरस्ट्राइक और ऑपरेशन सिंदूर का जिक्र किया।
रक्षा मंत्री के मुताबिक, इन अभियानों ने यह संकेत दिया कि भारत आतंकवादी हमलों के बाद केवल विरोध दर्ज कराने तक सीमित नहीं रहना चाहता, बल्कि आतंकवाद के ठिकानों और उसके नेटवर्क के खिलाफ कार्रवाई करने की नीति पर आगे बढ़ रहा है।
उन्होंने ऑपरेशन सिंदूर को भारत की बढ़ती सैन्य और तकनीकी क्षमता का उदाहरण बताया। उनके अनुसार, इस अभियान में स्वदेशी रक्षा प्रणालियों और आधुनिक हथियारों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने आकाश मिसाइल प्रणाली और ब्रह्मोस जैसे हथियारों का भी उल्लेख किया।

आतंकवाद का बदलता रूप, ‘व्हाइट-कॉलर’ और अकेले हमलावरों से खतरा
राजनाथ सिंह ने केवल सीमा पार आतंकवाद ही नहीं, बल्कि बदलते सुरक्षा खतरों पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि आधुनिक दौर में आतंकवाद संगठित समूहों तक सीमित नहीं है। अब अकेले हमलावरों यानी ‘लोन-वुल्फ’ हमलों और ‘व्हाइट-कॉलर आतंकवाद’ जैसी चुनौतियों पर भी सतर्क रहने की जरूरत है।
उनके मुताबिक, डिजिटल तकनीक और बदलते तौर-तरीकों के कारण कट्टरपंथी गतिविधियों की पहचान करना सुरक्षा एजेंसियों के लिए अधिक जटिल हो सकता है। उन्होंने नागरिकों से भी सतर्क और जिम्मेदार रहने की अपील की। किसी संदिग्ध गतिविधि की समय पर जानकारी देना बड़े खतरे को टालने में मददगार हो सकता है।
रक्षा मंत्री ने सुरक्षा से जुड़े पांच प्रकार के खतरों—दुष्प्रचार, अस्थिरता पैदा करना, व्यवधान, धोखे और विनाश—का भी उल्लेख किया। उनका कहना था कि आज की सुरक्षा चुनौतियों से निपटने के लिए केवल सैन्य शक्ति ही नहीं, बल्कि तकनीक, खुफिया जानकारी और सामाजिक सतर्कता भी महत्वपूर्ण हैं।
रक्षा उत्पादन में आत्मनिर्भरता पर जोर
राजनाथ सिंह ने भारत की रक्षा उत्पादन क्षमता और स्वदेशी हथियारों के विकास को राष्ट्रीय सुरक्षा से जोड़ते हुए कहा कि देश भविष्य की चुनौतियों के लिए आत्मनिर्भर रक्षा व्यवस्था तैयार कर रहा है।
उन्होंने बताया कि भारत में 500 से अधिक कंपनियां रक्षा उत्पादन क्षेत्र में काम कर रही हैं। रक्षा क्षेत्र के आधुनिकीकरण बजट का 75 प्रतिशत हिस्सा भारतीय उद्योगों से खरीद के लिए निर्धारित किए जाने का भी उन्होंने उल्लेख किया।
रक्षा मंत्री के अनुसार, भारत का रक्षा उत्पादन 2014 में लगभग 40 हजार करोड़ रुपये से बढ़कर रिकॉर्ड 1.78 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो गया है। वहीं, रक्षा निर्यात भी बढ़कर लगभग 39 हजार करोड़ रुपये के स्तर पर पहुंच गया है। उन्होंने कहा कि भारतीय रक्षा उत्पाद अब करीब 100 देशों तक पहुंच रहे हैं।
उन्होंने स्टार्टअप, छोटे उद्योगों और युवा नवाचारकर्ताओं की भूमिका को भी महत्वपूर्ण बताया। ड्रोन, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, साइबर सुरक्षा और नई सैन्य तकनीकों के क्षेत्र में काम कर रहे भारतीय उद्यम देश की रक्षा तैयारियों को मजबूत करने में योगदान दे रहे हैं।
भारत की रणनीति में ‘स्मार्ट पावर’ की भूमिका
रक्षा मंत्री ने आधुनिक युद्ध के लिए ‘स्मार्ट पावर’ की जरूरत पर जोर दिया। उनके मुताबिक, भविष्य की रक्षा रणनीति में उन्नत हथियारों के साथ किफायती तकनीक, मानव खुफिया जानकारी के साथ कृत्रिम बुद्धिमत्ता और आधुनिक प्रणालियों के साथ तेजी से अनुकूल होने वाली तकनीकों का इस्तेमाल जरूरी होगा।
इसका उद्देश्य बदलती परिस्थितियों में सेना को अधिक सक्षम बनाना और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी चुनौतियों का प्रभावी जवाब देना है।
राजनाथ सिंह के संबोधन का व्यापक संदेश यह रहा कि भारत शांति चाहता है, लेकिन सुरक्षा के मामले में कोई समझौता नहीं करेगा। पाकिस्तान को दी गई चेतावनी के साथ उन्होंने स्वदेशी रक्षा उत्पादन, तकनीकी विकास और नागरिक सतर्कता को भी मजबूत सुरक्षा व्यवस्था का अहम हिस्सा बताया।



